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Table of Contents

नागौर जिले के मेड़ता सिटी शहर के राजकीय पीजी महाविद्यालय में 5 साल पहले 1 करोड़ रुपए की लागत से बने कन्या छात्रावास एवं इंडोर स्टेडियम उपेक्षा के शिकार हैं। 2019 में विधिवत उद्घाटन के बावजूद ना तो छात्राओं को छात्रावास की सुविधा मिल पा रही और ना ही खिलाड़ी इंडोर स्टेडियम में खेल प्रतिभा दिखा पा रहे। ऐसे में छात्राओं को छात्रावास तो युवा खिलाड़ियों को इंडोर स्टेडियम चालू होने का इंतजार है।

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की ओर से सार्वजनिक निर्माण विभाग के मार्फत मेड़ता के राजकीय पीजी महाविद्यालय में 2019 में इंडोर स्टेडियम के साथ ही कन्या छात्रावास का निर्माण पूरा करवाया गया। लेकिन उद्घाटन के 5 साल बाद भी कन्या छात्रावास व इंडोर स्टेडियम के ताले लगे हैं। जिसकी वजह से महाविद्यालय की छात्राओं को ना तो हॉस्टल में एडमिशन मिल रहा, वहीं खेल प्रतिभाएं भी इंडोर स्टेडियम की सुविधा से वंचित है। उल्लेखनीय है कि कन्या छात्रावास व इंडोर स्टेडियम निर्माण के लिए 1 करोड़ रुपए की लागत आई थी।

2019 में खेल मंत्री ने किया था उद्घाटन

30 जनवरी 2019 को तत्कालीन खेल एवं युवा मामलात मंत्री अशोक चांदना सहित अतिथियों की ओर से फीता काटकर कन्या छात्रावास एवं इंडोर स्टेडियम का उद्घाटन किया था। दोनों भवनों का शुभारम्भ होने के बाद से आज तक इसकी सुविधा ना तो छात्राओं को नसीब हुई और ना ही खिलाड़ियों को।

छात्रावास हैंडओवर हुआ, लेकिन इंडोर स्टेडियम नहीं

कन्या छात्रावास एवं इंडोर स्टेडियम, दोनों बनकर तैयार है। जबकि महाविद्यालय प्रशासन काे कन्या छात्रावास हैंडओवर कर दिया गया लेकिन इंडोर स्टेडियम अभी तक नहीं किया गया। मंत्री के हाथों से लोकार्पण करवा दिए जाने के बावजूद विद्यार्थियों को फायदा नहीं मिलने के कारण छात्रों में नाराजगी हैं। वहीं विभिन्न छात्र संगठन छात्रावास शुरू करवाने की मांग कर चुके हैं।

हॉस्टल खुले तो मिले सुविधा

अब छात्राओं ने इसी सत्र 2024 में छात्रावास भवन हैंडओवर लेते हुए इसका संचालन शुरू किए जाने की मांग की है। ताकि गांव-ढाणी से आने वाली छात्राओं को परेशानी से निजात मिल सके। दरअसल, छात्रावास की सुविधा नहीं मिलने के कारण छात्राओं को गांव से बस में रोजाना आना-जाना पड़ता है। बड़ी रकम देकर शहर में किराये के मकान में रहने को मजबूर है। जिससे पढ़ाई बाधित हो रही है। राज्य सरकार एक ओर बालिका शिक्षा पर जोर दे रही है, वही महाविद्यालय की ये अनदेखी छात्राओं को भारी पड़ रही हैं।

सुमचित स्टाफ व सुविधाओं की जरूरत

छात्रावास के लिए महिला वार्डन, दो पुरुष गार्ड, कुक सहित समुचित स्टाफ व चारदीवारी सहित सभी तरह की सुविधाएं होना जरूरी है। हम कॉलेज लेवल पर इसको चला नहीं सकते। वहीं इंडोर स्टेडियम पीडब्ल्यूडी की ओर से अभी हैंडओवर नहीं किया गया। इस वजह से दिक्कत आ रही है।

