जयपुर. नवग्रहों में मंगल देव को सेनापति माना गया है। मंगल देव को क्रूर ग्रह कहा जाता है हालांकि शुक्र के साथ ही उन्हें भी प्रेम संबंधों का कारक भी माना जाता है। सच तो यह है कि बिना उनकी प्रसन्नता के न दांपत्य सुख मिलता है और न ही प्रेम सुख।
ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई के अनुसार दांपत्य सुख के लिए खासतौर पर कन्या की कुंडली में मंगल का अच्छा होना बहुत जरूरी है. कुंडली के प्रथम, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम या द्वादश भाव में मंगल स्थित है तो ऐसे लोगों को मंगली या मांगलिक कहा जाता है। इसे मंगल के अशुभ होने के लक्षण के तौर पर लिया जाता है.
इन जातकों पर मंगल ग्रह का अत्यधिक प्रभाव होता है। ऐसे जातकों के विवाह में बाधा, दांपत्य जीवन में परेशानी सहित अन्य कई परेशानियां सामने आ सकती हैं। ज्योतिषाचार्य पंडित नरेंद्र नागर बताते हैं कि मांगलिक दोष करने के लिए हनुमानजी की पूजा सबसे श्रेष्ठ है।
हर मंगलवार को हनुमान चालीसा का पाठ करें. इस दिन हनुमानजी को चोला भी चढ़ा सकते हैं। हो सके तो हनुमान चालीसा का पाठ सात बार करें. इसमें बमुश्किल आधा घंटे लगेंगे पर नियमित पाठ से इसका फल अवश्य मिलेगा।
September 29, 2020 at 09:01AM