>>: नई सरकार से जगी उम्मीदें : अब माननीयों की बारी, जो वादे किए, वो पूरे हो

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सोलहवीं विधानसभा के लिए भीलवाड़ा की जनता ने भी सरकार चुन ली है। नए जनप्रतिनिधि चुनने के साथ भीलवाड़ा की उम्मीदें भी अब परवान चढ़ेगी। चुनाव में जनता ने जनप्रतिनिधियों की झोली वोटों से भरी है। अब जनप्रतिनिधियों की बारी है कि वो जनता से किए वादों पर खरे उतरे। भीलवाड़ा के सभी सात विधायक सत्ता पक्ष में बैठेंगे। इनमें छह भाजपा और एक निर्दलीय विधायक बने हैं। जनता ने चुनाव के समय शहर के मुद्दे चुनाव में रखे। जनप्रतिनिधियों ने भी डंके की चोट पर उनके समाधान का भरोसा दिलाया।

पहले राजस्थान में कांग्रेस सरकार थी। लेकिन विधायक भाजपा के थे। तब यह बहाना था कि सरकार से सहयोग नहीं मिल रहा। अब सभी विधायक एवं सरकार एक दल से है। ऐसे में नई सरकार से शहरवासियों की उम्मीदें बढ़ गई हैं। भीलवाड़ा में एक और ओवरब्रिज की मांग हो या गांधीसागर व मानसरोवर झील के संरक्षण व सौन्दर्यकरण का मामला। अब उम्मीदों को पूरा करने के लिए जनता की आवाज जनप्रतिनिधि बनेंगे। भीलवाड़ा की जनता चाहती है कि भीलवाड़ा का विकास उदयपुर, जयपुर, जोधपुर और कोटा की तर्ज पर हो।

एक और ओवरब्रिज :
भीलवाड़ा शहर के बीच से गुजर रही रेल पटरियों के कारण फाटक पर दिन में कई बार जाम लगता है। एक लाख से अधिक वाहन पटरी पार करते हैं। जाम के कारण वाहनों को रेंगना पड़ता है। ऐसे में भीलवाड़ा को एक और ओवरब्रिज की मांग है ताकि जाम से निजात मिल सके।

अब तक क्यों अटका :
एक दशक से विधानसभा में इस मुद्दे को ढंग से उठाया ही नहीं गया। जनप्रतिनिधियों ने गंभीरता से ध्यान नहीं दिया। जनता जाम से परेशान होती रही। दस साल में दो सरकार बदल गई। जनता की आवाज को जनप्रतिनिधि बुलंद नहीं कर पाए।

आगे का समाधान :
डीपीआर बनाने का काम जल्द पूरा हो। उसके बाद ओवरब्रिज की जल्दी नींव रखी जाए व तेजी से काम पूरा करें। इसके लिए सरकार बजट आवंटित करवाए। उधर, अजमेर पुलिया को भी चौड़ा किया जाए तो बेहतर रहेगा।
कोठारी नदी पर रिवर फ्रंट :

शहर से गुजर रही कोठारी नदी अतिक्रमण की चपेट में है। अवैध बजरी दोहन से माफिया ने सीना छलनी कर रखा है। कोटा की तर्ज पर यहां रिवर फ्रंट बनना है लेकिन मामला अभी खटाई में है। नगर विकास न्यास ने रिवर फ्रंट की दिशा में अतिक्रमण हटाने के नाम पर खानापूर्ति कार्रवाई की। लेकिन रिवर फ्रंट बनाने का काम आगे नहीं बढ़ा। उम्मीद है कि इस दिशा में नए जनप्रतिनिधियों का विजन नई सरकार के साथ भीलवाड़ा के विकास में मील का पत्थर साबित होगा।

अब तक क्यों अटका :
नगर विकास न्यास के अफसरों ने जागरूकता नहीं दिखाई। एक बड़ा कारण यह भी रहा कि पांच साल में कांग्रेस सरकार ने चेयरमैन की नियुक्ति ही नहीं की। इससे यहां जनता की आवाज बुलंद करने वाला नहीं रहा। अफसरशाही हावी रही।