- डॉ. राजकुमार सामंत, प्राचार्य, राजकीय महाविद्यालय

भवनों को शुरू करें
"इस संबंध में महाविद्यालय प्रशासन से हम कई बार मिले। उनका एक ही रटा रटाया जवाब है कि कॉलेज आयुक्तालय जयपुर से हमारे इंजीनियर आएंगे, भौतिक सत्यापन करेंगे। फिर हम इसको हैंडओवर लेंगे। 5 साल से महाविद्यालय प्रशासन की गौर लापरवाही के कारण आज तक भवन बंद हैं। भवनों का संचालन समय रहते किया जाए अन्यथा महाविद्यालय प्रशासन के खिलाफ आंदोलन किया जाएगा।'

- सुरेन्द्र बापेड़िया, अध्यक्ष, युवा कांग्रेस विधानसभा मेड़ता

नागौर जिले के बड़ीखाटू थाना पुलिस ने सोशल मीडिया पर गैंगस्टर को फोलो करने के आरोपी को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से एक देशी पिस्टल, 04 जिन्दा कारतूस तथा 05 खाली कारतूस बरामद किए है।
थानाधिकारी स्वागत पाण्डेय ने बताया कि गैंगस्टर लोरेन्स विश्नोई व विक्की रोहिला को इंस्टाग्राम पर फॉलो करने के आरोपी अम्बाली गांव के निवासी अशफाक को गिरफ्तार किया है। उसके कब्जे से एक देशी पिस्टल, पांच जिन्दा कारतूस तथा चार खाली कारतूस बरामद किए है। अशफाक पर साइबर पुलिस की टीम लगातार निगरानी कर रही थी। टीम ने थाने में इस बारे में जानकारी दी। इस पर हैड कांस्टेबल रामप्रकाश को गश्त के दौरान मुखबिर से सूचना मिली कि चावडा नगर तिराया पर अशफाक नाम का व्यक्ति मोटर साइकिल लेकर खड़ा है। उसके पास पिस्टल व कारतूस होने की सूचना है। पुलिस टीम ने तत्काल मौके पर पहुंचकर अशफाक को दस्तयाब कर उसके पास से पिस्टल, व जिन्दा कारतूस बरामद किए। बड़ी खाटू थाना पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की।

पूछताछ में अशफाक ने बताया कि उसके जैसे काफी युवा सोशल मीडिया पर फेमस होने के लिए गैंगस्टर्स को फॉलो करते हैं। उसके बाद हथियारों आदि के साथ फोटोग्राफ्स वायरल करते हैं । गैंगस्टर्स हथियार आदि अवैध वस्तुओं की सप्लाई में फोलोवर्स का इस्तेमाल करते हैं। वह सोशल मीडिया के माध्यम से इन अपराधी तत्वों के सम्पर्क में आकर उनसे जुड़ गया और उनके लिए हथियारों की सप्लाई करने लगा । पुलिस अशफाक से सोशल मीडिया के माध्यम से अपराधी गतिविधियां में संलिप्त व्यक्तियों एवं उनको फोलो करने वालों के संबंध में गहनता से पूछताछ कर रही है। थानाधिकारी ने बताया कि आरोपी के खिलाफ विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की है।
इनका रहा सहयोग

नागौर पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर सोशल मीडिया पर सक्रिय आपराधिक तत्वों पर शिकंजा कसने के लिए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुमित कुमार, वृताधिकारी जायल सुनिल कुमार झाझडिया के निकटतम सुपरविजन में बड़ीखाटू थानाधिकारी की टीम ने ,साईबर सैल नागौर तथा मेड़ता डीएसटी टीम के सहयोग से यह कार्रवाई की।

