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Table of Contents

अलवर. आधी आबादी कही जाने वाली महिलाओं को विधानसभा चुनाव में प्रमुख राजनीतिक दलों द्वारा ज्यादा मौका नहीं दिया हो। पिछले चार दशक में अलवर जिले से मात्र आधा दर्जन महिलाएं ही विधायकी की चुनाव जीत सकी हैं। इनमें से भी मात्र एक महिला विधायक ऐसी हैं, जो दो बार विधानसभा पहुंचने में सफल रही।


अलवर जिले के राजनीतिक परिदृष्य की बात करें तो यहां पिछले चार दशक में अलवर शहर से पुष्पा शर्मा व मीना अग्रवाल विधायक रहीं। राजगढ़-लक्ष्मणगढ़ से गोलमा देवी और रामगढ़ से सफिया खान विधायकी का चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंची, लेकिन इन चारों महिलाओं को दूसरी बार विधायक बनने का मौका नहीं मिला। इन्हें दूसरी बार पार्टी ने ही टिकट नहीं दिया। केवल एक मात्र शकुंतला रावत ही बानसूर सीट से लगातार दो बार विधानसभा का चुनाव जीती हैं।

रावत दो बार विधायक बनी, अब तीसरी बार चुनाव मैदान में
राज्य की कैबिनेट मंत्री शकुंतला रावत कांग्रेस के टिकट पर पहली बार वर्ष-2013 में बानसूर सीट से विधानसभा का चुनाव लड़ीं। रावत पहली बार में ही जीतकर विधानसभा पहुंची। इसके बाद वर्ष-2019 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने बानसूर से उन्हें फिर मौका दिया। रावत ने लगातार दूसरी जीत दर्ज की और विधानसभा पहुंची। दूसरी जीत पर कांग्रेस सरकार में उन्हें कैबिनेट मंत्री का पद मिला। रावत के बाद इस बार बानसूर से लगातार तीसरी बार चुनाव मैदान में हैं।

राठ क्षेत्र मुंडावर विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस और बीजेपी के बीच चुनावी मुकाबला दिलचस्प साबित हो रहा है. कांग्रेस ने ललित यादव को अपना उम्मीदवार बनाया है, जबकि भाजपा ने अपने पूर्व विधायक मंजीत धर्मपाल चौधरी को चुना है। दिलचस्प बात यह है कि ये दोनों उम्मीदवार पहले 2018 में एक ही सीट के लिए एक-दूसरे के खिलाफ प्रतिस्पर्धा कर चुके थे, लेकिन इस बार चुनावी लड़ाई और भी दिलचस्प हो गई है।

कुल मिलाकर, मुंडावर में मुकाबला एक दिलचस्प मुकाबला बनता जा रहा है, क्योंकि कांग्रेस और भाजपा जीत के लिए प्रतिस्पर्धा कर रही हैं और इस निर्वाचन क्षेत्र के निवासियों को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण मुद्दों को संबोधित करने का प्रयास कर रही हैं।

वर्तमान चुनाव में, दोनों उम्मीदवारों ने अपने अभियानों को राज्य-स्तरीय मुद्दों पर केंद्रित किया है। यद्यपि अलग-अलग क्षेत्रों में विशिष्ट मुद्दे अलग-अलग हैं, पीने और सिंचाई के पानी तक पहुंच, रोजगार के अवसर, औद्योगिक क्षेत्रों की स्थापना और समग्र विकास के सामान्य विषय सभी में गूंजते हैं। हालाँकि, दोनों प्रमुख उम्मीदवारों ने राज्य-स्तरीय चिंताओं को दूर करने पर अधिक जोर दिया है।

 

होटल व रेस्टोरेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष पवन खंडेलवाल ने बताया कि अलवर में करीब एक दर्जन से ज्यादा बड़े होटल हैं और करीब पांच से ज्यादा बडे पैलस हैं, जहां शादी शादियां होती हैं। ज्यादातर में नवंबर से लेकर फरवरी तक बुकिंग हैं। फिल्मी कलाकारों व नामचीन लोगों की तरह शाही शादी करने के इच्छुक देशी विदेशों युवक- युुवती यहां आ रहे हैं। ज्यादातर ने मेहंदी व शादी के लिए ऑनलाइन बुकिंग करवाई है।
केसरोली में होटल के मैनेजर विपुल ने बताया कि अलवर में शादी करना जयपुर, जोधपुर व उदयपुर के बडे किलों से अधिक सस्ता रहता है। दिल्ली व जयपुर के नजदीक होने के कारण एनआरआई यहां शादी के लिए आते हैं। पिछले महीने ही यूके में रहने वाले एनआरआई युवक- युवती की वेडिंग हुई है। आगामी दिनों में नवंबर से दिसंबर तक के लिए होटल बुक हैं। इसके बाद जनवरी व फरवरी में अच्छी बुकिंग हैं। इसके साथ ही तिजारा व नीमराणा में इस बार अच्छी बुकिंग हैं।

यादगार होते हैँ शादी के पल
होटल संचालक योगेश भेडी ने बताया कि जैसलमेर, जोधपुर के साथ वेडिंग के लिए अलवर बहुत पसंद किया जा रहा है। यहां के ज्यादातर किले पहाडियों पर बने हुए हैं जो सजने के बाद सुंदर लगते हैं। नवंबर व दिसंबर में रॉयल वेडिंग होने वाली है।

स्वीप कार्यक्रम के प्रभारी श्रेष्ठ दीक्षित ने बताया कि राजस्थान विधानसभा के चुनाव 25 नवंबर को होंगे। विधानसभा चुनाव में मतदान का प्रतिशत बढ़ाने के लिए इस साल निर्वाचन विभाग की ओर से अनेक नवाचार किए जा रहे हैं। इसी के तहत नई पहल की गई है। इसमें शादी ब्याह में छपने वाले निमंत्रण कार्ड की तरह ही इस बार मतदान दिवस के लिए निमंत्रण कार्ड छपवाया गया हैं। जो देखने में हुबहू शादी के कार्ड जैसा ही नजर आता है। खास बात यह है कि इसका रंग पीला रखा गया है जो कि हल्दी का रंग होता है और शगुन का प्रतीक भी है । यह रंग शादी ब्याह सहित अन्य मांगलिक कार्य में शुभ माना जाता है।

इसमें निवेदक जिला निवार्चन अधिकारी है व जिला स्वीप नोडल अधिकारी है। स्वागतकर्ता बूथ लेवल अधिकारी है। इसमें मतदान का समय और दिनांक भी लिखी गई है। अलवर में निवार्चन विभाग की ओर से मत्तु सिंह और वोटी बाई निमंत्रण देकर आने की अपील कर रहे हैं। इसके लिए सोशल मीडिया पर जोर शोर से प्रचार किया जा रहा है।अलवर में निवार्चन विभाग की ओर से मत्तु सिंह और वोटी बाई निमंत्रण देकर आने की अपील कर रहे हैं। इसके लिए सोशल मीडिया पर जोर शोर से प्रचार किया जा रहा है।

आज से, केंद्र उन व्यक्तियों को डाक मतपत्र के माध्यम से मतदान की सुविधा प्रदान करेंगे जो विधानसभा चुनाव में भाग लेने में असमर्थ हैं। इसमें पुलिस अधिकारी, होम गार्ड, वन रक्षक, ड्राइवर, क्लीनर, कंडक्टर और आवश्यक सेवाओं में शामिल कर्मी शामिल हैं।

अलवर शहर में डाक मतपत्र सुविधा केन्द्र 17 से 20 नवम्बर तक कार्यरत रहेगा। केंद्र विभिन्न प्रशिक्षण स्थलों जैसे प्रताप ऑडिटोरियम, महावर ऑडिटोरियम, कला भारती ऑडिटोरियम और जैन बी.एड कॉलेज में स्थापित किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त, एक अन्य केंद्र 18 से 20 नवंबर तक अलवर में जिला पुलिस लाइन में उपलब्ध रहेगा।

रिटर्निंग ऑफिसर कार्यालयों पर केंद्र स्थापित किये जायेंगे

इस केन्द्र के प्रभारी अधिकारी अलवर के पुलिस अधीक्षक होंगे। 19 से 21 नवंबर तक सभी विधानसभा मुख्यालयों पर और 22 से 24 नवंबर तक सभी रिटर्निंग ऑफिसर कार्यालयों पर केंद्र स्थापित किये जायेंगे. इसके अलावा, 24 से 25 नवंबर तक मतदान दल सक्रिय रहेंगे। इन दलों का प्रस्थान एवं संग्रहण स्थल अलवर के बाबू शोभाराम राजकीय कला महाविद्यालय में होगा।

जिले में आगामी विधानसभा चुनाव के लिए वाहनों का अधिग्रहण पूरा हो चुका है। हमारे यहां 3 हजार से ज्यादा गाड़ियाँ हैं। यदि इनमें से कोई भी वाहन चुनाव ड्यूटी के लिए नहीं आता है, तो उन्हें लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम और मोटर वाहन अधिनियम के तहत सख्त परिणाम भुगतने होंगे। अलवर जिले में चुनाव प्रक्रिया के लिए करीब 3300 वाहनों का अधिग्रहण किया गया है

परिवहन विभाग को करीब एक हजार छोटे वाहन मिले हैं। हमने मतदान दलों के लिए लगभग 1100 बसें, मिनी बसें, ट्रक, अलवर वाहिनी और 10 सीटों वाले वाहन भी हासिल किए हैं। इसके अतिरिक्त, पुलिस ने अपने उपयोग के लिए 1200 वाहनों का अधिग्रहण किया है। अब जब अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी हो गई है तो वाहनों को चुनाव ड्यूटी में लगाया जा रहा है।

