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मौसम बदलाव से बढ़ी मौसमी बीमारियां, 70 प्रतिशत से ज्यादा मरीजों में सर्दी, जुकाम, Monday 25 December 2023 06:08 AM UTC+00
वायरल का बदला ट्रेंड चिकित्सकों के अनुसार तापमान और आर्द्रता के स्तर में बदलाव के साथ ही वायरल फीवर का ट्रेंड भी बदला है। जिससे फ्लू, जुकाम और निमोनिया जैसे रेस्पिरेटरी इंफेक्शन में बढ़ोतरी होती है। जो सर्दी-जुकाम और खांसी एक सप्ताह में ठीक हो जाती थी वो अब लम्बे समय तक ठीक नहीं हो रही है। जिसके कारण फेफडे और रेस्पिरेटरी ट्रेक पर भी संक्रमण बढ़ रहा। इसके अलावा अस्पताल में निमोनिया, टाइफाइड और अस्थमा के मरीज भी आ रहे हैं। कार्डियक अरेस्ट और स्ट्रोक का खतरा फेफड़ों के गंभीर संक्रमण के कारण शरीर के अंगों तक ब्लड और ऑक्सीजन न पहुंच पाने के कारण मरीज की जान जोखिम में जा सकती है। तापमान में गिरावट के साथ ही कार्डियक अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। सर्दी में रक्त धमनियां सिकुड़ जाती हैं. जिसकी वजह से मरीजों को परेशानी हो सकती है। ऐसे में जो पुराने रोगों से ग्रसित मरीज है या ऐसे मरीज जिनकी इम्यूनिटी कमजोर है, इस तरह के मरीजों की विशेष देखभाल की जरुरत होती है। ठंड में वायरल या निमोनिया आम चिकित्सकों के अनुसार ऐसे मौसम में बच्चों का ज्यादा ख्याल रात में रखने की जरुरत होती है। इस मौसम में बच्चों में वायरल निमोनिया आम बात है जिससे खांसी, जुकाम और सांस लेने में दिक्कत होने पर फौरन डॉक्टर से इलाज करवाएं। 3 से 4 साल के छोटे बच्चों को हमेशा हाइड्रेट रखें। बच्चों को पानी की पहुंच से दूर रखें, भीगने से उनके जल्दी बीमार होने की आशंका बढ़ जाती है। इनका कहना है मौसम में आए बदलाव से मेडिसिन ओपीडी बढ़ गई है। इनमें से 70 फीसदी से ज्यादा मरीजों में वायरल के लक्षण है। ऐसे में इन मरीजों को सावधानी की जरूरत है। डाॅ.मुकेश वर्मा, असिस्टेंट प्रोफेसर मेडिकल कॉलेज |
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