नागौर. तकरीबन छह साल पहले शुरू हुई सौभाग्य योजना में अब तक दो हजार से ज्यादा वंचितों को इसके तहत बिजली का कनेक्शन दिया जा चुका है। बचे हुए वंचितों की संख्या अभी भी सात हजार से ज्यादा है। डिस्कॉम के अधिकारियों के अनुसार योजना की शुरूआत तो छह साल पहले हो चुकी थी, लेकिन वर्ष 2019 एवं वर्ष 2020 में कोविड के चलते कार्य थमा रहा। हालांकि बाद में तेजी तो इसमें लाई गई, लेकिन तमाम प्रयासों के भी अभी पूरा लक्ष्य नहीं प्राप्त हो पाया है। इसके लिए अलग से टीम बनाकर कनेक्शन दिए जाने का कार्य चल रहा है। डिस्कॉम के अनुसार जल्द ही निर्धारित लक्ष्य की पूर्ति कर ली जाएगी।
डिस्कॉम के अनुसार जिले में नागौर ग्रामीण, डेह, सांजू, भैरूंदा, डेगाना, मेड़ता शहर व मेड़ता ग्रामीण, गोटन, रिया, जायल, रोड एवं मूण्डवा आदि में मिले हुए लक्ष्य में से पचास फीसदी से ज्यादा कनेक्शन जारी किए जा चुके हँैं। अधिकारियों का कहना है कि अब तक बिजली की रोशनी से वंचित कईयों के घर बिजली पहुंच गई है। अब शेष बचे वंचितों के लिए विभाग की ओर से टीम लगाकर काम किया जा रहा है। उपभोक्ताओं में मकोड़ी गांव के लिखमाराम नायक एवं जेठाराम नायक ने लंबे समय के बाद बिजली की रोशनी मिलने पर प्रसन्नता जताई है।
अब तक, कहां कितने, कनेक्शन हुए
स्थान हुए कनेक्शनों की संख्या
नागौर ग्रामीण 561
डेह 635
सांजू 80
भैरूंदा 54
डेगाना 62
मेड़ता शहर 49
मेड़ता ग्रामीण 75
गोटन 39
रिया 43
गोटन 39
जायल 210
रेाल 70
खींवसर 493

एक नजर इस पर भी भी
सौभाग्य योजना के तहत कुल कनेक्शन लक्ष्य-9883
सौभाग्य योजना में अब तक हुए कुल कनेक्शन-2317
योजना के तहत लक्ष्य में बचे हुए कनेक्शन-7566
यहां नहीं लग पाया
डिस्कॉम की ओर से जिले में हालांकि ज्यादातर ग्रामीण क्षेत्रों में पचास प्रतिशत से अधिक उपभोक्ताओं के कनेक्शन जारी किए जा चुके है। कनेक्शन जारी किए जाने वाले क्षेत्रों में सर्वाधिक नागौर ग्रामीण एवं डेह क्षेत्र शामिल हैं। कम कनेक्शन वाले क्षेत्रों में रोल, गोटन, रिया, मेड़ता, भैंरूदा आदि क्षेत्र हैं। इसके अलावा सौ कनेक्शन अभी मूण्डवा जरूर जारी किए गए है, लेकिन अभी नौ सौ से ज्यादा कनेक्शन करने हैं। इसे भी जल्द ही कर दिया जाएगा। इसके लिए विभाग की ओर से अलग से टीम बनाकर काम किया जा रहा है। योजना के तहत अब तक इसमें 10 करोड़ 42 लाख 65 हजार रुपए की राशि व्यय हो चुकी है।
इनका कहना है...
सौभाग्य योजना के तहत अब तक ढाई हजार से ज्यादा कनेक्शन दिए जा चुके हैं। शेष बचे हुए लोगों के कनेक्शन करने के लिए प्रक्रिया चालू है। इसके अलावा अलग से टीम बनाकर भी इस पर निगरानी रखे जाने के साथ काम कराया जा रहा है।
एफ. आर. मीणा, अधीक्षण अभियंता अजमेर डिस्कॉम-नागौर

