>>: सड़क हादसों का दर्द, उजड़ी आठ परिवारों की खुशियां, 37 लोगों की मौत

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Road accident In Rajasthan: हरिद्वार में परिजन की अस्थियां विसर्जित कर कोटखावदा लौटे एक परिवार के चार जनों की सड़क हादसे में हुई मौतों ने जिले के सात परिवारों के जहन में अपनों की याद ताजा कर दी है। जयपुर जिले में पिछले एक साल में कोटखावदा सहित हुए 6 सडक़ हादसों में 8 परिवार उजड़ गए हैं और 37 जने काल का ग्रास बन गए। खास बात यह है कि हादसों में शिकार हुए दो परिवार तो परिजनों की अस्थियां विसर्जन कर लौट रहे थे। कुछ परिवार धार्मिक स्थलों पर गए तो कुछ परिवार सहित घूमने-फिरने।

इनमें सामोद, गोविंदगढ़, फागी और कोटखावदा के परिवार शामिल हैं। इन परिवारों में अब बचा है तो सिर्फ दर्द, दिलासा और अपनों को खोने का गम। रविवार को कोटखावदा में हुए सड़क हादसे के बाद अपनों को खोने का दंश झेल रहे कई लोगों की खबर समाचार पत्र पढ़ने के बाद रुलाई फूट पड़ी। जानकारी के अनुसार एक साल में जयपुर ग्रामीण इलाके के कई भरे पूरे परिवार सडक़ हादसों में उजड़ गए हैं। अलग-अलग स्थानों पर हुए 6 हादसों में 8 परिवारों की 37 जिंदगियां चल बसी हैं। कोटखावदा में हुए सडक़ हादसे की खबर मिलते ही इन परिवार को धक्का सा लगा है। सामोद में इसी साल तीन परिवारों का भरा-पूरा परिवार उजड़ गया था। वहीं एक साल पहले सामोद में ही अपने पिता की अस्थियों को हरिद्वार में विसर्जित करने गया परिवार भी सडक़ हादसे से काल का ग्रास बन गया था। सुबह जब तीनों परिवारों के बचे लोगों ने कोटखावदा में हुए हादसे की खबर सुनी एवं पढी तो अपनों को खोने की याद में आंख सिसक उठी। अपनों को याद कर सुबक उठे।

अस्पताल में कर रहे नौकरी

17 मई 2022 को परिजन की अस्थियां हरिद्वार में विसर्जित कर लौटने के दौरान हरियाणा के रेवाडी में हुए सडक़ हादसे में जीप ट्रक की भिडंत में सामोद के ही रैगर मोहल्ला निवासी बीना देवी का भरा-पूरा परिवार उजड़ गया था। हादसे में अपने पति सहित अन्य को खो चुकी बीना देवी के अब कोई सहारा नहीं बचा है। बीना ने बताया कि उसके दो छोटे बच्चे हैं। हादसे में पति सहित पांच जनों को खोने के बाद अब परिवार की सारी जिम्मेदारी उसी पर है। वह चौमूं शहर के एक निजी अस्पताल में काम कर परिवार का गुजारा कर रही है।


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परिजन की हरिद्वार में अस्थियां विसर्जित कर आए थे
21 मई को कोटखावदा कस्बे में अनियंत्रित जीप ने सडक़ किनारे बैठे एक ही परिवार के छह जनों के टक्कर मार दी थी। जिसमें 5 जनों की मौत हो गई। ये परिवार के लोग अपने परिजन की हरिद्वार में अस्थियां विसर्जित कर आए थे।

जियारत करने अजमेर दरगाह में जा रहे थे
4 मई को दूदू थाना क्षेत्र के रामनगर के पास हुए सडक़ हादसे में भी एक ही परिवार के 8 लोग काल का ग्रास में समा गए थे। हादसे के शिकार फागी निवासी अजमेर दरगाह में जा कर वापस लौट रहे थे। अनियंत्रित टैंकर सामने से आ रही कार पर ही पलट गया था।


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परिवार के साथ गए थे घूमने
18 अप्रेल 2022 को पंजाब के रुपनगर के भांखड़ा नहर में कार डूबने पर नांगल की मूंगा वाली ढाणी निवासी घासीराम व संतरा देवी ने अपने परिवार के सात जनों को खोया है। इसमें बेटा, बहू, पोती, बेटी, जवाई, नवासा व नवासी शामिल थी।

परीक्षा दिलाने ले जा रहे थे
1 मई 2022 खाटूश्यामजी के पास हादसे में नांगल भरड़ा़ निवासी अशोक व पतासी परीक्षा देने जा रहे दो बेटे और एक बहू को खो दिया था। ट्रक अनियंत्रित होकर उनकी बाइक पर पलट गया था। इससे परिवार के तीनों की ही घटनास्थल पर मौत हो गई थी।

हादसे में बची पोती के दादा-दादी ही सहारा
1 जनवरी को पलसाना के पास सडक़ हादसे में पिकअप, बाइक व ट्रक की भिडंत में सामोद कस्बे के खटीक मोहल्ला निवासी दो सगे भाई कैलाश व सुवालाल ने अपने 9 जनों को हादसे में खोया है। वहीं पड़ोसी प्रदीप पिंगोलिया ने भी इसी हादसे में अपने इकलौते बेटे को खोया है। अपनों को खोने से पीड़ित कैलाश और सुवालाल बुढा़पे में मजदूरी कर परिवार चला रहे हैं। कैलाश ने बताया कि बुढापे का सहारा एक पोती है। जो माता-पिता को खोने से अंजान दिनभर दादी के साथ रहती है। शाम को उसके लौटने पर वह उसके पास आ जाती है। कैलाश ने हादसे में दो बेटे, एक बेटी, एक बहू को खोया है। इधर, सुवालाल भी हादसे में दो बहू, एक बेटा, एक पोता और पोती को खोया था। एक बेटे का अभी भी उपचार चल रहा है। इससे परिवार के गुजारे की जिम्मेदारी उसी के कंधे पर है। वह भी दिन दहाड़ी मजदूरी कर रहा है।

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