>>: डिजिटल आजादी के लिए एआइ तकनीक बन रही नई चुनौती

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वाशिंगटन। वैश्विक इंटरनेट स्वतंत्रता लगातार 13वें वर्ष घट गई है। अमरीकी संस्थान फ्रीडम हाउस की रिपोर्ट के अनुसार भ्रामक सूचनाएं फैलाने और कंटेंट सेंशरशिप बढ़ाने के लिए एआइ का बढ़ता प्रयोग भी इसका एक कारण है। एआइ डिजिटल दमन के पैमाने को बढ़ा रहा है। भविष्य में स्थिति और भी खराब होगी, खासकर जब एआइ और अधिक प्रभावशाली होगा। रिपोर्ट में पाया गया कि म्यांमार, फिलीपींस, कोस्टा रिका सहित कई देशों ने इस साल ऑनलाइन स्वतंत्रता पर भारी प्रतिबंध लगाया है। जबकि लगातार नौवें साल चीन को 100 में से नौ अंक के साथ इंटरनेट स्वतंत्रता के लिए सबसे खराब स्थिति वाला देश माना गया।

विरोध को दबाने के लिए इंटरनेट पर पाबंदी : ईरान में डिजिटल दमन तेज हुआ है, जो सबसे बड़ी गिरावट वाला देश है। ऐसा इसलिए क्योंकि विरोधी प्रदर्शनों को दबाने के लिए अधिकारियों ने इंटरनेट सेवा बंद की और सोशल मीडिया साइट्स को ब्लॉक कर निगरानी बढ़ा दी। फिलीपींस में स्थितियां और खराब हुईं क्योंकि उन समाचार साइट्स को ब्लॉक करने के लिए आतंकवाद विरोधी कानून का इस्तेमाल किया जो प्रशासन की आलोचना करती थीं। कोस्टा रिका की इंटरनेट स्वतंत्रता भी खतरे में पड़ गई, जब स्थानीय प्रशासन ने कई बड़े मीडिया आउटलेट्स को परेशान करने के लिए ऑनलाइन ट्रोल्स को काम पर रखा।

एआइ दो तरीके से पहुंचा रहा नुकसान: इंटरनेट स्वतंत्रता की स्थिति 29 देशों में बेहद खराब है, जबकि 20 में हालात थोड़े बेहतर हैं। एआइ में प्रगति ने दो प्रमुख तरीकों से ऑनलाइन स्वतंत्रता में गिरावट में योगदान दिया है। पहला, एआइ-आधारित उपकरण जो तेजी से प्रगतिशील और सुलभ हैं, गलत सूचना फैलाने के लिए उपयोग किए जा रहे हैं। पिछले साल इस नई तकनीक का उपयोग कम से कम 16 देशों में संदेह पैदा करने, विरोधियों को बदनाम करने या सार्वजनिक बहस को प्रभावित करने के लिए किया गया। दूसरा, कंटेंट सेंसरशिप को अधिक कुशल बनाने के लिए एआइ का भी उपयोग किया गया। आइसलैंड को लगातार पांचवें वर्ष इंटरनेट स्वतंत्रता के लिए सर्वश्रेष्ठ देश का दर्जा मिला। इसे 100 में से 94 अंक मिले। जबकि दूसरे स्थान पर मौजूद एस्टोनिया को 93 अंक। भारत का स्कोर 50 रहा। पिछले एक दशक में गाम्बिया में सबसे अधिक सुधार देखा गया है।

एक्सपर्ट व्यू:
इंटरनेट दमन के मूल कारण देशों के अनुसार अलग-अलग हैं। पिछले दशक की प्रवृत्ति के दो प्रमुख चालक हैं। पहला, लोकतंत्र में व्यापक गिरावट। दूसरा, विदेशों में साइबर संप्रभुता के अपने मॉडल को ले जाने में चीनी सरकार की सफलता जिसे उसने अपनी कई ऐप्स और अन्य प्लेटफॉर्म के जरिए पहुंचाया- एली फंक, प्रौद्योगिकी और लोकतंत्र की अनुसंधान निदेशक, फ्रीडम हाउस

वैश्विक इंटरनेट यूजर्स

  • 4.9 अरब लोगों की विश्व में इंटरनेट तक पहुंच
  • 78% उन देशों में रहते हैं, जहां राजनीतिक, सामाजिक या धार्मिक मुद्दों पर सामग्री पोस्ट करने के लिए लोगों की गिरफ्तारी हुई
  • 67% ऐसे देशों के नागरिक जहां जून, 2022 से लोगों पर उनकी ऑनलाइन गतिविधियों के लिए हमला हुआ या मार दिया गया
  • 54% उन देशों में रहते हैं जहां सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म तक पहुंच अस्थायी या स्थायी रूप से प्रतिबंधित थी
  • 46% ऐसे देशों के नागरिक हैं, जहां अधिकारियों ने अक्सर राजनीतिक कारणों से इंटरनेट या मोबाइल नेटवर्क पर प्रतिबंध लगाया
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