तीन वाहनों को नोटिस जारी

चुनाव प्रक्रिया के लिए अधिग्रहण किए गए तीन वाहन रिपोर्टिंग के लिए नहीं आए। परिवहन विभाग ने इन वाहनों के खिलाफ का कार्रवाई के लिए प्रस्ताव तैयार कर जिला निर्वाचन अधिकारी को भेजे। जिला निर्वाचन अधिकारी की ओर से इन वाहनों को नोटिस जारी किए हैं। साथ ही एक वाहन का रूट परमिट निरस्त किए जाने के लिए भी लिखा गया है।

सख्त कार्रवाई होगी

जिला प्रादेशिक परिवहन अधिकारी सतीश चौधरी ने कहा है कि चुनाव ड्यूटी के लिए निर्धारित समय व स्थान पर रिपोर्टिंग नहीं करने वाले वाहनों एवं वाहन मालिकों के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई की जाएगी।

एक साल की सजा और आरसी निरस्त

चुनाव में अधिग्रहण होने के बावजूद जो वाहन निर्धारित समय व स्थान पर रिपोर्टिंग नहीं देंगे उनके खिलाफ लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम और मोटर वाहन अधिनियम के तहत कार्रवाई का प्रावधान है। जिसमें वाहन मालिक को एक साल तक की सजा तथा वाहन का रजिस्ट्रेशन (आरसी) और रूट परमिट निरस्त किए जा सकते हैं।

 

आधी आबादी कही जाने वाली महिलाओं को विधानसभा चुनाव में प्रमुख राजनीतिक दलों द्वारा ज्यादा मौका नहीं दिया हो। पिछले चार दशक में अलवर जिले से मात्र आधा दर्जन महिलाएं ही विधायकी की चुनाव जीत सकी हैं।

इनमें से भी मात्र एक महिला विधायक ऐसी हैं, जो दो बार विधानसभा पहुंचने में सफल रही। अलवर जिले के राजनीतिक परिदृश्य की बात करें तो यहां पिछले चार दशक में अलवर शहर से पुष्पा शर्मा व मीना अग्रवाल विधायक रहीं। राजगढ़-लक्ष्मणगढ़ से गोलमा देवी और रामगढ़ से साफिया खान विधायकी का चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंची, लेकिन इन चारों महिलाओं को दूसरी बार विधायक बनने का मौका नहीं मिला।

इन्हें दूसरी बार पार्टी ने ही टिकट नहीं दिया। केवल एक मात्र शकुंतला रावत ही बानसूर सीट से लगातार दो बार विधानसभा का चुनाव जीती हैं। रावत दो बार विधायक बनी, अब तीसरी बार चुनाव मैदान में: राज्य की कैबिनेट मंत्री शकुंतला रावत कांग्रेस के टिकट पर पहली बार वर्ष-2013 में बानसूर सीट से विधानसभा का चुनाव लड़ीं। रावत पहली बार में ही जीतकर विधानसभा पहुंची।

इसके बाद वर्ष-2019 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने बानसूर से उन्हें फिर मौका दिया। रावत ने लगातार दूसरी जीत दर्ज की और विधानसभा पहुंची। दूसरी जीत पर कांग्रेस सरकार में उन्हें कैबिनेट मंत्री का पद मिला। रावत के बाद इस बार बानसूर से लगातार तीसरी बार चुनाव मैदान में हैं।

कार्तिक मास में मनाया जाने वाला छठ पूजा का पर्व शुक्रवार को नहाय खाय से प्रारंभ होगा। इस पर्व का समापन 20 नवंबर को सप्तमी को उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर होगा। इसे डाला छठ व्रत के नाम से भी जाना जाता है। इस पर्व में पूर्वांचल के लोग सूर्य भगवान व छठी मैया की पूजा करते हैं।

व्रत में होता है 36 घंटे का उपवास: छठी व्रत में भगवान आदिदेव सूर्य नारायण की उपासना निराहार करीब 36 घंटों का उपवास रहकर पूर्ण करते हैं। यह व्रत कार्तिक मास शुक्ल पक्ष चतुर्थी से शुरू होकर सप्तमी को सुबह सुर्योदय के बाद पूर्ण होता है। इस व्रत को सबसे पहले त्रेता युग में माता सीता और द्वापर युग में कुंती ने किया था, जो कि सूर्य देव की वरदान से कुंती को कर्ण जैसे शक्तिशाली पुत्र की प्राप्ति हुई। यह पवित्रता के साथ किया जाता है।

मुख्य समारोह

अलवर जिले में छठ पूजा कार्यक्रम मुख्य रूप से पुर्वांचल विकास सेवा समिति के तत्वाधान में आयोजित किया जाता है, समिति के अध्यक्ष लक्षमेश 7 कुमार सिंह ने बताया कि छठ पूजा का मुख्य समारोह सागर पर होगा। इसके अलावा दीवाकरी, मुल्तान नगर, बख्तल की चौकी के पास, बख्तल की चौकी स्थित पंडित का बास, देसूला, अपनाघर शालीमार, शिवाजी पार्क व कालाकुओं में छठ पूजा पर्व मनाया जाएगा।

दिवाली पर जमकर हुई आतिशबाजी ने कई शहरों की आबोहवा बिगाड़ कर रख दी है। आज शुक्रवार को भिवाड़ी का एक्यूआई दोपहर तक 376 है, हालाँकि अलवर का एक्यूआई 190 है जो पहले के मुकाबले कम है। गुरुवार को अलवर का एक्यूआई 239 और भिवाड़ी का 370 पहुंच गया था।

आसमान में जलते पटाखों की वजह से प्रदूषण स्तर अचानक खतरनाक चुका है। कहा जा रहा है इसका असर ये होगा कि आने वाले दिनों में हवा और भी जहरीली हो जाएगी। हवा में धूल के कणों व अति सूक्ष्म कणों की मात्रा लगातार बढ़ रही है। इसके चलते सांस के मरीजों को जहां दिक्कत हो रही है।

वहीं ऐसे लोग जिन्हें एलर्जी की समस्या है,उन्हें आंखों में जलन व खांसी की परेशानी हो रही है। गुरुवार को शहर का एक्यूआई 178 रहा। जो स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है। जबकि दीपावली पर शहर का एक्यूआई 300 से अधिक पर पहुंच गया,जो स्वास्थ्य के लिए बहुत खराब था।

सांस की दिक्कत और आंखों में जलन शिकायत: शहर में दीपावली पर चले पटाखों और वाहनों की आवाजाही ने प्रदूषण को अचानक अधिक बढ़ा दिया। इसके चलते घर से बाहर निकलने पर लोगों को धुआं की वजह से सांस लेने में दिक्कत,आंखों में जलन और खांसी की शिकायत रही।

प्रदूषण में क्या सावधानियां बरतें

-घर में प्राकृतिक एयर-प्यूरीफाइंग पौधे जैसे मनी प्लांट, एलोवेरा और स्पाइडर प्लांट लगाएं
-जरूरी हो तभी बाहर निकलें
-मास्क पहनें
-अच्छी डाइट लें
-हाइड्रेट रहें

- एक पूर्व विधायक, दो पूर्व प्रत्याशी व जिला मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष कार्रवाई में शामिल

- चुनाव में टिकट न मिलने से थे नाराज, नामांकन दर्ज कराया, पार्टी की मनुहार नहीं मानी

कांग्रेस के बाद भाजपा ने भी बागियों पर चाबुक चलाना शुरू कर दिया है। अलवर दक्षिण की 5 विधानसभाओं से चुनावी मैदान में खड़े हुए 6 बागियों को पार्टी ने 6 साल के लिए बाहर का रास्ता दिखा दिया। पार्टी की इस कार्रवाई से नाराज चल रहे नेताओं में भी संदेश गया है। पार्टी का मानना है कि नाराज नेता मान जाएंगे और वह पार्टी के साथ खड़े हैं। यह भी कहा जा रहा है कि यदि किसी ने भीतरघात करने की कोशिश की तो चुनाव के बाद पार्टी उनसे भी निपटेगी। कार्रवाई करेगी। कुछ सीटों पर भीतरघात होने की संभावना कुछ लोगों ने जाहिर की है।


विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा ने चार सूचियां जारी कीं। जैसे ही सूची में दूसरे प्रत्याशियों के नामों की घोषणा हुई तो दावेदारों ने विरोध करना शुरू कर दिया। पार्टी ने डैमेज कंट्रोल के लिए मनाने की काफी कोशिश की लेकिन पार्टी प्रत्याशियों के विरोध में ही नामांकन करा दिया और चुनावी मैदान में उतर गए। इनमें कठूमर से पूर्व विधायक मंगलराम कोली, रामगढ़ से पूर्व प्रत्याशी सुखवंत सिंह, राजगढ़-लक्ष्मणगढ़ से विजय समर्थलाल मीणा, अलवर ग्रामीण से चुनाव लड़ रहे पार्टी के किसान मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष मुकेश सांवरिया, थानागाजी से भूपेश राजावत, इसी विधानसभा से रोहिताश घांघल को पार्टी ने 6 साल के लिए सदस्यता से निष्कासित किया है। ये सभी लोग इस बार चुनावी मैदान में हैं। किसी ने दूसरे दल से टिकट पाया है तो कुछ निर्दलीय ताल ठोके हुए हैं। वहीं निष्कासित प्रत्याशियों का दावा है कि वह इस बार चुनाव में पूरी तैयारी के साथ जुटे हैं। उनके साथ पार्टी ने टिकट न देकर अन्याय किया। वहीं दूसरी ओर अलवर उत्तर क्षेत्र के अध्यक्ष उम्मेद सिंह भाया ने बताया कि उनके क्षेत्र के बागियों पर कार्रवाई प्रदेश नेतृत्व ही करेगा।