नागौर जिले के लाडनूं शहर में बुधवार शाम को खेत में कार्य कर बाइक से घर आते समय हाईटेंशन लाइन के झूलते तार से करंट लगने पर हुई युवक की मौत मामले में गुरुवार को परिवारजन एवं ग्रामीणों ने राजकीय चिकित्सालय में हंगामा किया। घटना के लिए विद्युत विभाग को जिम्मेदार ठहराते हुए स्थानीय अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज करने, मृतक के परिवार को 50 लाख रुपए मुआवजा और सरकारी नौकरी दिलाने की मांग की।
जानकारी के अनुसार चन्द्राई गांव निवासी भैराराम (35) पुत्र मांगीलाल जाट अपनी पत्नी दुर्गादेवी के साथ बुधवार शाम को खेत में कार्य कर बाइक से घर आ रहा था। भाखर नाडी के पास 11 हजार केवी की हाईटेंशन लाइन के झूलते तार में भैराराम फंस गया। बाइक अनियंत्रित हो गई। पीछे बैठी पत्नी दूसरी तरफ गिर गई। भैराराम को करंट लगने से उसकी मौके पर ही मृत्यु हो गई । राजकीय चिकित्सालय में भैराराम को चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। दुर्गा देवी का प्राथमिक उपचार किया गया। घटना की जानकारी मिलने पर परिजन एवं ग्रामवासी रात को ही चिकित्सालय में एकत्रित होना शुरू हो गए। तडक़े ही लोगों ने प्रशासन एवं विद्युत निगम के विरुद्ध नारेबाजी शुरू कर दी। मोर्चरी के सामने धरना देकर बैठ गए।
तीन घंटे बीतने तक पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों के अलावा विद्युत निगम का कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा तो लोगों का आक्रोश और बढ़ गया। आक्रोशित लोगों ने हॉस्पिटल के मुख्य द्वार के सामने डीडवाना रोड पर जाम लगा दिया। बाद में डिस्कॉम के ग्रामीण सहायक अभियंता नाथूराम सींवर व जेईएन बजरंग बागड़ा पहुंच। उन्हें प्रदर्शन कर रहे लोगों ने उन्हें खरीखरी सुनाई। डिस्कॉम के एक्सईएन राकेश मीणा व उपखण्ड अधिकारी सुप्रिया कालेर भी पहुंचे और समझाइश की। ग्रामीण अधीक्षण अभियंता स्तर के अधिकारी से बातचीत करने पर अड़े रहे। बाद में एससी एमएल वर्मा व एसडीएम कालेर को लोगों ने ज्ञापन सौंपकर मृतक के परिवार को 50 लाख रुपए मुआवजा व परिवार के सदस्य को राजकीय सेवा में लेने की मांग की। साथ ही दोषी अधिकारियों को सजा दिलाने के लिए घटना के संबंध में मामला दर्ज करने की मांग की। इस पर वर्मा ने कहा कि विभागीय जांच करवाई जाएगी और पुलिस इस संबंध में मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई करेगी। इसी तरह उन्होंने नियमानुसार मृतक के परिजनों को 5 लाख रुपये मुआवजा दिलवाने का आश्वासन दिया। इस पर बात नहीं बनी तो एसडीएम कालेर ने कृषि विभाग की ओर से 2 लाख रुपए तथा मृतक की पत्नी को संविदाकर्मी के रूप में नियुक्ति दिलाने, मृतक की पत्नी को विधवा पेंशन व दोनों बच्चों को पालनहार योजना का लाभ दिलाने का आश्वासन दिया। दोनों अधिकारियों की समझाइश के बाद धरना समाप्त हुआ। इस दौरान भाजपा किसान मोर्चा के देवाराम पटेल, ओडिंट सरपंच गणेश चबराल सहित काफी लोग मौजूद थे।

