>>: फिर बिना शिक्षकों के हो जाएंगे प्रदेश के 310 सरकारी कॉलेज

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पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में थोक के भाव खोले गए सरकारी महाविद्यालयों पर ताले लगने की नौबत आ सकती है। प्रदेश में पिछले चार साल में खोले गए 310 महाविद्यालयों का संचालन राजस्थान कॉलेज एजुकेशन सोसायटी राजसेस के अंतर्गत हो रहा है और इनमें पढ़ाने के लिए विद्या सम्बल योजना के तहत शिक्षकों सहायक आचार्य को लिया गया है, जिनका कार्यकाल 28 फरवरी को पूरा हो रहा है। राजसेस के कई महाविद्यालय तो ऐसे हैं, जिनमें स्थाई रूप से प्राचार्य भी नहीं है, चपरासी व लिपिक तो दूर की बात है। यानी कई महाविद्यलय ऐसे हैं, जिनके ताले खोलने का काम भी विद्या सम्बल में लगे शिक्षक कर रहे हैं, जबकि उन्हें केवल पीरियड के आधार पर मानदेय दिया जा रहा है। ऐसे में पिछली सरकार के समय खोले महाविद्यालयों में आधारभूत ढांचे को विकसित करने की जरूरत है।

फेक्ट फाइल
प्रदेश में राजसेस के कुल महाविद्यालय - 310
राजसेस के महाविद्यालयों में सहायक आचार्य कुल स्वीकृत पद - 4200
कुल रिक्त पद - 4200
विद्या सम्बल योजना से नियुक्त - 1000 लगभग

क्या है विद्या सम्बल योजना
राजसेस सोसायटी के महाविद्यालयों में बजट सत्र 2021-22 में शैक्षणिक व्यवस्था के लिए राज्य सरकार ने 'विद्या संबल योजना' के माध्यम से उच्च शिक्षित अनुभवी योग्यताधारी नेट, सेट, पीएचडी, 10 वर्षों का शैक्षणिक अनुभव, विषय विशेषज्ञों को लगाया गया। इनको कालांश के आधार पर भुगतान होता है।

नई शिक्षा नीति की उड़ रही धज्जियां
राज्य सरकार ने सत्र 2023-24 से प्रदेश के सभी विश्वविद्यालय और सभी राजकीय व निजी महाविद्यालयों में समान पाठ्यक्रम से भारत सरकार की नई शिक्षा नीति-2020 को लागू कर दिया है। सेमेस्टर स्कीम के तहत न्यूनतम 90 दिन कालांश अनिवार्य होते हैं। बिना स्टाफ के ज्यादातर कॉलेज में केवल औपचारिकताएं ही पूरी हो रही हैं। 28 फरवरी के बाद प्रदेश के राजकीय महाविद्यालय में विद्या सम्बल योजना से लगे एक हजार सहायक आचार्य हटा दिए जाएंगे, जिसको लेकर शिक्षक-विद्यार्थी दोनों तनाव में हैं। फरवरी माह में यूजी व पीजी सेमेस्टर एग्जाम होने हैं। परीक्षा के दौरान विद्यार्थियों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।

भर्ती करने में लगेगा समय
आरपीएससी की ओर से करीब 1900 पदों पर सहायक आचार्य की भर्ती की जा रही है। इसकी परीक्षाएं नए साल से शुरू होंगी। ऐसे में भर्ती पूरी होने में समय लगेगा। नोडल कॉलेजों में भी शिक्षक नहीं है। इसके कारण सेमेस्टर के तहत पढ़ाई नहीं हो रही है। छात्रों का भविष्य खराब हो रहा है।

ताला खोलने वाला भी नहीं रहेगा
राजसेस की कॉलेजों में विद्या सम्बल योजना के तहत प्रदेशभर में करीब एक हजार से अधिक सहायक आचार्य लगे हैं, जिनका 28 फरवरी, 2024 को कार्यकाल पूरा हो जाएगा। इन कॉलेजों की वर्तमान हालत यह है कि इनमें प्राचार्य भी स्थाई नहीं है। न ही चपरासी है और न ही लिपिक। ऐसे में जब विद्या सम्बल के शिक्षकों को हटाया जाएगा तो पीछे ताला खोलने वाला भी नहीं रहेगा। भाजपा सरकार के लिए यह चुनौती है।
- योगेन्द्र सिंह, महामंत्री, कॉलेज एजुकेशन टीचर एसोसिएशन, विद्या सम्बल योजना

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