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सड़क हादसों का दर्द, उजड़ी आठ परिवारों की खुशियां, 37 लोगों की मौत Tuesday 23 May 2023 06:22 AM UTC+00 Road accident In Rajasthan: हरिद्वार में परिजन की अस्थियां विसर्जित कर कोटखावदा लौटे एक परिवार के चार जनों की सड़क हादसे में हुई मौतों ने जिले के सात परिवारों के जहन में अपनों की याद ताजा कर दी है। जयपुर जिले में पिछले एक साल में कोटखावदा सहित हुए 6 सडक़ हादसों में 8 परिवार उजड़ गए हैं और 37 जने काल का ग्रास बन गए। खास बात यह है कि हादसों में शिकार हुए दो परिवार तो परिजनों की अस्थियां विसर्जन कर लौट रहे थे। कुछ परिवार धार्मिक स्थलों पर गए तो कुछ परिवार सहित घूमने-फिरने। इनमें सामोद, गोविंदगढ़, फागी और कोटखावदा के परिवार शामिल हैं। इन परिवारों में अब बचा है तो सिर्फ दर्द, दिलासा और अपनों को खोने का गम। रविवार को कोटखावदा में हुए सड़क हादसे के बाद अपनों को खोने का दंश झेल रहे कई लोगों की खबर समाचार पत्र पढ़ने के बाद रुलाई फूट पड़ी। जानकारी के अनुसार एक साल में जयपुर ग्रामीण इलाके के कई भरे पूरे परिवार सडक़ हादसों में उजड़ गए हैं। अलग-अलग स्थानों पर हुए 6 हादसों में 8 परिवारों की 37 जिंदगियां चल बसी हैं। कोटखावदा में हुए सडक़ हादसे की खबर मिलते ही इन परिवार को धक्का सा लगा है। सामोद में इसी साल तीन परिवारों का भरा-पूरा परिवार उजड़ गया था। वहीं एक साल पहले सामोद में ही अपने पिता की अस्थियों को हरिद्वार में विसर्जित करने गया परिवार भी सडक़ हादसे से काल का ग्रास बन गया था। सुबह जब तीनों परिवारों के बचे लोगों ने कोटखावदा में हुए हादसे की खबर सुनी एवं पढी तो अपनों को खोने की याद में आंख सिसक उठी। अपनों को याद कर सुबक उठे। अस्पताल में कर रहे नौकरी 17 मई 2022 को परिजन की अस्थियां हरिद्वार में विसर्जित कर लौटने के दौरान हरियाणा के रेवाडी में हुए सडक़ हादसे में जीप ट्रक की भिडंत में सामोद के ही रैगर मोहल्ला निवासी बीना देवी का भरा-पूरा परिवार उजड़ गया था। हादसे में अपने पति सहित अन्य को खो चुकी बीना देवी के अब कोई सहारा नहीं बचा है। बीना ने बताया कि उसके दो छोटे बच्चे हैं। हादसे में पति सहित पांच जनों को खोने के बाद अब परिवार की सारी जिम्मेदारी उसी पर है। वह चौमूं शहर के एक निजी अस्पताल में काम कर परिवार का गुजारा कर रही है।
परिजन की हरिद्वार में अस्थियां विसर्जित कर आए थे जियारत करने अजमेर दरगाह में जा रहे थे
परिवार के साथ गए थे घूमने परीक्षा दिलाने ले जा रहे थे हादसे में बची पोती के दादा-दादी ही सहारा |
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