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राजस्थान में कानून व्यवस्था को लेकर पुलिस महानिदेशक (जेल) के निर्देशन में शनिवार आधी रात को मुख्यालय की स्पेशल टीम की ओर से उप कारागार का निरीक्षण कर सघन तलाशी अभियान चलाया गया। रात 12 बजे से 2 बजे तक करीब दो घंटे चले तलाशी अभियान के दौरान टीम ने तीन मोबाइल फोन, एक सिम, मोबाइल बैटरी व कुछ अन्य उपकरण बरामद किए हैं। जिन्हें दीवार में सुराग (छेद) कर छिपाया हुआ था। टीम की ओर से कार्रवाई के बाद जेल प्रभारी ने सदर थाना पुलिस में अज्ञात हवालातियों और कैदियों के खिलाफ केस दर्ज कराया है। सर्च अभियान में प्रदेश मुख्यालय की टीम के साथ जेल प्रभारी रविन्द्र उपाध्याय सहित ड्यूटी पुलिसकर्मियों ने भाग लिया।

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जेल अद्यीक्षक मुख्यालय कारावास जयपुर महेश चन्द बैरवा के नेतृत्व में 5 सदस्यीय टीम द्वारा सर्च अभियान चलाया गया। सर्च अभियान के दौरान जेल की बैरकों की गहनता से जांच के साथ टीम ने सभी बंदियों, बैरक, बिस्तर, लंगर, शौचालय आदि की तलाशी ली। इस दौरान जेल की दीवारों बने छेदों से टीम ने तीन मोबाइल फोन, एक सिम, मोबाइल बैटरी व कुछ अन्य उपकरण बरामद किए। जिन्हें दीवार में सुराग (छेद) कर छिपाया हुआ था। उससे पहले टीम ने जेल के अंदर बैरकों, शौचालयों, जेल के बाहर तथा अन्य जगहों की गहनता से तलाशी लेकर जांच की। इसके अलावा जेल में हवालातियों व कैदियों की और उनके सामान की तलाशी ली। इस अभियान के तहत टीम ने जेल का चप्पा-चप्पा खंगाला। टीम की ओर से तलाशी अभियान के दौरान जेल में मोबाइल मिलने के बाद सवाल उठ रहे हैं कि मोबाइल जेल में कैसे पहुंचे।

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सेवर जेल में भी मिल चुका है मोबाइल
जिला प्रशासन ने मार्च माह में जिला कारागृह का निरीक्षण किया था। इस दौरान एक बंदी से एंड्राइड मोबाइल एवं चार्जर बरामद किया था। गिरधर सिंह पुत्र छिंगाराम निवासी सेवर हाल प्रहरी नंबर 1766 केन्द्रीय कारागृह ने सेवर थाने में दर्ज कराई रिपोर्ट में कहा था कि 12 मार्च की रात्रि करीब 8 बजे वार्ड नंबर 13 बैरिक बी एवं वार्ड नंबर 15 की पूरनचंद शर्मा एवं विजय सिंह कारापाल की मौजूदगी में तलाशी ली गई। इस दौरान वार्ड नंबर 13 की बैरिक में निरुद्ध दंडित बंदी लवकुश पुत्र मोहन सिंह के बिस्तर से एक एंड्राइड मोबाइल मय सिम एवं चार्जर बरामद किया गया था।

गर्भ में मेरी खुशी का ठिकाना नहीं था। दुनिया को देखने की हसरत मुझे कोख में भी प्रफुल्लित कर रही थी। मानो, बांह फैलाकर मेरे दीदार को दुनिया उतावली हो, लेकिन मुझे इल्म भी नहीं था कि 21वीं सदी में भी मेरा बेटी होना गुनाह हो जाएगा। मां का आंचल मेरे लिए पूरी दुनिया था। आज मैं अस्पताल में अपनी मां की गंध नहीं पाकर बेचैन हूं। मुझे नहीं पता था कि मेरा बेटी होना खता हो जाएगा। दादी आपने भी कभी किसी की बेटी के रूप में ही जन्म लिया होगा। मैं दुलार नहीं तो दुत्कार के बीच ही जी लेती, लेकिन आपके तानों ने मुझसे मां की ममता ही छीन ली। यदि दुधमुंही अपनी पीर बयां कर पाती तो शायद उसके शब्द कुछ ऐसे ही होते।


