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Table of Contents

मुकेश हिंगड़

उदयपुर. कोविड-19 की दूसरी और खासकर तीसरी लहर में ऑक्सीजन की कमी को लेकर मारामारी की तस्वीरें आपके जेहन में है। मारामारी के बीच ऑक्सीजन की कमी को दूर करने के लिए विशेष विमान से पूर्ति तक की गई लेकिन फिर भी हालात खराब थे। संभावित तीसरी लहर को देखते हुए अब उदयपुर संभाग में 6 नए प्लांट केन्द्र सरकार बना रही है जिनमें 1000 लीटर प्रति मिनिट क्षमता का जनरेशन प्लांट होगा और इसको बनाने का जिम्मा नेशनल हाइवे प्राधिकरण को दिया गया है, संरचना तैयार होने के बाद सयंत्र डीआरडीए स्थापित करेगा।
प्रधानमंत्री केयर फंड से तीसरी लहर में ऑक्सीजन की कमी नहीं हो इसी सोच से पूरे प्रदेश में 51 जिसमें उदयपुर संभाग में 6 जनरेशन प्लांट है। केन्द्र सरकार का जोर है कि यह कार्य तेजी से हो इसके लिए सरकार ने नेशनल हाइवे को जिम्मा दिया। संभाग के लिए एनएचआई की उदयपुर इकाई ने इन जनरेशन प्लांट को तैयार करने के लिए काम भी शुरू कर दिया गया है।
हाइवे प्राधिकरण उदयपुर ने ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट के सिविल संरचना का निमार्ण कार्य उदयपुर-रतनपुर-शामलाजी रा.रा.-8 के छह लेनीकरण के लिए नियुक्त आई.आर.बी. इंन्फ्रास्ट्रक्चर डवलपर से काम शुरू करवा दिया है।

स्टोरेज टैंक पर निर्भरता कम होगी
इन हॉस्पिटलों में ही ऑक्सीजन का उत्पादन कर आवश्यकतानुसार आपूर्ति सुनिश्चित कराई जा सकेगी। केन्द्र का उदेश्य है कि अस्पतालों में ऑक्सीजन उत्पादन केन्द्र स्थापित कर ऑक्सीजन सिलेन्डर, लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन स्टोरेज टैंक आदि पर निर्भरता कम की जा सकेगी।

संभाग में यहां बनेंगे जनरेशन प्लांट
1. एम.बी. हॉस्पिटल, उदयपुर
2. एस.एस.बी.सेटेलाइट हॉस्पिटल-चांदपोल, उदयपुर
3. जनाना हॉस्पिटल, उदयपुर
4. जिला हॉस्पिटल, डूंगरपुर
5. मेडिकल कॉलेज, डूंगरपुर
6. सब-डिविजनल हॉस्पिटल, नाथद्वारा-राजसमंद

तेजी से तैयार कर देंगे संरचना

केन्द्र सरकार ने जो यह बड़ा टॉस्क दिया है उस पर हमने तत्काल कार्य शुरू करवा दिया है। पूरी गुणवत्ता के साथ जल्दी से ये सिविल संरचना पूरी कर देंगे। बाद में सभी ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट पर रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन की ओर से संयत्र स्थापित किया जाएगा और फिर संबंधित अस्पतालों को सुर्पुद किया जाएगा।
- लोकेश सिंह राजपुरोहित, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, नेशनल हाइवे उदयपुर युनिट

मुकेश हिंगड़

उदयपुर. सरकारी विभागों में ऑनलाइन कामकाम को बढ़ावा दिया गया है। कोरोना संक्रमण के दौरान विभागों में ज्यादातर कामकाज ऑनलाइन ही निस्तारित किए गए लेकिन सबसे छोटी इकाइ ग्राम पंचायतों की बात करें तो उदयपुर जिले में 118 ग्राम पंचायतें अभी इंटरनेट से जुड़ी ही नहीं है और इस तकनीकी के जमाने में 106 पंचायतें ऐसी है जिनके पास अपना कम्प्युटर तक नहीं है।
यह जानकारी राजस्थान विधानसभा में मावली विधायक धर्मनारायण जोशी के एक सवाल के जवाब में सरकार ने दी। विधायक जोशी के सवाल पर सरकार ने कहा कि अभी राजीव गांधी सेवा केन्द्रों को ई-लाइब्रेरी से जोडऩे की कोई योजना नहीं है और न ही ग्रामीण अभियांतत्रिकी सेवा गठन की कार्रवाई विचाराधीन है। जवाब में बताया गया कि जिले की कई पंचायते जहां इंटरनेट सेवा है वहां वाई-फाई सेवा भी है। कोटड़ा क्षेत्र की 66 पंचायतों में से एक में भी वाई-फाई नहीं है।