5 विधानसभाओं से चुनाव लड़ रहे 6 कार्यकर्ताओं को पार्टी से 6 साल के लिए निष्कासित किया गया है। पार्टी में अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

- अशोक गुप्ता, जिलाध्यक्ष अलवर दक्षिण

मेहंदी, हल्दी व शादी के लिए होटल-रिसोर्ट हुए बुक
देवउठनी एकादशी से वेङ्क्षडग सीजन शुरू होने वाला है। इन दिनों युवाओं में डेस्टिनेशन वेङ्क्षडग का क्रेज बना हुआ है। ज्यादातर युवा चाहते हैं कि उनकी शादी यादगार बने। इसलिए वेङ्क्षडग के लिए नई जगह की तलाश करते हैं। वेङ्क्षडग डेस्टिनेशन के रूप में अलवर अलवर युवाओं की पसंद बनने लगा हैं। देश भर के लोगों के साथ साथ एनआरआई दूल्हा दूल्हन भी अलवर में शादी के लिए आ रहे हैं।
होटल व रेस्टोरेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष पवन खंडेलवाल ने बताया कि अलवर में करीब एक दर्जन से ज्यादा बड़े होटल हैं और करीब पांच से ज्यादा बडे पैलस हैं, जहां शादी शादियां होती हैं। ज्यादातर में नवंबर से लेकर फरवरी तक बुङ्क्षकग हैं। फिल्मी कलाकारों व नामचीन लोगों की तरह शाही शादी करने के इच्छुक देशी विदेशों युवक- युुवती यहां आ रहे हैं। ज्यादातर ने मेहंदी व शादी के लिए ऑनलाइन बुङ्क्षकग करवाई है।
केसरोली में होटल के मैनेजर विपुल ने बताया कि अलवर में शादी करना जयपुर, जोधपुर व उदयपुर के बडे किलों से अधिक सस्ता रहता है। दिल्ली व जयपुर के नजदीक होने के कारण एनआरआई यहां शादी के लिए आते हैं। पिछले महीने ही यूके में रहने वाले एनआरआई युवक- युवती की वेङ्क्षडग हुई है। आगामी दिनों में नवंबर से दिसंबर तक के लिए होटल बुक हैं। इसके बाद जनवरी व फरवरी में अच्छी बुङ्क्षकग हैं। इसके साथ ही तिजारा व नीमराणा में इस बार अच्छी बुङ्क्षकग हैं।
यादगार होते हैँ शादी के पल: होटल संचालक योगेश भेडी ने बताया कि जैसलमेर, जोधपुर के साथ वेङ्क्षडग के लिए अलवर बहुत पसंद किया जा रहा है। यहां के ज्यादातर किले पहाडियों पर बने हुए हैं जो सजने के बाद सुंदर लगते हैं। नवंबर व दिसंबर में अच्छी तैयारी है। राजस्थानी लोक कलाकारों की प्रस्तुति भी होती है।

रॉयल वेङ्क्षडग के लिए अलवर बेहतर
होटल संचालक राम बिहारी कौशिक ने बताया कि अलवर का मौसम वेङ्क्षडग के अनुकूल रहता है। रॉयल वेङ्क्षडग के लिए एडवांस बुङ्क्षकग हो गई है। तैयारियां भी शुरू कर दी गई है। शहनाई, घोडी आदि का भी इंतजाम, मेहमानों के लिए खास व्यवस्थाएं की गई है। ज्यादातर लोग दिल्ली, यूपी, मुंबई, हैदराबाद, पुणे आदि बड़े शहरों से यहां आते हैं। यह शादी यादगार होती है।

विधानसभा चुनाव के मतदान में केवल सात दिन का समय बचा है और इस चुनाव में अलवर जिले में राजनीतिक वर्चस्व कायम करने के लिए कांग्रेस व भाजपा ने पूरा दमखम लगा रखा है। कारण है कि चार दशक के राजनीतिक इतिहास में ज्यादातर विधानसभा चुनाव परिणाम में किसी न किसी दल का दबदबा रहा है। यही कारण है कि अलवर जिले में जिस पार्टी का राजनीतिक दबदबा रहा है, प्रदेश में अक्सर सरकार भी उसी दल की बनी है। हालांकि 2003 के बाद अलवर जिले के राजनीतिक परिदृश्य में काफी बदलाव आया है, अब विधानसभा चुनाव के परिणाम भाजपा एवं कांग्रेस के इर्द गिर्द घूमने लगे हैं, जबकि इससे पूर्व के चुनाव में लोकदल, राष्ट्रीय जनता दल, जनता दल, बसपा आदि दल भी अपनी उपिस्थति जताते रहे हैं।
अलवर जिले में इस बार विधानसभा चुनाव में मुख्य मुकाबला कांग्रेस व भाजपा के बीच है। दोनों ही दल अलवर में राजनीतिक वर्चस्व कायम कर प्रदेश में सरकार बनाने के प्रयास में जुटे हैं। यही कारण है कि अलवर जिले की 11 सीटों पर कांग्रेस व भाजपा आमने सामने हैं और कुछ सीटाें पर इन दलों के बागी अन्य दलाें का दामन थाम व निर्दलीय चुनाव मैदान में उतर मुकाबले को दिलचस्प बनाने में जुटे हैं।

दो दशक में दो बार भाजपा व दो कांग्रेस का दबदबा

पिछले दो दशक में हुए विधानसभा चुनाव में अलवर जिले के परिणाम अजीबो गरीब रहे हैं, इस दौरान हुए चार विधानसभा चुनाव में दो बार भाजपा व दो बार कांग्रेस का अलवर जिले में दबदबा रहा। इसमें विधानसभा चुननाव 2003 में कांग्रेस के हाथ 7, भाजपा को 3 एवं निर्दलीय को एक सीट मिली। यानी इस चुनाव में अलवर जिले में दबदबा रहा। वहीं 2008 के विधानसभा चुनाव में 7 सीटें भाजपा, 3 सीटें कांग्रेस व एक सीट समाजवादी पार्टी को मिली। इस चुनाव में भाजपा ने वर्चस्व कायम किया। विधानसभा चुनाव 2013 में अलवर जिले में 9 सीटें भाजपा, एक सीट कांग्रेस एवं एक सीट राजपा को मिली, यानी 11 में से 9 सीटें जीतकर भाजपा ने अलवर जिले में अपना दबदबा कायम किया। वहीं 2018 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 5, भाजपा ने 2, बसपा ने 2 एवं निर्दलीयों ने 2 सीटें जीती। बाद में बसपा के दो विधायकों ने कांग्रेस का दामन थाम लिया, यानी जिले में कांग्रेस के 7 विधायक हो गए और दो निर्दलीयों ने भी कांग्रेस को ही समर्थन दिया। यानी 9 विधायकों के समर्थन से कांग्रेस ने अलवर जिले में दबदबा कायम किया।

डेढ़ दशक पहले थे कई दल, अब लुप्त हो गए

वर्ष 1985 से 98 के दौरान अलवर जिले में कांग्रेस, भाजपा, बसपा के अलावा जनता दल, लोकदल, राष्ट्रीय जनता दल का बोलबाला रहा। हालांकि ये दल अब जिले के राजनीतिक परिदृश्य से पूरी तरह लुप्त हो चुके हैं। वर्ष 1985 में कांग्रेस को 5, भाजपा को एक एवं लोकदल को 3 सीटें मिली, वहीं 1990 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 5, भाजपा को दो एवं जनता दल को 4 सीटें मिली। वहीं 1993 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा को 4, कांग्रेस को 3, जनता दल को एक सीट मिली तथा तीन सीटों पर निर्दलीय जीते, 1998 में कांग्रेस को 7, भाजपा को 2, राष्ट्रीय जनता दल को एक व बसपा को एक सीट मिली।

वार्डों में टूटी सड़कें, सूखते बोरिंग, आवारा घूमते पशु, कुत्तों का आतंक, पट्टा जारी न होने का दर्द शहर विधानसभा में जनता की जुबान पर है। पेयजल का संकट किसी से छिपा नहीं है। हर किसी ने इसका अकाल झेला है। जैसे ही प्रत्याशी लोगों की देहरी पर पहुंचते हैं तो वही मतदाता दर्द को छिपाकर नेताओं का इस तरह स्वागत कर रहे हैं जैसे दिल में उनके प्रति अपार प्रेम भरा हो लेकिन हकीकत में कुछ और है। लोगों के चेहरों की मुस्कान पर्दे के पीछे दर्द बयां कर रही है। जनता यही कह रही है कि अब तो परिणाम में ही उनका दर्द दिखेगा।

आर्य नगर क्षेत्र में एक प्रत्याशी वोट घर-घर मांग रहे थे। प्रत्याशी का स्वागत लोगों ने अच्छे से किया और जैसे ही नेता उठकर चले तो लोगों ने इशारा टूटी सड़क की ओर कर दिया। कह दिया कि इसका भी भला कर दो। धूल बहुत उड़ रही है। प्रत्याशी सुनकर आगे बढ़े लेकिन उनका चेहरा लटक गया। इसी तरह का सामना अधिकांश प्रत्याशियों को यहां करना पड़ रहा है। इस बार इस सीट पर कांग्रेस व भाजपा के बीच मुकाबला कड़ा है। जनता भी मान रही है। किसी प्रत्याशी की जीत आसान नहीं है। छोटे दलों के नेता भी कोई कोर कसर छोड़ने को तैयार नहीं हैं। इस समय पार्टियों में जोड़-तोड़ चल रहा है। माना जा रहा है कि जिसके पास ज्यादा पार्षद होंगे उसका उतना ही पलड़ा भारी होगा।

