- चन्द्रशेखर व्यास
जैसलमेर. केन्द्रीय बोर्ड के कक्षा 10 और 12 व राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की तरफ से 12वीं कक्षा के विज्ञान और वाणिज्य संकायों का परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद सीमांत जैसलमेर जिले के नवयुवाओं के सामने करियन चयन का यक्ष प्रश्न एक बार फिर हाजिर है। उनके परिवारजनों से लेकर मिलने वाले प्रत्येक व्यक्ति का एक बड़ा सहज-सा सवाल होता है कि, अब आगे क्या करने का इरादा है? इस सहज दिखाई देने वाले सवाल का जवाब देना यहां के युवाओं के लिए कतई आसान नहीं है क्योंकि उच्च शिक्षा और पेशेवर क्षमता उत्पन्न करने वाली शिक्षा का जैसलमेर में लगभग अभाव है और कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां रोजगार की विपुल संभावनाएं हैं लेकिन सीमांत जिले के युवाओं को उनकी अव्वल तो जानकारी नहीं है और जानकारी है तो भी वह बहुत हद तक सतही है। परीक्षाओं के परिणाम जारी होने के बाद ज्यादातर अभिभावकों के जेहन में सिर्फ यही सवाल है कि उनकी संतान आगे क्या करेगी? पश्चिमी क्षेत्र में सबसे बड़ी अंतरराष्ट्रीय सीमा और निर्वाचन क्षेत्र के लिहाज से देश के चुनिंदा सबसे बड़े क्षेत्रों में शुमार जैसलमेर में अभिभावकों की पसंद चिकित्सा, अभियांत्रिकी, विधि, सिविल सेवा, शिक्षा, एमबीए और सीए तक सीमित हो गई है। पत्रिका की ओर से किए गए एक सर्वे के आधार पर स्पष्ट हुआ कि अधिकांश अभिभावक अपने सपनों को बच्चों से पूरा करवाना चाहते हैं। बच्चों की दिलचस्पी को टटोलने या उनका मनोवैज्ञानिक प्रशिक्षण करवाने पर ज्यादातर अभिभावक मौन हैं। जैसलमेर में अधिकांश विद्यार्थी और अभिभावक यह बताने में असमर्थ हैं कि आखिर वे किस क्षेत्र में अपना करियर बनाएंगे?
क्या कहता है शोध
जिले के वासी लीक से हटकर करियर चयन के लिए तैयार नहीं लगते। जिले के सीमा क्षेत्र में गैस के अथाह भण्डार होने की पूर्ण संभावना है। गैरपारम्परिक ऊर्जा के लिहाज से जैसलमेर पहले पवन ऊर्जा और अब सौर ऊर्जा उत्पादन का हब बन कर उभर रहा है। लाइमस्टोन से लेकर जिप्सम और अन्य खनिज संपदा की भी हमारे यहां कमी नहीं होने के बावजूद इन क्षेत्रों में करियर बनाने के प्रति युवाओं की दिलचस्पी नहीं के बराबर है। ऐसा इसलिए है कि, उन्हें जानकारी ही नहीं है कि इन क्षेत्रों में करियर संभावनाएं क्या हैं तथा इसके लिए उन्हें किस तरह से स्वयं को तैयार करना है? जबकि जिले में उपरोक्त क्षेत्रों में सैकड़ों नहीं हजारों की तादाद में बाहरी पेशेवर लोगों को नौकरियां मिल रही हैं। आने वाले समय में सीमेंट के कारखाने भी यहां लगने तय हैं। जानकारी के अभाव के चलते युवा सिर्फ सरकारी नौकरी या पर्यटन आधारित उद्योगों तक सीमित हुआ लगता है।
साक्षरता की स्थिति और उच्च शिक्षा
2011 की जनगणना के अनुसार, साक्षरता की दृष्टि से अन्य जिलों के मुकाबले जैसलमेर का 28वां तथा महिला साक्षरता में 29वां स्थान है। इसके बाद साल 2021 में जनगणना नहीं हो पाई है। दूसरी तरफ जिले में कहने को तो राज्य सरकार ने कई बड़े गांवों तक में कॉलेज स्वीकृत कर दिए हैं लेकिन जैसलमेर व पोकरण में दशकों से संचालित सरकारी कॉलेजों में ही प्राध्यापकों के अधिकांश पद रिक्त चल रहे हैं। ऐसी स्थिति में ज्यादातर युवाओं को डिजाइन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, प्रबन्ध अध्ययन, बीमा, नर्सिंग, कृषि, कम्प्यूटर्स, सांख्यिकी, अग्निशमन, उद्यमिता, एक्युरियल साइंस और इन्वेस्टमेंट आदि क्षेत्रों के संस्थानों और प्रतियोगी परीक्षाओं की जानकारी ही नहीं है। शहर में इन नवीन पाठ्यक्रमों की प्रवेश परीक्षा की तैयारी और दाखिले की गाइडेंस के लिए संस्थानों का अभाव विद्यार्थियों को परेशान करता है।
एक्सपर्ट व्यू -
कैसे करें करियर चयन
आवश्यकता है सघन रूप से करियर काउंसलिंग करने, विद्यार्थियों का मनोवैज्ञानिक परीक्षण कर उन्हें सही करियर चयन करने की सीख देने की। इसके लिए समाज और सरकार के संयुक्त प्रयास आवश्यक हैं। विद्यार्थियों के लिए यह जानना ज़रूरी है कि सर्वाधिक यूनिकॉर्न कम्पनीज का जन्मदाता, प्रगतिशील अर्थव्यवस्था और नवाचारों में सर्वश्रेष्ठ देश भारत है। भारत में लगभग 18 हजार लोगों पर एक बैंक है तो बैंकिंग, वित्त और वित्तीय प्रशासन में संभावना जबरदस्त है। बीमित लोगों का प्रतिशत 25 फीसदी से कम है इसलिए एमबीए, सीए, सीएस आदि की जोरदार मांग हैद्ध विज्ञान, जेनेटिक्स, कम्प्यूटर्स, कृत्रिम मेधा, रोबोटिक्स, रेडियो जॉकी, मीडिया इन्फ्ल्युएन्सर, पत्रकारिता, हॉस्पिटल, कृषि, उद्यमिता, फायर सेफ्टी, शिक्षण, प्रशिक्षण, इन्वेस्टमेंट, पोर्टफोलियो, मार्केटिंग सहित दो सौ से अधिक क्षेत्रों कमाल की करियर संभावनाएं हैं। सभी व्यक्ति सिर्फ डॉक्टर या इंजीनियर बनेंगे तो शेष क्षेत्रों का क्या होगा? करियर प्रायोगिक ज्ञान है जबकि कोर्स सिर्फ एक डिग्री, इसलिए करियर निर्माण करें। करियर बनाने के लिए आत्म अवलोकन करने के लिए सबसे पहले खुद की दिलचस्पी का क्षेत्र चुनें। दिलचस्पी का अर्थ यह नहीं कि जो अच्छा लगे। दिलचस्पी का अर्थ है जिस विषय में आप सशक्त हों उसे चुनें। करियर चयन में सिर्फ दिलचस्पी ही नहीं अपितु भविष्य की संभावनाएं भी देखें क्योंकि कई बार खुद की भलाई के लिए ऐसे विषय भी पढऩे पड़ते हैं जिनमें आपकी दिलचस्पी न हो। इसके बाद स्वाध्याय, शोध और मूल्यांकन में जुटकर लक्ष्य प्राप्त करें।
- डॉ. गौरव बिस्सा, एसोसिएट प्रोफेसर,
राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त मैनेजमेंट ट्रेनर और काउंसलर