>>: RPSC ने किया कमाल, पेपर बेचने वाले शिक्षक को पदोन्नति देकर बनाया प्रिंसिपल , जानिए पूरा मामला

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जिले के बेकरिया थाना क्षेत्र में गतवर्ष 24 दिसंबर को आरपीएससी की वरिष्ठ शिक्षक भर्ती परीक्षा से पहले अभ्यर्थियों तक गिरोह के जरिए पेपर पहुंचाने और एक करोड़ रुपए में पेपर खरीदकर लाखों बेगेजगारों के सपनों को नेस्तनाबूत करने वाला सरकारी शिक्षक भले ही डेढ़ माह से जेल में है। लेकिन शिक्षा विभाग ने इससे बेखबर रहते हुए हाल ही में जारी सूची में शिक्षा विभाग ने आरोपी शिक्षक को पेपर लीक मामले में उसका नाम आने के बाद निलंबित भी कर चूका है इसके बावजूद उसे वाइस प्रिंसिपल से प्रिंसिपल बना दिया गया।

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1 करोड़ रुपए में बेचा था पेपर
शिक्षा निदेशक गौरव अग्रवाल के हस्ताक्षर से 26 मई को जारी सूची में 46 नंबर पर सिरोही के राजकीय महात्मा गांधी सरकारी स्कूल, भावरी में वाइस प्रिंसिपल अनिल कुमार उर्फ़ शेरसिंह मीणा को राजकीय गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल धारासार में प्रिंसिपल के तौर पर पदोन्नत करना दिखाया गया है। पेपर लीक मामले में गिरोह के सरगना भूपेंद्र सारण से की गई पूछताह में अनिल कुमार उर्फ़ शेरसिंह का नाम आने के बाद पुलिस ने इसकी गिरफ्तारी पर एक लाख रुपए का इनाम घोषित किया था। जायोर एटीएस की टीम ने उसे ओ ओड़िसा में निर्माणाधीन मकान पर मजदूरी करते हुए गिरफ्तार किया था। जयपुर जिले के चौमू में दोला का बास निवासी अनिल कुमार उर्फ़ शेर सिंह मीणा ने ही भर्ती परीक्षा का पेपर लीक के भूपेंद्र सारण को 1 करोड़ रुपए में बेचा था।

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भांजे के साथ मिलकर की प्लानिंग
अनिल उर्फ शेर सिंह मीणा ने ही आरपीएससी सदस्य बाबूलाल कटारा के भांजे विजय डामोर से परीक्षा से 2 हफ्ते पहले पेपर हासिल किया था। मीणा की गिरफ्तारी के बाद इसका खुलासा होने पर एलओली ने बाबूलाल कटारा, उसके भांजे विजय डामौर और ड्राइवर गोपाल सिंह को पकड़ा था। जांच में सामने आया था कि बाबूलाल कटारा की पेपर माफिया शेर सिंह मीणा से चार साल पहले दोस्ती हुई थी।

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कैसे बनाई योजना
कटारा के आरपीएससी सदस्य बनने के बाद शेरसिंह भीणा बे बाबूलाल के साथ पेपर आउट कराने की योजना बनाई थी। कटारा ने पेपर मामले में शेरसिंह मीणा से डील करने की जिम्मेदारी भांजे विजय को दी थी। पेपर सेट करने का जिम्मा संभाल रहे कटारा ने मीणा को 60 लाख रुपए में पेपर बेचा था। शेर सिंह ने दो किस्तों में 60 लाख रुपए दिए थे। इसके बाद शेर सिंह मीणा ने पेपर को जयपुर के शास्त्री नगर थाना क्षेत्र में टाइप करवा कर 80 लाख रुपए में भूपेंह सारण को बेच दिया। भूपेंद्र इस पेपर को आगे 5 से 10 लाख रुपए में बेचा था।

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