पंचायतों में ये काम पोर्टल पर होते इसलिए नेट जरूरी
ई-ग्राम स्वराज पोर्टल
ई पंचायत पोर्टल
पहचान पोर्टल
एम एक्सन सॉफ्ट पोर्टल
प्रिया सॉफ्टवेयर
आरटीआई पोर्टल
एसएसओ आईडी
ई मेल

चुनौतियां बहुत है पंचायतों में
1. जिन ग्राम पंचायतों में कम्प्युटर नहीं है वे बाहर निजी शॉप या ई-मित्र पर अपना काम करवाते है, या स्टाफ अपने लेपटॉप को मोबाइल के हॉट स्पॉट से जोडकऱ करता हे।
2. जहां पर इंटरनेट नहीं है वहां के कर्मचारी अपने मोबाइल के हॉट स्पॉट से ही काम चलाते है।
3. दूरदराज जहां पर बाहरी सुविधा या ई मित्र नहीं है, नेट नहीं चलता है वे तहसील मुख्यालय या पास के बड़े कस्बे में जाकर अपना काम करवाते है।
4. पोर्टल पर ही ज्यादा काम होते है ऐसे में कम्प्युटर व इंटरनेट तो बहुत जरूरी हो गया है।
5. जिन पंचायतों में कम्प्युटर है वहां लाइट पूरे दिन बंद रहती है तो काम नहीं होता है।
6. गांवों में इंटरनेट कनेक्टिविटी के चक्कर में कई बार सेवाएं बाधित रहती है।

20 पंचायत समितियां के आंकड़े
652 कुल ग्राम पंचायतें जिले में
539 पंचायतों के भवन है
113 पंचायतों के भवन नहीं
546 पंचायतों के पास कम्प्युटर है
106 पंचायतों में कम्प्युटर नहीं है
534 पंचायतों में इंटरनेट है
118 पंचायतों में इंटरनेट नहीं है


जिन पंचायतों में सुविधाओं की कमी उसे दूर किया जाए

गांवों की सरकार पंचायतें ही है, ऐसे में वहां लोगों को असुविधाएं नहीं हो इस बात पर फोकस सरकार को करना चाहिए। जब सारा काम इंटरनेट आधारित कर दिया, पोर्टल पर होते है तो सबसे पहले बेसिक जरूरत कम्प्युटर व इंटरनेट ही है। ऐसे में सबसे पहले ग्राम पंचायतों में ये सुविधाएं पूरी करनी चाहिए और जो भी कमियां व समस्याएं है उनको भी ठीक किया जाए।
- धर्मनारायण जोशी, विधायक मावली

उदयपुर. जेईई मेन्स का तीसरा चरण मंगलवार से शुरू हुआ। उदयपुर में परीक्षा के लिए दो केंद्र बनाए गए थे।

सिटी कोऑर्डिनेटर डॉ. लोकेश जैन ने बताया कि परीक्षा दो चरणों में हुई। इसमें कोविड प्रोटोकॉल को ध्यान रखते हुए सारे इंतजाम कराए गए थे। परीक्षा का आयोजन 27 जुलाई तक होगा।
विद्यार्थियों के अनुसार फिजिक्स और मैथ्स के सवालों ने उलझाया, वही कैमिस्ट्री के आसान प्रश्नों को देखकर थोड़ी राहत मिली। फिजिक्स सेक्शन सबसे कठिन रहा। इलेक्ट्रोमैग्नेटिज्म और रोटेशनल मोशन के कई प्रश्न कठिन रहे। वहीं गणित का संख्यात्मक खंड भी कठिन था। जबकि कैमस्ट्री के प्रश्न अपेक्षाकृत आसान थे। वहीं, व्‍यवस्‍थाओं पर व‍िद्या‍र्थि‍यों का कहना था कि परीक्षा केंद्र पर कोविड प्रोटोकॉल के तहत सभी को मास्‍क उपलब्‍ध कराए गए और सैनिटाइजर की व्‍यवस्‍था भी थी और सोशल डिस्‍टेंसिंग के साथ ही परीक्षा हॉल में बैठाया गया। ऐसे में क‍िसी प्रकार की कोई द‍िक्‍कत नहीं हुई।


परीक्षा केंद्रों पर इतनी रही उपस्थिति -

आयोन डिजिटल, धोलीमगरी- पहली पारी - उपस्थित - 178
पंजीकृत - 234

अनुपस्थित - 57
आयोन सेंटर दूसरी पारी - उपस्थित - 179

पंजीकृत - 235
अनुपस्थित - 56


गिट्स पहली पारी - उपस्थित - 74

पंजीकृत - 102
अनुपस्थित - 28

गिट्स दूसरी पारी - उपस्थित - 82
पंजीकृत - 102

अनुपस्थित - 20

उदयपुर. राजस्थान से लगभग 4500 मील दूर बैठे लंदन में भी अगर राजस्थान का स्वाद और अपणायत मिल जाए तो देश की याद आना स्वाभाविक है। कोरोना के इस मुश्किल दौर में काफी लंबे समय से विदेशों में रह रहे भारतीय भी अपने शहर व गांव नहीं लौट पाए हैं। अंतरराष्ट्रीय उड़ानें बंद होने से कई परिवार, जो वर्ष में एक या दो बार अपनों से मिलने और अपनी मिट्टी की सुगंध लेने यहां पहुंचते थे, वे यहां नहीं पहुंच पाए। ऐसे में शहर के कुछ एनआरआईज ने विदेश में ही राजस्थान की खुशबू महका दी और व्यंजनों का स्वाद सभी को चखा दिया।