ये हैं मुद्दे

- पेयजल से लेकर बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। करीब 20 ही वार्डों में विकास ज्यादा दिख रहा है।
- सफाई व्यवस्था पटरी पर नहीं आ पा रही है।

- आवारा पशु, कुत्तों से जनता परेशान है।
- कच्ची बस्तियों के करीब 10 हजार पट्टे अटके हुए हैं।

- वेंडिंग व नॉन वेडिंग जोन का अभाव। रेहड़ी-फड़ वालों को स्वरोजगार के लिए जगह न मिल पाना।


क्या कहते हैं मतदाता
पानी की किल्लत नहीं हो पाई दूर
पेयजल का संकट वैसे तो पूरे जिले में है लेकिन शहर की जनता ने ज्यादा झेला। कई वर्षों से ये समस्या चली आ रही है। ये समस्या हम प्रत्याशियों के सामने भी उठा रहे हैं। आश्वासन मिल रहे हैं।

- गणेश दत्त, आर्य नगर

सड़कों का हाल ज्यादा अच्छा नहीं
शहर के सफाई का अभाव है। विकास कार्य नहीं हो पाए। सड़कों का हाल ज्यादा अच्छा नहीं है। धूल उड़ती है। आवारा पशुओं से भी छुटकारा नहीं मिल पाया है।

- राजेश कुमार, लाल डिग्गी

पट्टों का मुद्दा उठा रहे
कई साल से नगर निगम के दौड़ लगा रहे हैं लेकिन कच्ची बस्ती के लिए पट्टे जारी नहीं हुए। इन बस्तियों में हजारों लोग रहते हैं। हर प्रत्याशी के समक्ष हम ये मुद्दा रख रहे हैं।

-- विजय कुमार, कच्ची बस्ती वार्ड एक

रामगढ़, तिजारा, राजगढ़-लक्ष्मणगढ़ ऐसी विधानसभा जहां दोपहर से पहले हो जाता है 50 फीसदी मतदान


- दो विधानसभाओं में मुस्लिम मतदाता ज्यादा, राजगढ़ क्षेत्र मीणा बाहुल्य

- किशनगढ़बास, अलवर शहर, अलवर ग्रामीण में मतदान प्रतिशत होता है धीमा
- पिछले चुनाव में बहरोड़, थानागाजी का मतदान प्रतिशत कम रहने के थे आसान, 3 बजे बाद बढ़ा

रामगढ़, तिजारा, राजगढ़-लक्ष्मणगढ़ ऐसी विधानसभाएं हैं जहां के मतदाता चुनाव के दिन का इंतजार करते हैं। जैसे ही वोटिंग शुरू होती है तो लाइन लंबी लगती हैं। यहीं नहीं, दोपहर होने से पहले ही मतदान प्रतिशत 50 फीसदी पार कर जाता है। पिछले चुनावों में यही ट्रेंड रहा है। अलवर शहर व अलवर ग्रामीण विधानसभा के मतदाता देरी से जागते हैं। यानी दोपहर बाद यहां वोट अधिक पड़ते हैं।

सुबह से ही लग जाती हैं लाइनें

पिछले विधानसभा चुनाव में राजगढ़-लक्ष्मणगढ़ सीट पर चुनाव का प्रतिशत 9 बजे तक 28 फीसदी पहुंचा था। वहीं 11 बजे आंकड़ा आया तो ये प्रतिशत बढ़कर 48 हो गया। 12 बजे तक आंकड़ा 50 फीसदी पार था। जानकार कहते हैं कि ये सीट एसटी बाहुल्य है। ऐसे में मीणा बिरादरी के वोट बड़ी संख्या में पड़ते हैं। हालांकि वर्ष 2013 की तुलना में यहां वोटिंग प्रतिशत करीब 6 फीसदी गिरा था।
अन्य विधानसभाओं के ये हैं आंकड़े
इसी रामगढ़ विधानसभा में भी सुबह 9 बजे तक का मतदान प्रतिशत 26 फीसदी रहा और दोपहर होते-होते आंकड़ा 49.55 फीसदी पहुंच गया। यही हाल तिजारा सीट पर रहा। यहां मतदान प्रतिशत 9 बजे तक 23 फीसदी रहा और 11 बजे तक 47.22 फीसदी पहुंच गया। दोपहर 12 बजे से एक बजे के मध्य मतदान प्रतिशत 51 फीसदी था। इन दोनों सीटों पर बड़ी संख्या में मुस्लिम मतदाता हैं जो मतदान के दिन का इंतजार करते हैं। बहरोड़, थानागाजी में मतदान प्रतिशत दोपहर तक 37 फीसदी पहुंचा था। हालांकि दो बजे के बाद यहां गति पकड़ा। अलवर शहर व अलवर ग्रामीण में मतदान प्रतिशत दोपहर 12 बजे तक 33 से लेकर 36 फीसदी के मध्य रहा था। किशनगढ़बास, मुंडावर, कठूमर व बानसूर में भी मतदान प्रतिशत दोपहर 2 बजे तक धीमा रहा था।

2013 के मुकाबले 2018 में गिरा था मतदान प्रतिशत
विधानसभा चुनाव 2018 में मतदान प्रतिशत 74.41 रहा, जबकि 2013 के विधानसभा चुनाव में 77.58 प्रतिशत मतदान हुआ। यानी 2018 में पिछली बार के चुनाव से 3.17 प्रतिशत कम मतदान हुआ। इस बार जिला प्रशासन से लेकर अन्य विभागों ने जागरुकता के लिए अभियान चलाए हैं। ग्रामीण इलाकों में भी प्रभात फेरियां निकाली गई हैं। उम्मीद की जा रही है कि वर्ष 2013 के चुनाव प्रतिशत से आगे निकला जा सकता है। वर्ष 2013 के मुकाबले वर्ष 2018 में मतदान प्रतिशत कम हुआ था। ऐसे में कांग्रेस को इसका लाभ मिला। यहां 11 में से 5 सीटें उनकी झोली में गईं। भाजपा के पास दो रहीं। निर्दलीय व बसपा के पास 2-2 सीटें पहुंचीं। कम मतदान प्रतिशत से निर्दलीयों व बसपा को भी लाभ पहुंचाया। यदि इस बार मतदान प्रतिशत वर्ष 2013 के मुकाबले या इससे अधिक रहता है तो भाजपा को इसका लाभ मिल सकता है। क्योंकि वर्ष 2013 में भाजपा ने प्रदेश में सरकार बनाई थी। यहां भी कई विधायक उनके पास थे।

ये हैं मतदान के तुलनात्मक आंकड़े
- तिजारा में 2018 में 82 प्रतिशत मतदान हुआ है, जबकि 2013 में 84.10 प्रतिशत।
- किशनगढ़बास में पिछले चुनाव का 77.50 प्रतिशत मतदान रहा, जबकि 2013 में 78.86 प्रतिशत था।

- मुण्डावर में 73.78 प्रतिशत मतदान हुआ था जबकि 2013 में 79.23 प्रतिशत रहा।
- बहरोड़ में 74.70 प्रतिशत मतदान हुआ था, जबकि 2013 में 77.12 प्रतिशत।

- बानसूर में 75.83 प्रतिशत मतदान हुआ जबकि 2013 में 76.40 प्रतिशत।
- थानागाजी में 78.45 प्रतिशत मतदान हुआ है, जबकि 2013 में 80.22 प्रतिशत।

- अलवर ग्रामीण में 75.44 प्रतिशत मतदान हुआ है, जबकि 2013 में 76.97 प्रतिशत।
- अलवर शहर में 66.59 प्रतिशत मतदान हुआ था, जबकि 2013 में 69.47 प्रतिशत।

- राजगढ़-लक्ष्मणगढ़ में 70. 27 प्रतिशत मतदान हुआ, जबकि 2013 में 76.30 प्रतिशत रहा
- वर्ष 2018 में कठूमर में 70.23 प्रतिशत मतदान हुआ, जबकि 2013 में 74.72 प्रतिशत रहा।

- रामगढ़ में 78.93 फीसदी मतदान हुआ था जबकि वर्ष 2013 में 79.01 फीसदी मतदान हुआ।

विधानसभा चुनाव का प्रचार-प्रसार तेज हो गया है। प्रत्याशी घर-घर जा रहे हैं। वोट मांग रहे हैं। चौपाल आदि में भी बैठ रहे हैं लेकिन कई जगहों पर जनता प्रत्याशियों से पांच साल का हिसाब मांग रही है तो नेता बगलें झांकने लग रहे हैं। वह जवाब नहीं दे पा रहे हैं। हालांकि समस्या समाधान के लिए आश्वासन जरूर मिल रहे हैं।

मतदाता प्रत्याशी के सामने गिनाने लगे समस्याएं : प्रत्याशी चुनाव जीतने के लिए भरपूर प्रयास कर रहे हैं। लेकिन जिन विधानसभाओं में सड़क, पानी, चिकित्सा, शिक्षा, महंगाई, बेरोजगारी, कानून व्यवस्था, क्षेत्र में अवैध खनन, सिंचाई के लिए थ्री फेस बिजली और ग्रामीण क्षेत्रों में उद्योग विकास के साथ कई बड़े मुद्दे हैं। जनचौपाल में मतदाताओं की ओर से यह आवाज प्रमुख रूप से उठाई जा रही है। ताकि नेताजी चुनाव जीतने के बाद फिर से विधानसभा की समस्याओं को ध्यान में रख सकें।

