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मंत्री को निरीक्षण में फर्जी मिले बच्चे: छात्रावास अधीक्षक निलम्बित
टोंक जिले के राजकीय छात्रावासों के हाल ठीक नहीं है। इसकी बानगी सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग मंत्री अविनाश गहलोत को देखने को मिल गई है।

प्रशासन जिला मुख्यालय समेत सभी छात्रावास का निरीक्षण करे तो उन्हें कई कमियां मिल जाएगी। वहीं नियमित निरीक्षण भी होना चाहिए।


सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग मंत्री अविनाश गहलोत को छात्रावास में बड़ी गड़बड मिली है। दरअसल उन्होंने शुक्रवार देर शाम राजकीय अंबेडकर छात्रावास निवाई प्रथम का औचक निरीक्षण किया। इसमें 4 बच्चे तो उन्हें फर्जी ही मिले। मंत्री को छात्रावास अधीक्षक राजेंद्र चौधरी ने रजिस्टर में 39 बच्चों का रजिस्ट्रेशन दिखाया।

निरीक्षण के दौरान छात्रावास में 39 में से 13 बच्चे ही मिले। इन 13 में सभी 4 बच्चे फर्जी पाए गए। जो छात्रावास के नहीं थे। ऐसे में गहलोत ने नाराज हो गए और उन्होंने मौके पर से ही सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग जयपुर के निदेशक को छात्रावास अधीक्षक के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए।

बगले झांकता रहा


मंत्री ने बच्चों के बारे में पूछा तो अधीक्षक कोई जवाब नहीं दे पाया। बल्कि वह बगले झांकता रहा। छात्रावास सम्बन्धित कई अन्य सवाल भी किए। लेकिन वह बेबसी दिखाता रहा। ऐसे में मंत्री नाराज हो गए।


संयुक्त शासन सचिव ने रात को जारी किए आदेश


मंत्री का ओर से की गई वार्ता के बाद सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के निदेशक एवं संयुक्त शासन सचिव जगदीशसिंह मोंगा ने शुक्रवार रात आदेश जारी कर राजकीय अंबेडकर छात्रावास निवाई प्रथम के अधीक्षक राजेन्द्र चौधरी को निलम्बित कर दिया।

उसका मुख्यालय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग निदेशालय जयपुर किया गया है। आदेश में अधीक्षक को राजकार्य में लापरवाही, उदासीनता तथा छात्रावास में अव्यवस्थाएं पाए जाने का दोषी माना है।

मंत्री ने कहा मेरी कार से ले आओ बच्चे


इससे पहले मंत्री अविनाश गहलोत दूनी स्थित राजकीय अंबेडकर छात्रावास पहुंचे। जहां उन्हें बच्चे नहीं मिले। जानकारी पर पता चला कि बच्चे किसी अन्य बच्चे का जन्म दिन मनाने गए हैं।

उन्होंने छात्रावास अधीक्षक को निर्देश दिए कि जो भी बच्चे आसपास में कहीं गए हुए हैं, उनको मेरी गाड़ी ले जाकर लेकर आओ। इसके बाद 17 बच्चों को छात्रावास में लाया गया।


छात्रावास की खुल सकती है पोल

ऐसे हाल ज्यादातर राजकीय छात्रावास के हैं। जहां कई बार मनमर्जी से भोजन और अन्य अव्यवस्थाओं की शिकायत आती रहती है। प्रशासन की ओर से ऐसे निरीक्षण समय-समय पर किए जाएं तो उन्हें कई जानकारियां मिल सकती है। इसमें कई छात्रावास की तो पोल भी खुल सकती है।

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