आगे का समाधान :
सरकार जल्द ही न्यास अध्यक्ष की नियुक्ति करें। कोठारी नदी में अतिक्रमण हटाकर यहां फेंसिंग का काम पूरा हो और रिवर फ्रंट बनाए जाने के लिए अलग से बजट आवंटित हो। इससे कोठारी नदी का सौंदर्यीकरण हो सके।

झीलों का संरक्षण :
गांधीसागर में शहर का गंदा पानी आकर मिल रहा है। नगर परिषद ने करोड़ों रुपए पानी की तरह बहाए। लेकिन गांधीसागर का स्वरूप नहीं निखर पाया। आज भी गांधीसागर में शहर का गंदा पानी आकर मिल रहा। इसके पास से निकलने पर लोग दुर्गंध से परेशान हैं। ऐसे हाल मानसरोवर झील और नेहरू तलाई का है। इनके विकास की कार्ययोजना भी आगे नहीं बढ़ी।

अब तक क्यों अटका :
गांधीसागर के सौंदर्यीकरण व संरक्षण के लिए अब तक 100 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं। लेकिन नगर परिषद गांधीसागर मिल रहे नालों को नहीं रोक पाया। विजन के साथ गांधी सागर का विकास नहीं हुआ।
आगे का समाधान:

नगर परिषद भाजपा बोर्ड का अब तक यह बहाना था कि राज्य सरकार से साथ नहीं मिल रहा। अब तो कड़ी से कड़ी जुड़ गई है। इसलिए प्रभावी कार्ययोजना सरकार को भेजकर झीलों व तालाबों का संरक्षण किया करवाना होगा। जनप्रतिनिधियों को भी अफसरों के भरोसे नहीं रहना है। जनप्रतिनिधि खुद निगरानी रखेंगे तो कार्ययोजना पर समय पर अमल हो पाएगा।

वंचित कॉलोनियों को चम्बल का पानी:
शहर में सौ से अधिक निजी कॉलोनियां व मल्टी स्टोरी आवासीय योजनाएं हैं। यहां रहने वाले एक लाख से अधिक लोग चम्बल के मीठे पानी से वंचित है। यहां के लोग जनप्रतिनिधियों से लेकर अफसरों तक से गुहार लगा चुके हैं, लेकिन उन्हें चम्बल का पानी नसीब नहीं हुआ है।
अब तक क्यों अटका :

जलदाय विभाग, नगर विकास न्यास और कॉलोनाइजरों में आपसी तालमेल के अभाव में मामला अटका हुआ है। यहां रहने वाले लोगों को फुटबाल की तरह घुमाया जा रहा है। एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर अफसर पल्ला झाड़ रहे हैं। अब तक स्थानीय नेताओं ने भी इस मामले पर फोकस नहीं किया।

आगे का समाधान :
विधानसभा चुनाव के पहले से राजस्थान पत्रिका लगातार इस मुद्दे को उठा रहा है। एक लाख से अधिक लोगों की आवाज पत्रिका में उठी तो चुनाव मैदान में उतरे प्रत्याशियों ने भी निजी कॉलोनियों से वादा किया है कि यदि उनकी पहली प्राथमिकता में चम्बल का पानी पहुंचाना रहेगा। नई सरकार चुन ली गई। नए विधायक चुन लिए गए हैं। अब उनसे ही उम्मीद है कि वंचित कॉलोनियों में चम्बल का पानी अविलम्ब पहुंचाया जाए।

इन समस्याओं की भी जनता मांगे समाधान
- शिक्षा और स्वास्थ्य में बेहतर सुधार की जरूरत
- शहर की खस्ताहाल सड़कों से खा रहे हिचकोले से मिले निजात
- सीवरेज निर्माण का काम पूरा हो और मापदंड के अनुसार काम किया जाए
- इंदौर की तरह भीलवाड़ा में स्वच्छता में आगे आए
- बारिश में अण्डरपास में पानी भरने से हो रही मुश्किल दूर हो

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