वीडियो भी हो रहे वायरल : अलवर जिले की कई विधानसभाओं में नेताओं से जनता की ओर से आमने-सामने समस्यों के निराकरण के सवाल किए गए लेकिन नेताजी जनता के सवालों से बचते नजर आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर कई विधानसभाओं के प्रत्याशियों की ओर से की गई जनचौपालों के वीडियो वायरल हो रहे हैं। वीडियो में देखा जा रहा है कि सवालों की बौछार पहले होने लगी और नेताजी बिना स्वागत के ही लौट रहे हैं।

- रामगढ़ से कांग्रेस प्रत्याशी जुबेर खान के भाई यूआईटी में हैं अधीक्षण अभियंता, दो माह पहले ही यहां ट्रांसफर होकर आए

- जिला प्रशासन ने नोट जब्ती आदि के लिए बनाए गए फ्लाइंग स्क्वाइड में लगाई थी ड्यूटी, राज्य चुनाव आयोग के पास पहुंची थी शिकायत
जिला निर्वाचन विभाग की ओर से मेवात विकास बोर्ड अध्यक्ष एवं रामगढ़ से कांग्रेस प्रत्याशी जुबेर खान के भाई तैयब खान को चुनाव ड्यूटी से हटा दिया है। तैयब खान यूआईटी में अधीक्षण अभियंता के पद पर कार्यरत हैं। वह चुनाव में किसी प्रकार की दखलअंदाजी नहीं करेंगे। इसकी रिपोर्ट राज्य चुनाव आयोग को भेजी गई है। आगे की कार्रवाई आयोग के जरिए ही होगी। इन पर आरोप लगे थे कि ये चुनाव को प्रभावित कर सकते हैं।
ये लगे थे आरोप
यूआईटी में अधीक्षण अभियंता का पद खाली होते ही करीब दो माह पहले तैयब खान यहां ट्रांसफर होकर आए थे। उसके बाद आचार संहिता लगी और चुनाव के लिए ड्यूटी लगाई गई। नोट जब्ती आदि के लिए फ्लाइंग स्क्वाइड बनाए गए थे। उसमें एक दल का प्रभारी अधीक्षण अभियंता को बनाया गया था। हाल ही में राज्य चुनाव आयोग को किसी व्यक्ति ने शिकायत की कि ये चुनाव को प्रभावित कर सकते हैं। इनके भाई रामगढ़ से कांग्रेस के टिकट से चुनाव लड़ रहे हैं। वह प्रभाव भी रखते हैं। ऐसे में रामगढ़ क्षेत्र में नोट जब्ती आदि प्रभाव पड़ सकता है। चुनाव में भी वह लाभ पहुंचा सकते हैं।

चुनाव आयोग ने गंभीरता से ली शिकायत, जांच को भेजा यहां

आयोग ने शिकायत को गंभीरता से लिया और जिला निर्वाचन विभाग से इसकी रिपोर्ट मांगी। यहां अधिकारियों ने बिना देरी किए रिपोर्ट आयोग को भेज दी। साथ ही अधीक्षण अभियंता को फ्लाइंग स्क्वाइड की ड्यूटी से हटा भी दिया। आयोग से कहा है कि उनको किसी अन्य चुनाव ड्यूटी में नहीं लगाया जाएगा। आचार संहिता पालन अधिकारी अशोक कुमार योगी का कहना है कि आयोग को रिपोर्ट भेज दी गई है। वहां से जो आदेश आएंगे उसके मुताबिक आगे कार्रवाई होगी।

कुछ अधिकारी व कर्मचारी रडार पर

बताया जा रहा है कि चुनाव आयोग को कुछ और भी शिकायतें लोगों की ओर से सीधे भेजी गई हैं। उनमें एक-दो अधिकारी शामिल बताए जा रहे हैं। उन पर भी यही आरोप लग रहे हैं। वह सीधे चुनाव प्रक्रिया से नहीं जुड़े लेकिन काफी समय से जिले में ही तैनात हैं और अधिकारी अपना प्रभाव रखते हैं। एक अधिकारी पर तो पिछले चुनाव में गंभीर आरोप भी लगे थे, जिनके खिलाफ पत्र भी लिखा गया था। कुछ कर्मचारी भी हैं जो नेताओं को सपोर्ट करने के लिए लगे हैं। हालांकि अभी तक आयोग की ओर से ऐसी कार्रवाई के आदेश नहीं आए हैं।

त्योहारों के सीजन को देखते हुए रेलवे ने यात्रियों की सुविधा के लिए रेल सेवा संचालित की है। अलवर जिले से यात्रियों के लिए भी इस रेल सेवा का फायदा मिलेगा। यह समय त्योहारों का हैं और ऐसे में लोगो की आवाजाही काफी बड़ गयी है। हर किसी को अपने घर आने - जाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ रही है।

उतर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी कैप्टन शशि किरण के अनुसार उत्तर पश्चिम रेलवे ने ट्रेन नंबर-05097 टनकपुर-खातीपुरा (जयपुर) त्रि-साप्ताहिक स्पेशल रेल सेवा 20 नवम्बर से 1 दिसंबर तक (06 ट्रिप) टनकपुर से प्रत्येक सोमवार, बुधवार एवं शुक्रवार को 18:25 बजे रवाना होकर अगले दिन 10:20 बजे खातीपुरा पहुंचेगी। गाड़ी का समय अलवर जंक्शन पर 7:52 बजे आगमन और 7:56 बजे प्रस्थान का है।

इसी प्रकार ट्रेन नंबर 05098 खातीपुरा (जयपुर)-टनकपुर त्रि-साप्ताहिक स्पेशल रेल सेवा 21 नवम्बर से 2 दिसंबर तक (06 ट्रिप) खातीपुरा से प्रत्येक मंगलवार, गुरुवार व शनिवार को 18:30 बजे रवाना होकर अगले दिन 9.35 बजे टनकपुर पहुंचेगी। गाडी का समय अलवर जंक्शन पर 20:17 बजे आगमन और 20:22 बजे प्रस्थान का है।

जिले में किसानों के लिए सरकार की ओर से अनुदान का बीज मुहैया करवाया जाता है, लेकिन इस साल किसान बीज के लिए तरस रहे हैं। अलवर जिले में कृषि विभाग की गणना 2015 के अनुसार 4 लाख 37 हजार 219 हैं। इसमें से लघु किसानों की संख्या एक लाख 624 और सीमांत किसानों की संख्या दो लाख 67 हजार 708 हैं। कृषि विभाग की ओर से अब तक जिले में संचालित ग्राम सेवा सहकारी समिति और किसान उत्पादन संगठन पर अनुदान का बीज नहीं पहुंचाया गया है। इसमें कुछ केन्द्रों पर बीज की उपलब्धता है। वहीं किसानों की ओर से रबी फसल में सरसों की बुवाई लगभग पूरी की जा चुकी है और गेहूं की बुवाई जारी है। इसमें कई क्षेत्रों के किसानों ने गेहूं की 50 से 70 फीसदी तक बुवाई कर दी है, लेकिन उन तक अनुदान का बीज नहीं पहुंचा है। किसान पंचायत और केन्द्रों के चक्कर लगा रहे हैं।

इस प्रकार से दिया जाता है अनुदान का बीज : कृषि विभाग की ओर से किसानों के लिए अनुदान बीज देने के कुछ कायदे- नियम हैं। उसके अनुसार ही इसका वितरण किया जाता है। इसमें एक किसान के पास दो हेक्टेयर जमीन के अनुसार ही बीज दिया जाता है। ऐसे किसानों की संख्या लगभग एक लाख 624 है। इसमें कई केन्द्रों से किसानों ने अनुदान का बीज लिया है, लेकिन वो बहुत ही कम है। अब जिले में गेहूं की बुवाई 75 हजार 580 हेक्टेयर पर हो चुकी है तथा सरसों की बुवाई दो लाख 83 हजार 500 में की गई है।

कृषि विभाग के पास बीज का टोटा, सरसों के बीज में भी हुई देरी

कृषि विभाग के पास अनुदान का बीज पहुंचने में देरी हो रही है। संयुक्त निदेशक कृषि विभाग लीला राम जाट ने बताया राष्ट्रीय बीज निगम और राजस्थान बीज कॉपरेशन को बीज की डिमांड भेजी गई है। विभाग बीज के नमूने की जांच करके ही जिले के किसानों के लिए बीज भेजता है। इसमें कुछ देरी हो रही है। जैसे ही बीज जिले में पहुंचता है तो केन्द्रों को भेज दिया जाता है।

आजकल बच्चे अपने फोन से बहुत अधिक जुड़ रहे हैं और यह उनके दिमाग के साथ खिलवाड़ कर रहा है। यह न केवल उनके शारीरिक विकास को अवरुद्ध कर रहा है, बल्कि माता-पिता अपने बच्चों के रोने पर उन्हें तुरंत चुप कराने के लिए फोन का उपयोग कर रहे हैं। निश्चित रूप से, स्क्रीन पर बहुत अधिक समय बिताना उनकी मानसिक शक्ति के साथ गंभीर रूप से खिलवाड़ है। विशेषज्ञ यहां तक कह रहे हैं कि फोन और टीवी पर समय बिताने से स्वलीनता (ऑटिज्म) में वृद्धि हो रही है।

आभाषी स्वलीनता (ऑटिज्म) क्या होता है ?