नागौर शहर के मानासर रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) पर गुरुवार सुबह तनु सल्फ्यूरिक अम्ल (डाइल्यूट सल्फ्यूरिक एसिड) से भरा टैंकर असंतुलित होकर पलट गया। गनीमत रही कि टैंकर आरओबी से नीचे नहीं गिरा, अन्यथा बड़ा हादसा हो जाता। टैंकर पलटने से उसमें भरा तनु सल्फ्यूरिक अम्ल निकलकर बहने लगा, जो आरओबी के साथ नीचे सड़क पर भी फैल गया। अम्ल बहकर डिस्कॉम कार्यालय तक पहुंच गया। हादसे की सूचना मिलने पर कोतवाली थाना पुलिस, यातायात पुलिस के साथ एएसपी सुमित कुमार भी मौके पर पहुंचे तथा यातायात डायवर्ट किया। करीब तीन घंटे बाद टैंकर को क्रेन की सहायता से खड़ा करके हटाया गया। इसके बाद आरओबी पर भरे अम्ल पर कुछ मिट्टी डाली गई।

आरओबी का उद्घाटन भी बाकी
मानासर आरओबी में रोड इंजीनियरिंग की कमी साफ दिखाई दे रही है। पुल में इतने मोड़ दिए गए हैं कि हर वक्त हादसे की आशंका रहती है। अब तक इस पुल का औपचारिक उद्घाटन भी नहीं हुआ है। विधानसभा चुनाव की आचार संहिता के दौरान पुल पर यातायात चालू कर दिया था।

बड़ा सवाल : शहर में क्यों आया टैंकर
टैंकर चालक जोधपुर से दिल्ली की ओर जा रहा था यानी उसे जोधपुर रोड से लाडनूं रोड की ओर जाना था। इसके लिए बायपास रोड बनी हुई है, इसके बावजूद टैंकर चालक शहर के अंदर आ गया।
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आरओबी एक नजर
मानासर रेलवे फाटक पर 1.173 किलोमीटर लम्बा व 7 मीटर चौड़े ओवरब्रिज को बनाने के लिए 7 जून 2018 को शिलान्यास किया गया था। कार्यादेश के अनुसार ठेकेदार को दिसम्बर 2019 में काम पूरा करना था। लेकिन काम अक्टूबर 2023 में पूरा हो पाया। आरओबी का बजट 29.23 करोड़ रुपए था। निर्माण शुरू होने के बाद आरओबी की डिजायन में भी फेरबदल किया गया, जिसके कारण मोड़ बढ़ गए।

'ब्लैक स्पॉट' बन रहा है आरओबी
पांच साल के लम्बे इंतजार के बाद मानासर रेलवे फाटक पर बनाया गया आरओबी हादसे का 'ब्लैक स्पॉट' बनता जा रहा है। इस पुल पर पिछले एक महीने में यह दूसरी दुर्घटना है। इससे पहले गत 19 जनवरी को यहां मोटरसाइकिल सवार दीवार से टकरा कर नीचे गिर गया था, जिससे उसकी मौत हो गई। आरओबी में दिए गए खतरनाक मोड़ व सुरक्षा दीवार छोटी होने से बार-बार हादसे हो रहे हैं। शहरवासियों ने इस आरओबी को 'खतरनाक पुलिया' कहना शुरू कर दिया है। जल्द ही हादसों को रोकने के लिए ठोस उपाय नहीं किए गए तो भविष्य में बड़े हादसे से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
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आरओबी पर सुबह करीब 8 बजे टैंकर पलटा । उसके बाद टैंकर का अम्ल बहता रहा। करीब तीन घंटे बाद टैंकर को क्रेन की सहायता से सीधा किया जा सका। काफी देर तक टैंकर आड़ा पड़ा रहने से अम्ल बहता रहा, जिससे न केवल पुल में रिसाव हुआ, बल्कि अम्ल बहकर नीचे सड़क के किनारे बहता हुआ डिस्कॉम कार्यालय तक पहुंच गया। बाद में दोपहर करीब दो बजे जेसीबी से उस पर मिट्टी डाली गई। उधर, टैंकर से तनु सल्फ्यूरिक अम्ल की सप्लाई करने वाली कम्पनी की टीम जोधपुर से दोपहर एक बजे मौके पर पहुंची तथा चूना डालकर अम्ल का प्रभाव खत्म करने का प्रयास किया।

