>>: water crisis...बरसात नहीं आई तो गहराएगा संकट

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जिलेवासियों के हलक तर करने और माटी से सोना उपजाने वाले बांधों का पानी अब सूखने लगा है। जिले के करीब 52 बांधों में से अधिकांश में पानी तल के पास पहुंच गया है। जिले के कई गांवों में पेयजल संकट गहरा गया है। ऐसे में सिंचाई के बारे में सोचना ही बेमानी है। अब सब कुछ मेह बाबा की मेहर पर ही निर्भर है। वे राजी हुए तो धरती सोना उपजेगी। हलक तर होंगे और चहुंओर खुशहाली छाएगी। ऐसा नहीं होने पर जिले के 1069 गांवों में से करीब 486 गांव में जल संकट खड़ा हो सकता है। सिंचाई का पानी नहीं मिलने पर किसानों के समक्ष भी बड़ा संकट आ सकता है।

जवाई बांध नहीं छोड़ेगा साथ
पश्चिमी राजस्थान के सबसे बड़े जवाई बांध में अभी करीब 1940 एमसीएफटी पानी है। बांध से अभी रोजाना करीब 8 एमसीएफटी पानी जलदाय विभाग की ओर से छीजत के साथ उपयोग में लिया जा रहा है। इस पानी में से करीब 550 फीट का डेड स्टोरेज निकालने के बावजूद यह पानी छह माह के लिए पर्याप्त होगा। इससे नौ शहरों व 583 गांवों में पेयजल संकट नहीं आएगा, लेकिन बांध में पानी की आवक नहीं होने पर सिंचाई का संकट जरूर खड़ा हो सकता है।

बरसात पर ही निर्भरता
पाली डिवीजन के कुछ बांधों में अभी पानी है। कई बांध सूख गए है। अब पानी की आवक बरसात पर ही निर्भर है। विभाग की ओर से बांधों पर बरसात से पूर्व करवाए जाने वाले गेट व सफाई आदि के कार्य करवा रहे है।

टीआर गहलोत, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग, पाली
टॉपिक एक्सपर्ट

कानसिंह राणावत, एक्सइएन, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग, पाली
जवाई बांध के लाइव स्टोरेज से ही अभी 6 माह तक पेयजल के लिए वर्तमान िस्थति के अनुसार ही पानी उपयोग किया जा सकता है। जो गांव जवाई बांध पर निर्भर है। उनमे जल संकट के हालात नहीं है। यदि बरसात नहीं होती है तो फिर नवम्बर के बाद वैकल्पिक स्रोतों से जल लेने पर विचार किया जाएगा।

जिले के इन बांधों में इतने एमसीएफटी पानी
जवाई बांध 1940

सरदारसमंद 24.61
रायपुर लुणी 45.55

गिरीनंदा 7.06
कंटालिया 23.87

फुलाद 45.02
मीठड़ी 26.41

सादड़ी 118.16
लाटाड़ा 9.67

राजपुरा 15.35
सेली की नाल 30.68

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