>>: राजस्थान में सामने आया एक और घोटाला, इस सरकारी भर्ती में 'धांधली' जानकार हर कोई हैरान

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अलवर. जिला परिषद में एक और कनिष्ठ तकनीकी सहायक भर्ती (जेटीए) घोटाला सामने आया है। इस भर्ती में उन लोगों को नौकरी दी गई है जिनको नौकरी से पांच माह पहले ही ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री रमेश मीणा ने दोषी माना था। रकम वसूली के भी आदेश दिए थे। इन आदेशों की परिषद के अफसरों ने धज्जियां उड़ाते हुए पूरा खेल किया। हैरत की बात ये है कि मनरेगा के तहत हुई जेटीए की इन भर्तियों के आरोपियों की जानकारी डीएम को भी नहीं दी गई और जिला कार्यक्रम समन्वयक के नाम पर उनसे हस्ताक्षर भी करवा लिए। घोटालेबाजों पर कार्रवाई होनी चाहिए। यह प्रकरण भी अब एसओजी जयपुर कार्यालय भेजा गया है।

इस तरह हुई थी जेटीए की भर्ती
इसके बाद सरकार ने संविदा के नए नियम बना दिए। संविदा पर लगने वाले जेटीए को सरकारी कर्मचारियों की भांति ही लाभ दिया जाने लगा। इसके लिए करीब 96 भर्तियां निकाली गईं। आवेदन आए और फिर नियुक्ति के आदेश जारी किए गए। 19 अप्रेल 2023 को इन लोगों को नौकरी दे दी गई। हैरत की बात ये है कि चार से पांच जेटीए ऐसे हैं जिन्होंने पहले जहां गड़बड़ियां की थीं उन्हें वहीं पर पोस्टिंग दे दी। जानकारों का कहना है कि 96 लोगों की तैनाती लिस्ट में करीब 30 फीसदी से ज्यादा ऐसे लोग शामिल बताए जा रहे हैं जो किसी न किसी बड़े खेल के जरिए भर्ती किए गए हैं। अफसरों को इसकी पूरी खबर थी लेकिन उन्हें फिट करने के लिए रास्ते निकाले गए।

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इस तरह दिए थे वसूली के निर्देश
मनरेगा के तहत पंचायत समितियों में संविदा पर जेटीए लगाए गए थे। पिछले साल नवंबर में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री रमेश मीणा का यहां दौरा हुआ। इससे कुछ समय पहले राज्य स्तरीय टीम कामों की जांच को पहुंची और टीम ने तमाम गड़बड़ियां पेश कीं। मंत्री की बैठक में यह रिपोर्ट रखी गई तो कार्रवाई के कड़े निर्देश दिए गए। किसी से वसूली करनी थी तो किसी को निलंबित करना था लेकिन अधिकांश आरोपी जेटीए को पूरा संरक्षण दिया गया।

 

केस-1
पंचायत समिति थानागाजी की ग्राम पंचायत समरा में मनरेगा के तहत 3 एनीकट सामुदायिक भूमि पर नहीं बनाकर निजी कृषि भूमि पर बनाए गए जो नियमों का उल्लंघन था। एक किमी की दूरी पर तीन एनीकट निर्माण का कोई औचित्य नहीं था। इसमें सरपंच, वीडीओ, कनिष्ठ तकनीकी सहायक से 30.32 लाख रुपए की समान रूप से वसूली के निर्देश दिए गए थे। सीसी सड़क गुणवत्ताविहीन मिलने पर इन लोगों से 16.55 लाख रुपए की वसूली के निर्देश दिए गए। करीब 50 लाख रुपए की इन पर वसूली निकाली गई थी। इस मामले में कनिष्ठ सहायक को भी दोषी माना लेकिन उन्हें नए नियम में नौकरी दे दी गई।


केस-2
पंचायत समिति बानसूर की तुराणा ग्राम पंचायत में पंचायत भवन निर्माण कार्य की स्वीकृति राशि 45.46 लाख थी। यहां माप पुस्तिका की जांच की गई तो पाया कि करीब 30 लाख रुपए का भुगतान कनिष्ठ तकनीकी सहायक के हस्ताक्षर से हुआ है। इस पुस्तिका पर सहायक अभियंता आदि के हस्ताक्षर नहीं मिले। यहां तैनात जेटीए को भी दोबारा नौकरी दी गई।

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केस-3
पंचायत समिति रामगढ़ की ग्राम पंचायत नौगांवा में नाली व सीसी इंटर लॉकिंग निर्माण कार्य हुआ, जिसमें सड़क की लंबाई करीब 10 फीट कम मिली। साथ ही चौड़ाई 7.5 फीट कम पाई गई। इस पर वसूली के निर्देश दिए गए। इसी तरह मनरेगा के निर्माण कार्य पर कनिष्ठ तकनीकी सहायक की ओर से छह पखवाड़े की एमआर पर हस्ताक्षर नहीं करना पाया गया जिससे प्रतीत होता है कि तकनीकी सहायक ने इस अवधि में कार्यों का निरीक्षण नहीं किया।

केस-4
पंचायत समिति किशनगढ़बास की ग्राम पंचायत लंगड़बास में सड़क से लेकर नाली निर्माण आदि के कामों में गड़बड़ियां मिली थीं। किसी सड़क की मोटाई कम मिली तो किसी की लंबाई कम। इन सभी में कनिष्ठ तकनीकी सहायक पर ठोस कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे लेकिन इन्हें भी नौकरी से नवाजा गया। हालांकि सभी आरोपी जेटीए को नौकरी देने का आधार अफसरों ने क्या बनाया, यह सामने नहीं आया।

 

प्रकरण की जांच कराएंगे
यह प्रकरण मेरे संज्ञान में नहीं है। यदि जेटीए की भर्ती की गई है तो उसमें नियमों का पालन जरूरी है। मैं इस प्रकरण की जांच कराऊंगा।
कनिष्क कटारिया, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद

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