बासनी पुल के बाद एक और दाग
विशेषज्ञों के अनुसार तनु सल्फ्यूरिक अम्ल से आरओबी को नुकसान की आशंका है। हालांकि एसडीएम सुनील कुमार का कहना है कि इससे कोई नुकसान नहीं होगा, लेकिन मिर्धा कॉलेज के विशेषज्ञों ने बताया कि अम्ल का रिसाव होने से पुल को नुकसान की आशंका है। इसे देखते हुए एनएच के अधिकारियों ने टैंकर चालक के खिलाफ कोतवाली थाने में रिपोर्ट दी है। साथ ही रिपोर्ट की एक कॉपी जिला कलक्टर को देने की जानकारी भी एनएच के एक्सईएन राहुल पंवार ने दी है।

शहर में बासनी रोड पर 1960 के मॉडल से बनाया गया आरओबी हादसे का केन्द्र बिन्दु है। 'टी' आकार में बने इस पुल पर कई बार वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो चुके हैं और हर वक्त हादसे की आशंका रहती है। अब मानासर फाटक पर बना आरओबी भी शहर के लिए ऐसा ही 'दाग' है, जिसमें रोड इंजीनियरिंग को ताक पर रखा गया है। अब बीकानेर फाटक पर बन रहे आरओबी पर भी कई मोड़ दिए जा रहे हैं, जो सर्पाकार होने के कारण हादसे का स्पॉट बनेगा।

नागौर शहर के मानासर रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) पर गुरुवार को तनु सल्फ्यूरिक अम्ल (डाइल्यूट सल्फ्यूरिक एसिड) से भरा टैंकर असंतुलित होकर पलट गया। पांच साल के लम्बे इंतजार के बाद मानासर की रेलवे फाटक पर बनाया गया यह आरओबी हादसे का 'ब्लैक स्पॉट' नहीं बन जाए। क्योंकि इस पुल पर पिछले एक महीने में यह दूसरी दुर्घटना हो गई।
गनीमत रही कि टैंकर आरओबी से नीचे नहीं गिरा, अन्यथा बड़ा हादसा हो जाता। टैंकर पलटने से उसमें भरा तनु सल्फ्यूरिक अम्ल निकलकर बहने लगा, जो आरओबी के साथ नीचे सडक़ पर भी फैल गया। अम्ल बहकर डिस्कॉम कार्यालय तक पहुंच गया। हादसे की सूचना मिलने पर कोतवाली थाना पुलिस, यातायात पुलिस के साथ एएसपी सुमित कुमार भी मौके पर पहुंचे तथा यातायात डायवर्ट किया। करीब तीन घंटे बाद टैंकर को क्रेन की सहायता से खड़ा करके हटाया गया। इसके बाद आरओबी पर भरे अम्ल पर कुछ मिट्टी डाली गई।


आरओबी का उद्घाटन भी बाकी
मानासर आरओबी में रोड इंजीनियरिंग की कमी साफ दिखाई दे रही है। पुल में इतने मोड़ दिए गए हैं कि हर वक्त हादसे की आशंका रहती है। अब तक इस पुल का औपचारिक उद्घाटन भी नहीं हुआ है। विधानसभा चुनाव की आचार संहिता के दौरान पुल पर यातायात चालू कर दिया था।


