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सरिस्का एनसीआर की लाइफ लाइन, बचा रहा पर्यटन और पर्यावरण Sunday 04 June 2023 06:08 PM UTC+00 अलवर. टाइगर रिजर्व अलवर जिला ही नहीं, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र एनसीआर के लिए भी महत्वपूर्ण है। सरिस्का के बिना अलवर का पर्यटन ही नहीं पर्यावरण संतुलन का सपना भी अधूरा है। बाघ परियोजना सरिस्का अलवर जिले का महत्वपूर्ण पर्यटन केन्द्र है। यहां हर साल करीब 50 हजार पर्यटक देश- विदेश से सैर के लिए आते हैं। सरिस्का के बाघों की देश भर में ख्याति रही है। इतना ही नहीं 1213 वर्ग किलोमीटर में फैले टाइगर रिजर्व सरिस्का की हरियाली दिल्ली और पूरे एनसीआर में अनोखी है। यही कारण है कि सरिस्का को एनसीआर का ऑक्सीजन बैंक भी कहा जाता है। पर्यावरण संतुलन में बड़ा रोल बाघ परियोजना सरिस्का का अलवर जिला ही नहीं दिल्ली व एनसीआर में पर्यावरण संतुलन में बड़ा रोल है। कारण है कि पूरे एनसीआर में सरिस्का इकलौता टाइगर रिजर्व है। यहां के पेड़ पौधे और हरियाली कार्बनडाई आक्साइड सोख ऑक्सीजन का भरपूर मात्रा में उत्सर्जन करते हैं, साथ ही अन्य जहरीली गैस व कार्बन को भी सोखने का कार्य करते हैं। इसका लाभ पर्यावरण संतुलन के रूप में मिलता है।
अलवर को दिलाई पर्यटन जिले की पहचान टाइगर रिजर्व सरिस्का ने अलवर को पर्यटन जिले की पहचान दिलाने का कार्य किया है। यहां करीब 28 बाघ एवं 200 से ज्यादा पैंथर, तीन भालू हैं। वहीं कई हजार की संख्या में सांभर, चीतल एवं अन्य वन्यजीव सरिस्का का आकर्षण हैं। बाघ, पैंथर व अन्य वन्यजीवों को देखने देश- विदेश से हर साल 50 हजार से ज्यादा पर्यटक पहुंचते हैं। सप्ताह के अंत में फुल रहता पर्यटन सीजन सप्ताह के अंत में सरिस्का में पर्यटकों का सीजन फुल रहता है। यानी सभी जिप्सी व कैंटर शनिवार व रविवार को सुबह व शाम की पारी में फुल चलते हैं। वहीं वर्किंग दिवस पर पर्यटकों की संख्या में थोड़ी कमी आती है। वीकेंड में सरिस्का में प्रतिदिन 250 से 300 पर्यटक पहुंचते हैं, वहीं अन्य दिनों में 70 से 100 के बीच पर्यटक आते हैं। बाघों पर टिका पर्यटन व पर्यावरण संतुलन अलवर जिले का पर्यटन व पर्यावरण संतुलन में सरिस्का के बाघों की बड़ी भूमिका रही है। सरिस्का में हर साल बढ़ रहे बाघों से पर्यटन बढ़ा है। बाघों की आसान साइटिंग ने देश- विदेश के पर्यटकों को सरिस्का की सैर के लिए मजबूर किया है। इसका लाभ सरकार को भी मिला पर्यटकों से होने वाली आय से खजाना भरा। वहीं पर्यावरण संतुलन में भी बाघों ने बड़ी भूमिका निभाई। बाघों के चलते जंगल में हरे पेड़ों की कटाई कम हुई, इससे हरियाली बढ़ी और ऑक्सीजन का ज्यादा मात्रा में उत्सर्जन होने से पर्यावरण संतुलित रहा। बाघ अब बनेंगे रोजगार के वाहक सरिस्का के बाघ पर्यटन, पर्यावरण संतुलन में भूमिका निभाने के बाद अब आसपास के युवाओं के लिए रोजगार के वाहक भी बनेंगे। कारण है कि नए जिले बनने के बाद अलवर जिले में सरिस्का टाइगर रिजर्व ही रोजगार का मुख्य स्रोत बचा है। यहां बाघों की बढ़ती साइटिंग आसपास के क्षेत्रों में रोजगार की नई राह खोलेगी।सरिस्का वाहन ही नहीं आय भी खूब |
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