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शहर के जनाना अस्पताल परिसर में 25 मई की रात्रि को एक मां अपनी दुधमुंही बेटी को बेंच पर छोड़ गई थी, जिसे अस्पताल के एनआईसीयू वार्ड में रखा गया है। यहां वह मदर मिल्क बैंक से मिलने वाले दूध पर निर्भर है। हालांकि पहले बालिका को 10 एमएल दूध दिया जा रहा था, जो अब बढ़ाकर 20 एमएल कर दिया गया है। बालिका को हर दो घंटे पर दूध दिया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि सास के तानों से तंग आकर एक मां इस बेटी को लावारिस हाल में छोड़कर चली गई थी। मां ने बेटी के पास एक पत्र भी छोड़ा था। पत्र में लिखा था कि 'मेरे छह लड़की हो गई हैं। इसलिए मेरी सास परेशान करती है। इसलिए यह कदम उठाया है। मेरी बेटी को पाल लो। तुम्हारा एहसान होगा। मुझे माफ कर दो...।' यह पत्र हर किसी को आहत कर गया।


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पता नहीं कब नसीब होगी गोद
अस्पताल परिसर में छोड़ी गई बेटी को पता नहीं गोद कब नसीब होगी। वजह, अभी वह अस्पताल में है। बाल कल्याण समिति के आदेश पर अब उसे शिशु गृह में आवासित कराया जाएगा। पुलिस की जांच पूरी होने के बाद उसे गोद देने की प्रक्रिया होगी। फिलहाल अस्पताल प्रशासन ही उसे सीने से लगाए हुए है। अभी पुलिस की जांच भी आगे नहीं बढ़ सकी है। ऐसे में बालिका के परिजनों का भी पता नहीं चल सका है। बाल कल्याण समिति अध्यक्ष राजाराम भूतौली ने बताया कि पुलिस जांच में थोड़ा समय लगेगा।

रूपवास (भरतपुर)। एक तरफ साली की शादी की तैयारियों की खुशियां थी। वहीं दूसरी तरफ रीट परीक्षा में पास होने से पूरे परिवार में खुशियों मनाई जा रही थी, लेकिन परिवार के लोगों को शायद ये पता नहीं था कि दूसरे दिन उन पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ेगा। रूपवास कस्बे के भरतपुर मार्ग स्थित बर पीपर मोड़ के निकट शनिवार रात करीब 11 बजे एक अज्ञात वाहन ने बाइक सवार दो युवकों टक्कर मारकर फरार हो गया। हादसे में दोनों युवक सड़क पर गंभीर हालत में पड़े रहे।

आसपास के लोगों पुलिस को सूचना दी। जिस पर पुलिस ने दोनों घायलों को अस्पताल पहुंचाया, जहां पार बगधारी निवासी निरंजन पुत्र रामेश्वर (23) को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। वहीं मृतक कासाला मनोज पुत्र गंगाराम शर्मा निवासी धनवाड़ा हालत गंभीर होने पर उसे आरबीएम रेफर किया गया, जहां उसका उपचार जारी है। पुलिस ने मृतक के शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सुपुर्द कर दिया है।

मृतक के रिश्तेदार कस्बा निवासी हरिशंकर शर्मा ने बताया कि धनवाड़ा निवासी मनोज पुत्र गंगाराम शर्मा अपनी बहन की शादी के कार्ड बांटने के लिए बाइक से जीजा निरंजन पुत्र रामेश्वर उम्र 23 निवासी पार बगधारी के यहां पहुंचा। जहां से मनोज अपने जीजा निरंजन के साथ कार्ड बांटने के लिए औलेंडा व रूपवास पहुंचे।

रूपवास से कार्ड बांटकर वापस घर जाते समय रात करीब 11 बजे बर पीपर मोड़ के निकट पीछे से आ रहे अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी। जिससे बाइक सवार दोनों ही गंभीर घायल हो गए। पुलिस के पहुंचने तक निरंजन ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। वहीं गंभीर घायल मनोज को भरतपुर रैफर कर दिया। पुलिस ने पंचनामा की कार्रवाई कर पोस्टमार्टम करवा शव पजिनों के सुपुर्द कर दिया।

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परिजनों ने बताया कि निरंजन काफी समय से रीट की तैयारियों में जुटा हुआ था। शुक्रवार को रीट का परिणाम जारी हुआ। इस बार रीट लेवल वन की मैरिट लिस्ट में नंबर आ गया था। इसको लेकर घर में खुशियों का माहौल था। परिजनों ने बताया कि मृतक निरंजन चार भाइयों में तीसरे नंबर का था। सड़क हादसे में निरंजन की मौत की खबर सुनकर परिवार में कोहराम मच गया। मृतक निरंजन के डेढ़ साल की एक बेटी है।

11 जून को है साली की शादी, घर में चल रही थीं तैयारी
मृतक निरंजन की साली की शादी 11 जून को है। शादी को लेकर वह भी तैयारियों में जुटा हुआ था। शनिवार कोसाला मनोज जीजा मृतक निरंजन के घर पहुंचा और शादी के कार्ड बांटने के लिए उसे भी बाइक से अपने साथ ले गया। औलेंडा व रूपवास में कार्ड बांटने के बाद रात को वह घर के लिए वापस जा रहे थे, लेकिन बर पीपर मोड़ के पास हादसा हो गया और इसमें निरंजन की मौत हो गई।

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