'ब्लैक स्पॉट' बन रहा है आरओबी
पांच साल के लम्बे इंतजार के बाद मानासर रेलवे फाटक पर बनाया गया आरओबी हादसे का 'ब्लैक स्पॉट' बनता जा रहा है। इस पुल पर पिछले एक महीने में यह दूसरी दुर्घटना है। इससे पहले गत 19 जनवरी को यहां मोटरसाइकिल सवार दीवार से टकरा कर नीचे गिर गया था, जिससे उसकी मौत हो गई। आरओबी में दिए गए खतरनाक मोड़ व सुरक्षा दीवार छोटी होने से बार-बार हादसे हो रहे हैं। शहरवासियों ने इस आरओबी को 'खतरनाक पुलिया' कहना शुरू कर दिया है। जल्द ही हादसों को रोकने के लिए ठोस उपाय नहीं किए गए तो भविष्य में बड़े हादसे से भी इनकार नहीं किया जा सकता।


बड़ा सवाल : शहर में क्यों आया टैंकर
टैंकर चालक जोधपुर से दिल्ली की ओर जा रहा था यानी उसे जोधपुर रोड से लाडनूं रोड की ओर जाना था। इसके लिए बायपास रोड बनी हुई है, इसके बावजूद टैंकर चालक शहर के अंदर आ गया।


आरओबी एक नजर
मानासर रेलवे फाटक पर 1.173 किलोमीटर लम्बा व 7 मीटर चौड़े ओवरब्रिज को बनाने के लिए 7 जून 2018 को शिलान्यास किया गया था। कार्यादेश के अनुसार ठेकेदार को दिसम्बर 2019 में काम पूरा करना था। लेकिन काम अक्टूबर 2023 में पूरा हो पाया। आरओबी का बजट 29.23 करोड़ रुपए था। निर्माण शुरू होने के बाद आरओबी की डिजायन में भी फेरबदल किया गया, जिसके कारण मोड़ बढ़ गए।


पांच घंटे तक बहता रहा अम्ल
आरओबी पर सुबह करीब 8 बजे टैंकर पलटा । उसके बाद टैंकर का अम्ल बहता रहा। करीब तीन घंटे बाद टैंकर को क्रेन की सहायता से सीधा किया जा सका। काफी देर तक टैंकर आड़ा पड़ा रहने से अम्ल बहता रहा, जिससे न केवल पुल में रिसाव हुआ, बल्कि अम्ल बहकर नीचे सडक़ के किनारे बहता हुआ डिस्कॉम कार्यालय तक पहुंच गया। बाद में दोपहर करीब दो बजे जेसीबी से उस पर मिट्टी डाली गई। उधर, टैंकर से तनु सल्फ्यूरिक अम्ल की सप्लाई करने वाली कम्पनी की टीम जोधपुर से दोपहर एक बजे मौके पर पहुंची तथा चूना डालकर अम्ल का प्रभाव खत्म करने का प्रयास किया।