एनआरआई राजस्थानी परिवारों ने फेस्ट में लिया भाग

राजस्थान एसोसिएशन यूके के मूल रूप से उदयपुर के रहने वाले हरेंद्रसिंह जोधा ने बताया कि लंदन में कई राजस्थानी रहते हैं, जो लॉकडाउन व कोरोना के कारण अंतरराष्ट्रीय उड़ानें बंद हो जाने से अपने देश नहीं जा पाए। ऐसे में उन लोगों को उस तनाव से बाहर लाने व अपने देश के स्वाद का आनंद यही उठाने के लिए एसोसिएशन की ओर से मिर्चीबड़ा फेस्ट का आयोजन किया गया। राजस्थान एसोसिएशन यूके ने फेसबुक पेज पर इस मिर्चीबड़ा फेस्ट के बारे में पोस्ट किया और देखते ही देखते सैकड़ों राजस्थानी परिवारों ने इसमें रजिस्ट्रेशन कराया। फिर प्रतिभागियों ने मिर्चीबड़ा बनाने की पूरी प्रक्रिया को लाइव किया। इस दौरान उनका उत्साह देखते ही बनता था।

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जरूरतमंदों तक पहुंचाई राहत
जोधा ने बताया कि फेस्ट में तैयार किए गएमिर्चीबड़े के साथ मीठी बूंदी के पैकेट्स पूरे लंदन और इसके आस-पास के शहरों ऑक्सफोर्ड, कैंब्रिज , सविनडन, स्लॉ, विंडसर, कोलचेस्टर, केंट, क्रोयडन आदि में भी वितरित किए गए। ये पैकेट्स कुछ चैरिटेबल ऑर्गेनाइजेशंस को भी पहुंचाए गए, जिसे जरूरतमंदों को दिए गए। इस कार्य में मास्टर शेफ रवि, आनंद, प्रेम, राजीव, नरेंद्र के अलावा राजीव खिचर, अनुभव चौधरी, रवि, कुलदीप शेखावत, आलोक शर्मा, सोहन चौधरी, राम प्रकाश सोनी, सृष्टि भाटी, सृष्टि अग्रवाल आदि का सहयोग रहा। जोधा ने बताया कि राजस्थान एसोसिएशन यूके ने कोरोना महामारी से हुए लॉकडाउन के दौरान लगभग 3,950 से ज्यादा खाने के टिफिन और 400 से ज्यादा राशन सामग्री विद्यार्थियों, कोरोना से संक्रमित परिवार, वृद्धाश्रम और अस्पताल में वितरित किए।

गींगला (उदयपुर). मेवल क्षेत्र के जयसमंद केचमेंट एरिया की नदियों से अवैध बजरी खनन कर परिवहन करते गींगला थाना पुलिस ने एक डम्पर को १५ किमी पीछा करते हुए पकड़ लिया।
गींगला थानाधिकारी तेजकरण सिंह ने बताया कि गुडेल के निकट पुलिस गश्त के दौरान बजरी से भरा एक डम्पर जाता नजर आया। पुलिस जीप को देख डम्पर चालक ने बीच सड़क पर ही बजरी को खाली कर तेज रफ़्तार से डम्पर को भगाने लगा। पुलिस ने उसका पीछा किया तो करीब १५ किमी तक भागते हुए भीण्डर मार्ग पर सवना के निकट चालक डम्पर छोड़ जंगल में भाग निकला। पुलिस टीम ने डम्पर को जब्त कर गींगला पुलिस थाना में खड़ा किया। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है।
पुलिस जीप व डम्पर की दौड़ बनी चर्चा: गुडेल से फ ीला, बम्बोरा भीण्डर चौराया से सवना तक जिस किसी ने देखा तो हतप्रभ रह गया। आगे आगे खाली डम्पर भाग रहा था और पीछे पुलिस की जीप। आखिकार डम्पर पुलिस टीम ने पकड़ लिया, जबकि चालक भागने में कामयाब हो गया। ग्रामीणों को जब माजरा समझ में आया तो चर्चा करते नजर आए। गौरतलब है कि जयसमंद केचमेंट एरिया में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल कोर्ट नई दिल्ली की ओर से नदियों में बजरी खनन व परिवहन पर पूर्णतया रोक लगी हुई है, बावजूद चोरी छिपे खनन कर बजरी की कालाबाजारी की जाती है।

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