स्वलीनता (ऑटिज्म) मस्तिष्क के विकास के दौरान होने वाला विकार है जो व्यक्ति के सामाजिक व्यवहार और संपर्क को प्रभावित करता है। हिन्दी में इसे 'आत्मविमोह' और 'स्वपरायणता' भी कहते हैं। इससे प्रभावित व्यक्ति, सीमित और दोहराव युक्त व्यवहार करता है जैसे एक ही काम को बार-बार दोहराना।

छोटे बच्चों में दिख रहे लक्षण: सामान्य अस्पताल के ओपीडी स्थित मनोरोग विभाग में प्रतिदिन करीब 50 मरीज आते हैं। हालांकि आभाषी स्वलीनता (ऑटिज़्म) के ज़्यादा मामले नहीं हैं, लेकिन 3 से 3.25 साल के बच्चों में कुछ लक्षण देखे जाते हैं। इससे उनकी बोलने की क्षमता में देरी होती है और उनका आईक्यू भी सामान्य बच्चों की तुलना में कम होता है। ये बच्चे दूसरों से बात करने और नज़रें मिलाने से बचते हैं, जिससे उनके लिए घुलना-मिलना मुश्किल हो जाता है। हालांकि आभाषी स्वलीनता का कोई इलाज नहीं है, लेकिन व्यक्तित्व विकास थेरेपी, स्पीच थेरेपी और विशेष शिक्षा थेरेपी इसे कुछ हद तक रोकने में मदद कर सकती हैं।

ये हो रहा नुकसान

बच्चों का शारीरिक विकास भी प्रभावित हो रहा है। फोन, लैपटॉप और अन्य गैजेट्स का बहुत अधिक उपयोग करने का मतलब है कि वे उतने सक्रिय नहीं हैं जितना उन्हें होना चाहिए। और यह उनके शारीरिक विकास के लिए अच्छा नहीं है। इसके अलावा, उन्हें चिड़चिड़े होने और स्कूल में अच्छा प्रदर्शन न करने की समस्या से भी जूझना पड़ सकता है।

बच्चों की मोबाईल की लत कैसे छुड़ाएं ?

बच्चे के फोन का लत को छुड़ाने के लिए आपको भी खुद पर थोड़ा कंट्रोल करना पड़ेगा। आपको यदि अपने बच्चे के फोन को सीमित करना है तो खुद के फोन चलाने का समय भी निर्धारित करना पड़ेगा। क्योंकि बच्चा जो देखता है वही सीखता है। बच्चे के फोन चलाने को कंट्रोल करने के लिए उसे केवल कुछ समय निर्धारित करके ही फोन दें।

विधानसभा चुनाव का मतदान महज एक सप्ताह दूर है। कांग्रेस और भाजपा दोनों ही जिले में अपना राजनीतिक वर्चस्व स्थापित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। पिछले चालीस वर्षों से इन चुनावों में किसी न किसी पार्टी का दबदबा रहा है। जिले में लोक दल, राष्ट्रीय जनता दल, जनता दल, बसपा और अन्य पार्टियों को भी अपनी छाप छोड़ते देखा है।

अलवर जिले में इस बार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और बीजेपी के बीच मुकाबला है। यही वजह है कि अलवर जिले की 11 सीटों पर कांग्रेस और बीजेपी आमने-सामने नजर आ रही हैं, कुछ सीटों पर इन दलों के बागी अन्य दलों का दामन थाम व निर्दलीय चुनाव मैदान में उतर मुकाबले को दिलचस्प बनाने में जुटे हैं। पिछले दो दशकों में अलवर जिले के राजनीतिक परिदृश्य में कुछ दिलचस्प बदलाव देखे गए हैं।

इस दौरान हुए चार विधानसभा चुनावों में बीजेपी और कांग्रेस ने बारी-बारी से अपना दबदबा जताया है। साल 2003 में, कांग्रेस 7 सीटों के साथ विजयी हुई, जबकि भाजपा को 3 सीटें मिलीं और एक निर्दलीय उम्मीदवार ने एक सीट जीती। इस चुनाव में अलवर जिले में कांग्रेस का स्पष्ट दबदबा दिखा। 2008 में, बीजेपी ने 7 सीटों के साथ पासा पलट दिया, जबकि कांग्रेस 3 सीटें हासिल करने में सफल रही और समाजवादी पार्टी को एक सीट मिली।

इस चुनाव में जिले में भाजपा का स्पष्ट प्रभुत्व रहा। 2013 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को 9 सीटें मिलीं, जबकि कांग्रेस और राजपा अलवर जिले में एक-एक सीट जीतने में कामयाब रहीं। इसका मतलब यह हुआ कि बीजेपी ने 11 में से 9 सीटें जीतकर अपना दबदबा कायम कर लिया है।

2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 5, बीजेपी ने 2, बीएसपी ने 2 और निर्दलीय ने 2 सीटों पर जीत हासिल की थी। हालांकि, बाद में बसपा के दो विधायक कांग्रेस में शामिल हो गए, जिसके परिणामस्वरूप जिले में कांग्रेस के 7 विधायक हो गए और दो निर्दलीय विधायकों ने भी कांग्रेस को अपना समर्थन दिया। 9 विधायकों के समर्थन से कांग्रेस अलवर जिले में अपना दबदबा कायम करने में सफल रही।

पेंशनरों के हित के लिए चलाई जा रही राजस्थान गवरमेंट हेल्थ योजना (आजीएचएस) की अलवर जिले में मॉनिटरिंग की व्यवस्था नहीं होेने से 22 हजार से ज्यादा पेंशनर्स का दवाओं का टोटा झेलना पड रहा है। वहीं सरकारी व निजी मेडिकल स्टोर पर सरकार का लाखों रुपए का बकाया होने के कारण उपभोक्ता भंडारों ने पेंशनर्स को दवा देना बंद कर दिया है।

पेशनर समाज की शाखाएं रामगढ, गोविंदगढ़, खेड़ली, थानागाजी, बहरोड, बानसूर, किशनगढ़बास, तिजारा, रैणी में हैं। अलवर जिले में करीब 20 हजार से ज्यादा पेंशनर्स है। इसमें पारिवारिक पेंशनर व सेवानिवृत्त पेंशनर दोनों ही शामिल है। पेंशनर्स के लिए राज्य सरकार ने आरजीएचएस योजना का लाभ दिया है। योजना के तहत आउटडोर में पेंशनर को एक साल में करीब 30 हजार रुपए की दवा खरीद का प्रावधान है। जबकि इनडोर में एक पेंशनर को प्रतिदिन करीब एक हजार व साल में साढ़े चार लाख रुपए की दवा खरीदने का छूट है।

लाखों का है बकाया, बना हुआ है आर्थिक संकट: उपभोक्ता भंडार संचालकों का कहना है कि ज्यादातर उपभोक्ता भंडार का करीब 15 से 20 लाख रुपए बकाया है। सरकार को कई बार पत्र लिखे जा चुके हैं लेकिन फिर भी भुगतान नहीं हो पा रहा है। आर्थिक संकट बना हुआ है। फार्मा कंपनियां भी पैसा मांग रही है।

अलवर शहर में पेंशनर - 9 हजार
अन्य उपशाखाओं में पेंशनर- 13 हजार
अलवर शहर में पेंशनर शाखा- 15
उपभोक्ता भंडार का बकाया- 80 लाख से अधिक

केस -1
मुुझे बीपी और शुगर की परेशानी हैं। लेकिन आरजीएचएस योजना में दवा नहीं मिल पा रही हैं। बाहर के मेडिकल स्टोर से दवा लेने पर महंगी मिली रही हैं। इस योजना का कोई फायदा नहीं मिल रहा है। सुरेश शर्मा, पेंशनर

केस -2

मुझे बीपी और शुगर के अलावा पत्नी की बीमारियों की भी दवा चाहिए होती है मेडिकल स्टोर ने आरजीएचएय योजना से दवा देना बंद कर दिया है। अच्छी कंपनी की दवा महंगी मिलती हैं। अब अपने पैंसों से ही खरीदनी पड़ रही हैं। रमेश कुमार, पेंशन

पेंशनरों को आरजीएचएस योजना के तहत मिलने वाली दवाएं मेडिकल स्टोर से नहीं मिल रही हैं। अलवर में कोई अधिकारी इस योजना के लिए नियुक्त नहीं है। जयपुर में आरजीएचएस योजना के प्रभारी से बात हुई हैं उन्होंने कहा हैँ कि सरकार ने बजट दे दिया हैं अब जल्द ही दवा मिलनी शुरू हो जाएगी।

मधुसुदन शर्मा, जिलाध्यक्ष, पेंशनर समाज, अलवर

पेशनर समाज की शाखाएं रामगढ, गोविंदगढ़, खेड़ली, थानागाजी, बहरोड, बानसूर, किशनगढ़बास, तिजारा, रैणी के पेंशनर भी परेशान हो रहे हैं। गांवों में भी दवाएं नहीं मिल पा रही है।

अलवर में हैं 20 हजार से अधिक पेंशनर

अलवर जिले में करीब 20 हजार से ज्यादा पेंशनर्स है। इसमें पारिवारिक पेंशनर व सेवानिवृत्त पेंशनर दोनों ही शामिल है। कि सेवानिवृत्त होने के बाद राज्य सरकार की आरजीएचएस योजना से जुड़ गए हैं। इतनी बड़ी संख्या में पेंशनर होने के बाद भी राज्य सरकार की ओर से कोई अधिकारी इस योजना की मॉनिटरिंग के लिए नहीं लगाया गया हैं। राज्य सरकार आउटडोर में एक पेंशनर को एक साल में करीब 30 हजार रुपए की दवा खरीदने की राहत देती है। जबकि इनडोर में एक पेंशनर को प्रतिदिन करीब एक हजार व साल में साढे चार लाख रुपए की दवा खरीदने की राहत देती है।

लाखों का है बकाया, बना हुआ है आर्थिक संकटइधर, उपभोक्ता भंडार संचालकों का कहना है कि ज्यादातर उपभोक्ता भंडार में करीब 15 से 20 लाख का बकाया है। सरकार को कई बार पत्र लिखे जा चुके हैं लेकिन फिर भी भुगतान नहीं हो पा रहा है। आर्थिक संकट बना हुआ है। फार्मा कंपनियां भी पैसा मांग रही है।