नागौर. विश्वस्तरीय रामदेव पशु मेला को में इस बार कबड्डी, खो-खो, रस्साकसी, मटकी फोड़, मटकी दौड़ एवं मेंहदी आदि के कार्यक्रम कराए जाएंगे। मेला में दुकानें भी लगाई जाएगी। दुकानों में जूतियां, हथकरघा, लौह निर्मित आदि की दुकानें भी इस बार लगी हुई नजर आएंगी। अतिरिक्त जिला कलक्टर अशोक कुमार योगी के साथ हुई बैठक में इस पर सहमति बन चुकी है। आयोजकों का प्रयास इन प्रतियोगिताओं में विदेशी सैलानियों को भी शामिल कराने का रहेगा। ताकि स्वदेशी एवं विदेशी सैलानियों के साथ मिली-जुली टीम रामदेव पशु मेला में खेलेगी तो फिर इसके प्रति लोगों का आकर्षण बढ़ेगा। अधिकारियों का कहना है कि पर्यटन विभाग के सहयोग से सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी इस बार नए रंगांरंग कार्यक्रम भी कराए जाने की योजना है।
जोधपुर रोड स्थित विश्वस्तरीय रामदेव पशु मेला के प्रति लोगों के घटते रुझान को देखते हुए अब प्रशासन ने इस मेला में खेल प्रतियोगिताओं को भी कराने का फैसला लिया है। इस पर अपनी सहमति की अपनी मुहर भी लगा दी है। अतिरिक्त जिला कलक्टर योगी के साथ हुई बैठक में यह स्पष्ट कर दिया गया है कि इस बार खेल प्रतियोगिताएं अब हर हाल में कराई जाएगी। ताकि इस मेला के प्रति विदेशी एवं स्वदेशी दोनों ही जुड़ाव महसूस करने के साथ इससे जुड़े रहे। बैठक में कबड्डी, रस्साकसी, मटकी, मेंहदी, मटकी फोड़ आदि प्रतियोगिताओं को कराने से जुड़े बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। चर्चा के दौरान इनके आयोजन पर अंतिम मुहर लगाते हुए अतिरिक्त जिला कलक्टर योगी ने इसे कराए जाने की तैयारियां करने के लिए कहा है। इसमें यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि ऐन मौके पर किसी भी प्रकार की किन्तु-परन्तु की स्थिति नहीं आनी चाहिए। प्रयास रहेगा कि इसमें से मेंहदी प्रतियोगिता एवं कबड्डी व रस्साकसी में विदेशी सैलानियों की भी सहभागिता रहे। इसके लिए पर्यटन विभाग को जिला कलक्टर की ओर से अपने प्रयास तेज करने के लिए कहा गया है। सबकुछ योजनाबद्ध तरीके से चला तो पहली बार विदेशी सैलानी भी कबड्डी में ताल ठोंकते हुए नजर आएंगे।
इन दुकानों को भी मेला में लगाया जाएगा
रामदेव पशु मेला में मिट्टी के विभिन्न आकृतियों में ढली प्यालियां, कप, झालरें, डिजाइनदार सुराहियां, गुलदस्ते, ग्लास आदि के दुकानदारों सें संपर्क कर इनकी दुकानें भी मेला में लगवाने के लिए कहा गया है। अतिरिक्त जिला कलक्टर अशोक कुमार योगी ने इस संंबंध में जिला उद्योग अधिकारी से प्रयास कर दुकानदारों से संपर्क कर इनको सुनिश्चित रूप से लगवाने के लिए निर्देशित किया है। इसके साथ ही मेला में हस्तनिर्मित लौह सामग्रियों की स्टॉलें भी लगाने के लिए कहा गया है। नागौर से ही प्लास, कटर आदि की कई संयंत्र व्यापक मात्रा में बनाकर आपूर्ति के लिए बाहर भेजे जाते हैं। अतिरिक्त जिला कलक्टर योगी ने नागौर से निर्मित हस्तकला के ऐसे उत्पाद जो बाहरी क्षेत्रों में अपनी धूम मचा रहें हैं, की दुकानें भी यहां लगवाए जाने के प्रयास किए जाने चाहिए। इसके अलावा हथकरघा एवं जूतियां आदि की स्टॉलें लगाने के लिए जिला उद्योग की ओर से अतिरिक्त प्रयास कर इसको सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है। ताकि मेला इस बार अपने बदले हुए स्वरूप में नजर आने के साथ ही लोगों के आकर्षण का एक प्रमुख केन्द्र बन सके। जिला उद्योग अधिकारी बजरंग सांगवा, जिला खेल अधिकारी सोहनलाल गोदारा, वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ मूलाराम जांगू आदि मौजूद थे।
इनका कहना है...
रामदेव पशु मेला में पांरपरिक खेलों में कबड्डी, रस्साकसी, मटकी फोड़ आदि की प्रतियोगिताओं के साथ ही हथकरघा एवं हस्तनिर्मित उत्पादों की दुकानें भी पहली बार लगी हुई नजर आएगी। इनके लिए सहमति बन चुकी है। बैठक में इस संंबंध में चर्चा भी हो चुकी है।
डॉ. महेश कुमार मीणा, संयुक्त निदेशक पशुपालन नागौर

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