>>: ई-फाइल मॉड्यूल सिस्टम में 'चक्करघिन्नी' हो रहे हैं कर्मचारी

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अलवर। प्रदेशभर के सरकारी कार्यालयों ने एक फरवरी से ई-फाइल मॉड्यूल सिस्टम लागू कर दिया गया है। सभी संभागीय आयुक्त और कलेक्टर्स को इस सिस्टम को लागू करने की जिम्मेदारी दी गई है, लेकिन अलवर जिले में इस सिस्टम के तहत काम करने में अभी समय लग सकता है।

सरकार के आदेश के बाद इस दिशा में काम शुरू हुआ है। कलेक्टर ने सभी अधीनस्थ कार्यालयों को इस संबंध में आदेश भी जारी कर दिए, लेकिन पुराना प्रशासनिक ढर्रा इतना उलझा हुआ है कि कर्मचारी इस सिस्टम के अनुसार खुद को ढाल नहीं पा रहे हैं। इस सिस्टम के तहत आॅनलाइन ही फाइल पर टिप्पणी और हस्ताक्षर करने होंगे। इसे लेकर प्रशिक्षण भी आॅनलाइन ही उपलब्ध करवाया गया, लेकिन कर्मचारी अभी तक इस सिस्टम को समझ नहीं पाए हैं।

ग्राम स्तर तक पहुंचने में लगेगा समय

मुख्य सचिव के आदेश पर यह व्यवस्था संभाग, जिला, उपखंड, तहसील और ग्राम स्तर तक लागू की गई है। मगर अभी तक शहर में ही कर्मचारी सिस्टम को समझ नहीं पा रहे हैं। ऐसे में अन्य जगहों पर सिस्टम को सही तरीके से लागू होने में और समय लग सकता है।

प्रशासनिक ढर्रा सुधारने में लगी है सरकार

प्रदेश में भाजपा सरकार आने के बाद प्रशासनिक ढर्रे को सुधारने की दिशा में काम काज किया जा रहा है। मुख्य सचिव सुधांश पंत लगातार जयपुर में विभागों का निरीक्षण कर रहे हैं। अन्य अधिकारियों को भी अपने विभाग के अधीन दफ्तरों का निरीक्षण करने के लिए निर्देश दिए गए हैं। ताकि जनता के प्रति सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।

इसलिए पड़ी जरूरत

आमजन के काम समय हो, इस मकसद से यह सिस्टम को लागू किया गया है। अब तक कर्मचारी फाइल की लोकेशन या नहीं होने का बहाना बनाकर काम को टालते रहे है। मगर इस सिस्टम से फाइल की लोकेशन का समय पर पता लग सकेगा और आमजन के काम समय पर हो सकेंगे।

 

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