फैक्ट फाइल

अलवर शहर में पेंशनर - 9 हजार

अन्य उपशाखाओं में पेंशनर- 13 हजार

अलवर शहर में पेंशनर शाखा- 15

उपभोक्ता भंडार का बकाया- 80 लाख से अधिक

केस एक

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पेंशनरों को आरजीएचएस योजना के तहत मिलने वाली दवाएं मेडिकल स्टोर से नहीं मिल रही हैं। अलवर में कोई अधिकारी इस योजना के लिए नियुक्त नहीं है। जयपुर में आरजीएचएस योजना के प्रभारी से बात हुई हैं उन्होंने कहा हैँ कि सरकार ने बजट दे दिया हैं अब जल्द ही दवा मिलनी शुरू हो जाएगी।मधुसुदन शर्मा, जिलाध्यक्ष, पेंशनर समाज, अलवर।

Rajasthan Assembly Election 2023 : राजस्थान विधानसभा चुनाव में प्रमुख राजनीतिक दल कांग्रेस और भाजपा के साथ ही तीसरा मोर्चा के दल भी पूरा जोर लगा रहे हैं। राजस्थान में जीत का खाता खोलने के लिए आम आदमी पार्टी भी तैयार है। इस बार दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान 'आप' प्रत्याशी के समर्थन में चुनाव प्रचार के लिए 21 नवम्बर को थानागाजी आ सकते हैं। पार्टी में इसके लिए जोर-शोर से तैयारियां चल रही हैं।

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आम आदमी पार्टी की फिलहाल दिल्ली और पंजाब में सरकार है। आप ने इस बार राजस्थान में भी ताल ठोकी है। अलवर जिले की 11 में से 8 सीटों पर प्रत्याशी उतारे हैं। इसके अलावा राजस्थान में आप कई सीटों पर चुनाव लड़ रही है। मुख्यमंत्री केजरीवाल और मान दोनों के 21 नवम्बर को थानागाजी आने की संभावना है। वे पार्टी प्रत्याशी के समर्थन में थानागाजी में रोड शो करेंगे। वहीं, दिल्ली सरकार के एक मंत्री भी 20 नवम्बर को कोटकासिम में चुनाव प्रचार में आ रहे हैं। आम आदमी पार्टी प्रदेश उपाध्यक्ष नंदराम ओला ने इसकी तैयारियों की जानकारी दी है।

चंद्रशेखर टपूकड़ा आए, मायावती आज बानसूर में
आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर रावण तिजारा से असपा प्रत्याशी के प्रचार में शुक्रवार को टपूकड़ा में जनसभा को सम्बोधित किया। वहीं, बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष कुमारी मायावती शनिवार को बानसूर आएंगी। इसके अलावा रालोपा के हनुमान बेनीवाल भी चुनाव प्रचार में अलवर आ सकते हैं।

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कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे शनिवार को तिजारा आएंगे और जनसभा को संम्बोधित करेंगे। उनके साथ मुख्यमंत्री अशोक गहलोत व सचिन पायलट भी आएंगे। वहीं अबकी बार चुनाव में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के भी अलवर जिले में दौरे की संभावना बताई जा रही है। वहीं, केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के 20 नवम्बर को अलवर आने की संभावना है। शाह का अलवर शहर में रोड शो हो सकता है। वहीं, उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 20 नवम्बर को बड़ौदामेव आएंगे। इससे पहले योगी तिजारा आ चुके हैं।

बुजुर्ग माता-पिता को जिस वक्त सबसे अधिक सहारे की जरुरत पड़ती है। तभी उन्हें बेसहारा छोड़ दिया जाता है। जीवन के अंतिम पड़ाव पर पहुंचे, ऐसे बुजुर्गों की आंखें अपनों का इंतजार करते-करते थक जाती है, लेकिन उन्हें लेने कोई नहीं आता है। वहीं, अलवर के जिला अस्पताल में भी करीब 2 प्रतिशत मामले ऐसे आ रहे हैं। जिनमें परिजन बुजुर्गों को अस्पताल में भर्ती करने के बाद लेने नहीं आते। इन बुजुर्गों के स्वस्थ होने के बाद भी जब कोई लेने नहीं आता तो आखिर में बुजुर्ग खुद ही छुट्टी लेकर चले जाते हैं। जबकि कुछ बुजुर्गों को वृद्धाश्रम भेज दिया जाता है।


लावारिस बुुजुर्गों को वृद्धाश्रम में भेज रहे
जिला अस्पताल में 60 साल से अधिक आयु के बुजुर्गों की देखभाल के लिए अलग से वृद्धावस्था वार्ड बनाया हुआ है। इसमें हर 4-5 माह में 2-3 ऐसे बुजुर्ग आते हैं, जो या तो अनाथ होते हैं अथवा उनकी बीमारी के कारण परिजन उन्हें छोड़ देते हैं। ऐसी अवस्था में पुलिस अथवा स्वयंसेवी संस्था की ओर से उन्हें उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया जाता है। वहीं, स्वस्थ होने पर उन्हें वापस स्वयंसेवी संस्थाओं के जरिए वृद्धाश्रम में भिजवा दिया जाता है।


अभी 17 बुजुर्ग वार्ड में भर्ती
अस्पताल की ऊपरी मंजिल पर बुजुर्गों के लिए अलग से 17 बेड का वृद्धावस्था वार्ड बनाया हुआ है। फिलहाल इसके सभी बेड पर मरीज भर्ती हैं। इसमें से अधिकांश बुजुर्ग सांस व हार्ट संबंधी परेशानी और लकवा से पीडि़त हैं।

विधानसभा चुनाव में पांचवे दिन भी होम वोटिंग का क्रम चला। वोटिंग का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। अब तक 96.94 प्रतिशत मतदान हो चुका है। अभी ये क्रम चलता रहेगा। माना जा रहा है कि 99 फीसदी तक मतदान प्रतिशत पहुंचेगा जो दूसरे लोगों को जगाने का काम करेगा।
निर्वाचन विभाग की ओर से 1966 लोगों को होम वोटिंग के लिए चुना गया था। इसमें 1906 वोट पड़ चुके हैं। टीम घर-घर जाकर वोट बैलेट पेपर से वोट डलवा रही हैं। पहले दिन 738, दूसरे दिन 436, तीसरे दिन 345, चौथे दिन 253, पांचवे दिन 134 वरिष्ठ नागरिकों व दिव्यांगों ने वोट डाला। जिला निर्वाचन अधिकारी अविचल चतुर्वेदी ने बताया कि शनिवार को विधानसभा क्षेत्र किशनगढबास में 80 वर्ष से अधिक आयु केे 95 में से 20 वरिष्ठ नागरिक, 40 प्रतिशत से अधिक दिव्यांग श्रेणी के 64 में से 16 विशेष योग्यजनों ने होम वोटिंग की। मुण्डावर में 115 में से 15 वरिष्ठ नागरिक, 61 में से 11 विशेष योग्यजन, विधानसभा क्षेत्र थानागाजी में 178 में से 46 वरिष्ठ नागरिक, 103 में से 26 विशेष योग्यजनों ने होम वोटिंग में हिस्सा लिया।

- कांग्रेस के पार्षद इसलिए नाराज चल रहे, उनके मुताबिक मेयर की कुर्सी पर पार्टी का व्यक्ति नहीं बैठ पाया

- भाजपा के पास पूर्ण बहुमत होने के बाद भी सभापति कांग्रेस की बनी, ऐसे में पार्षद नहीं खोल पा रहे पत्ते


नगर निगम की अब तक चली आ रही राजनीति से विधानसभा चुनाव में गर्माहट बढ़ गई है। भाजपा ने जहां तीन निर्दलीय पार्षदों को पार्टी में शामिल कर शक्ति प्रदर्शन करने की कोशिश की। वहीं अब कांग्रेस भी अपनी ताकत का अहसास कराने की तैयारी में है। वह भी कुछ पार्षदों का जोड़-तोड़ कर सकती है लेकिन दोनों ही राजनीतिक दलों के नेता असमंजस में हैं। उन्हें पूर्ण भरोसा नहीं हो पा रहा है कि उनकी पार्टियों के पार्षद उनके साथ कितना प्रतिशत हैं। उसका बड़ा कारण अलग-अलग हैं। क्योंकि भाजपा का बहुमत होने के बाद भी कांग्रेस की सभापति निगम में बनीं। इसके बाद कांग्रेस की सरकार के चलते भाजपा के मेयर कुर्सी पर बने हुए हैं। उन्हें हटाने के लिए कांग्रेस के पार्षदों ने पूरी ताकत झोंकी और वह पार्टी के ही नेताओं के खिलाफ उतर आए थे। ऐसे में शहर सीट पर पार्षदों की भूमिका इस बार अलग रंग ला सकती है।
इस तरह समझें पार्षदों का बटवारा
नगर निगम के 65 पार्षद हैं। कांग्रेस के अपने 18 पार्षद हैं। भाजपा के पाले में 27 पार्षद हैं। बाकी करीब 20 पार्षद निर्दलीय हैं। इनमें से करीब 12 पार्षदों ने कांग्रेस को समर्थन दिया हुआ है। कुछ पार्षद अब तक निर्दलीय ही मैदान में हैं। अब चुनाव शुरू हुआ तो तीन पार्षद टूटकर भाजपा खेमे में जा मिले। अब जोड़-तोड़ को बराकर करने के लिए कांग्रेस जुटी है। बताया जा रहा है कि चार से पांच पार्षदों को कांग्रेस कभी भी सदस्यता ग्रहण करवा सकती है। अभी ये साफ नहीं हो पाया है कि ये पार्षद भाजपा के हैं या फिर निर्दलीय।

इनसेट--

कांग्रेस के पार्षद नहीं खोल रहे पत्ते
कांग्रेस के पार्षदों ने नगर निगम के मेयर को कुर्सी से हटाने के लिए दिन-रात एक कर दिया था लेकिन सफल नहीं हो पाए। पार्टी के नेताओं पर ही वह आरोप लगा रहे थे। इसको लेकर कई पार्षदों में नाराजगी है। बताया जा रहा है कि वह खुलकर अपने पत्ते सामने नहीं रख पा रहे हैं। चुनाव प्रचार में भी कई पार्षद नजर नहीं आ रहे हैं। उनकी नाराजगी से पार्टी को नुकसान हो सकता है। हालांकि पार्टी के नेताओं ने उन्हें मनाने की कोशिश की है। यही नहीं, पूर्व सभापति बीना गुप्ता की भी सदस्यता पार्टी ने बहाल की है ताकि पार्टी को फायदा मिल सके।

भाजपा को भी साथ न देने का अंदेशा

नगर निगम में भाजपा के पास सर्वाधिक 27 पार्षद थे लेकिन सभापति उनका नहीं बन पाया। पूरा बहुमत होने के बाद भी भाजपा को शिकस्त मिली। कांग्रेस की बीना गुप्ता सभापति बन गई थीं। भाजपा के मेयर घनश्याम गुर्जर को कोर्ट के जरिए ये सीट मिली। डीएलबी ने इसके आदेश किए। ऐसे में भाजपा के सभी पार्षद पार्टी के साथ होंगे, इसका अंदेशा नेताओं का नजर आ रहा है। यदि सभी पार्षदों ने पार्टी का साथ नहीं दिया तो परिणाम पर इसका असर पड़ता तय है।

- अलवर उत्तर में खुलकर विरोध किसी का सामने नहीं आया, नाराजगी कई नेताओं की बरकरार

- कुछ डमी कंडीडेट यहां वोटों को बांटने में निभाएंगे भूमिका, भाजपा व कांग्रेस दोनों की ही है चाल

भाजपा अलवर दक्षिण के जिलाध्यक्ष अशोक गुप्ता ने पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त मिलने पर जिला मंत्री प्रदीप जैन को पद से निष्कासित कर दिया है। वहीं मंडल अध्यक्ष गोपाल सिंह नरुका को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। वहीं दूसरी ओर उत्तर जिले में भीतरघातियों से निपटने की तैयारी पार्टी कर रही है। कई नेता नाराज हैं जो अंदरखाने नुकसान पहुंचा सकते हैं। यदि समय पर पार्टी ने भीतरघात का इलाज नहीं किया तो ये बीमारी बढ़ सकती है जो पार्टी के लिए नुकसानदेय मानी जा रही है।
अलवर उत्तर में किशनगढ़बास, बहरोड़, मुंडावर, बानसूर, तिजारा विधानसभाएं आती हैं। इन क्षेत्रों में पार्टी के प्रत्याशियों की घोषणा हुई तो लोगों ने नाराजगी जरूर जाहिर की लेकिन खुलकर बागवत सामने नहीं आई। पार्टी ने इन सीटों पर पुराने खिलाडि़यों को उतारा जो अनुभव से लेकर हर कार्य में आगे थे। ऐसा भी नहीं है कि यहां लोगों के बीच टिकटों को लेकर नाराजगी नहीं हो। वह दिख भी रही है। चुनाव प्रचार में कुछ नेता नहीं जा रहे हैं। दिखाई नहीं दे रहे हैं। ऐसे में भीतरघात की संभावनाएं प्रबल हैं। इससे निपटने के लिए तैयारियां की जा रही हैं। जिलाध्यक्ष उत्तर उम्मेद सिंह भाया का कहना है कि उनके यहां ऐसी िस्थतियां नहीं हैं। सभी नेता भाजपा प्रत्याशियों के साथ हैं। नाराज नेता मान गए हैं। बागियों पर खुद प्रांतीय नेतृत्व नजर बनाए हुए है।

जिला अस्पताल में हर 4-5 माह में 2-3 बुजुर्ग मरीजों को छोड़कर जा रहे परिजन

बुजुर्ग माता-पिता को जिस वक्त सबसे अधिक सहारे की जरुरत पड़ती है। तभी उन्हें बेसहारा छोड़ दिया जाता है। जीवन के अंतिम पड़ाव पर पहुंचे, ऐसे बुजुर्गों की आंखे अपनों का इंतजार करते-करते थक जाती है, लेकिन उन्हें लेने कोई नहीं आता है। वहीं, अलवर के जिला अस्पताल में भी करीब 2 प्रतिशत मामले ऐसे आ रहे हैं। जिनमें परिजन बुजुर्गों को अस्पताल में भर्ती करने के बाद लेने नहीं आते। इन बुजुर्गों के स्वस्थ होने के बाद भी जब कोई लेने नहीं आता तो आखिर में बुजुर्ग खुद ही छुट्टी लेकर चले जाते हैं। जबकि कुछ बुजुर्गों को वृद्धाश्रम भेज दिया जाता है।

लावारिश बुजुर्गों को वृद्धाश्रम में भेज रहे

जिला अस्पताल में 60 साल से अधिक आयु के बुजुर्गों की देखभाल के लिए अलग से वृद्धावस्था वार्ड बनाया हुआ है। इसमें हर 4-5 माह में 2-3 ऐसे बुजुर्ग आते हैं, जो या तो अनाथ होते हैं अथवा उनकी बीमारी के कारण परिजन उन्हें छोड़ देते हैं। ऐसी अवस्था में पुलिस अथवा स्वयंसेवी संस्था की ओर से उन्हें उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया जाता है। वहीं, स्वस्थ होने पर उन्हें वापस स्वयंसेवी संस्थाओं के जरिए वृद्धाश्रम में भिजवा दिया जाता है।

अभी 17 बुजुर्ग वार्ड में भर्ती

अस्पताल की ऊपरी मंजिल पर बुजुर्गों के लिए अलग से 17 बेड का वृद्धावस्था वार्ड बनाया हुआ है। फिलहाल इसके सभी बेड पर मरीज भर्ती हैं। इसमें से अधिकांश बुजुर्ग सांस व हार्ट संबंधी परेशानी और लकवा से पीडि़त हैं।

मरीजों की उचित देखभाल कर रहे

अस्पताल के वृद्धावस्था वार्ड में भर्ती सभी मरीजों की उचित देखभाल की जा रही है। इस वार्ड में भर्ती मरीजों में 98 प्रतिशत मरीजों के परिजन साथ में होते हैं। जबकि 2 प्रतिशत मरीज ऐसे होते हैं, जिनके साथ उनके परिजन नहीं होते हैं। ऐसे मरीजों के स्वस्थ होने पर उन्हें स्वयंसेवी संस्थाओं के माध्यम से वृद्धाश्रम में भर्ती करा दिया जाता है।

डॉ. अशोक महावर, सीनियर फिजिशियन, सामान्य अस्पताल।

अलवर की प्याज की देश-विदेश में बढ़ती मांग को देखते हुए 15 ट्रेन बुक कराई गई हैं। आगामी दिनों में बाजार में मांग बढऩे पर अलवर से आसाम के सिलीगुड़ी व गोवाहाटी में ट्रेन से माल भेजा जाएगा। फिलहाल अलवर मंडी में करीब 60 से 70 हजार कट्टे प्याज की आवक हो रही है। जबकि गत वर्ष इन दिनों करीब 20 से 25 हजार कट्टे प्याज की आवक हुई थी। वहीं, इस बार प्याज के भाव भी अच्छे मिल रहे हैं।


अब तक 2 से ढाई लाख कट्टे प्याज की आवक

अलवर मंडी में इस बार 1 नवंबर के आसपास प्याज की आवक शुरू हुई थी। वहीं, अब तक करीब 2 से ढाई लाख कट्टे की आवक हो चुकी है। जानकारी के अनुसार मंडी में प्याज की प्रतिदिन की आवक में से करीब 200 से 250 कट्टे की जिले में खपत होती है। बाकी सारा माल जिले से बाहर भेज दिया जाता है। वहीं, आगामी दिनों में आवक बढऩे के साथ ही और अधिक मात्रा में प्याज बाहर भेजा जाएगा।


पिछली बार से भाव भी दोगुने मिल रहे

गत वर्ष बारिश के कारण फसल खराब होने के कारण प्याज के थोक भाव 8 से 15 रुपए प्रति किलो रहे। जो रिटेल में 15 से 25 रुपए प्रति किलो के हिसाब से बिके। जबकि इस बार प्याज के थोक भाव 30 से 42 रुपए और रिटेल भाव 60 रुपए प्रतिकिलो हैं।

आगामी दिनों में मांग बढऩे की उम्मीद
अलवर की प्याज अभी प्रदेश के विभिन्न जिलों सहित दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, आसाम, बंगाल व बिहार सहित बांग्लादेश जा रही है। वहीं, बताया जा रहा है कि नासिक व मध्यप्रदेश की मंडियों में अभी पुराने माल का स्टॉक निकाला जा रहा है। इसके खत्म होने पर अलवर के प्याज की मांग और भी बढ़ेगी। इसके बाद ट्रेन से अलवर की प्याज को बाहर भेजा जाएगा।

अलवर के प्याज को बाहर भेजने के लिए 15 ट्रेन बुक कराई जा चुकी हैं। आगामी दिनों में मांग बढऩे पर अलवर से आसाम के लिए प्याज की ट्रेन रवाना की जाएगी।
- प्रताप ङ्क्षसह, मंडी व्यापारी।

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