>>: Digest for August 27, 2023

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श्रीगंगानगर। बरसात से जर्जर हुई सड़कों की सेहत सुधारने के लिए अब नगर विकास न्यास प्रशासन सक्रिय हुआ हैं। न्यास प्रशासन ने सड़कों क मरम्मत के नाम पर 75 लाख रुपए का बजट मंजूर किया हैं। इसके लिए ठेके फर्म दक्ष बिल्डर्स को दिया हैं। इस ठेके फर्म को न्यास क्षेत्र के अधीन कॉलोनियों में सड़कों की हालात सुधारने के लिए अनुबंध किया हैं। ठेकेदार सुमित गर्ग ने नागौरी कॉलोनी में नई रोड का निर्माण शुरू करवाया हैं। वहीं बैंक कॉलोनी, शंकर कॉलोनी, सिंधी कॉलोनी, विवेकानंद कॉलोनी, राज्य कर्मचारी कॉलोनी, मधुवन कॉलोनी, पंचवटी कॉलोनी, मॉडल कॉलोनी आदि में भी सड़कों के पेचवर्क कराने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। आचार संहिता लागू होने से पहले न्यास प्रशासन की ओर से पूरे एरिया में सड़कों की मरम्मत कराई जाएगी।
इधर, यूआईटी ने विधायक राजकुमार गौड़ के वृंदावन विहार क्षेत्र गगन पथ की सड़कों को सुधार कराया गया हैं। हालांकि यह एरिया नगर परिषद के अधीन हैं लेकिन बरसात होने के बाद जर्जर हुई इस सड़कों को जब नगर परिषद प्रशासन ने गंभीरता से नहीं लिया। इस संबंध में राजस्थान पत्रिका के तीन अगस्त में प्रकाशित समाचार विधायक आवास क्षेत्र फिर भी जर्जर सड़क के बाद हरकत में आए जिला प्रशासन ने यूआईटी के माध्यम से इस गगन पथ की सड़क का जीर्णोद्धार कराया।
हालांकि न्यास प्रशासन ने आनन फानन में जारी किए गए वर्क ऑर्डर से ठेकेदारों से महज एक महीने में काम पूरा करने के निर्देश दिए हैं। लेकिन गुणवत्ता को लेकर अब भी सावधानी नहीं बरती जा रही हैं। ठेकेदार ने बैंक कॉलोनी में सड़क की मरम्मत के लिए वहां टैंडर के जी शैडयूल के अनुरुप ग्रिट नहीं बिछाई गई हैं। इस कारण लोगों का कहना है कि इस सड़क की मरम्मत के नाम पर खानापूर्ति की आंशका रह सकती हैंं। इस संबंध में यूआईटी के एक्सईएन मंगतराय सेतिया ने बताया कि निर्माण कार्य को तेज गति से पूरा करने के साथ साथ गुणवत्ता का ख्याल रखने के लिए जेईएन की डयूटियां लगाई हैं। शिकायत मिलने पर कार्रवाई भी की जाएगी। इधर, जेईएन बलराम जांगिड़ ने दावा किया कि बैँक कॉलोनी और नागौरी कॉलोनी का मौके पर जाकर निरीक्षण किया गया हैं। ठेकेदार को सड़क के पेचवर्क के दौरान बेहतर काम करने के लिए हिदायत भी दी हैं। जी शैडयूल के अनुरुप निर्माण सामग्री का इस्तेमाल हो, इसके लिए चैकिंग की जा रही हैं।

श्रीगंगानगर. इलाके में वाटर लाइन और सीवर लाइन बिछाने का काम छह साल बीतने के बावजूद अधूरा हैं। राज्य के स्वायत्त शासन विभाग ने जिला मुख्यालय पर सीवर लाइन और वाटर लाइन बिछाने के साथ साथ घरों का कनैक्शन करने के लिए आरयूआईडीपी को नोडल एजेंसी बनाकर इस प्रोजेक्ट के लिए करीब 454 करोड़ रुपए का बजट उपलब्ध कराया। इस नोडल एजेंसी ने एलएंडटी कंपनी को सीवर लाइन और वाटर लाइन पूरा करने का ठेका दिया, इसके एवज में अब तक 321 करोड़ रुपए का भुगतान किया जा चुका हैं लेकिन इसके बावजूद काम अब तक अधूरा है। अब अक्टूबर के पहले सप्ताह में विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने वाली हैं, इसे देखते हुए सीवर लाइन की टाइम लाइन अब तीस सितम्बर तय की हैं। इसे देखते हुए ठेका कंपनी एलएंडटी ने मीरा मार्ग पर बिछाई गई सीवर लाइन से पानी निकालकर टेस्टिंग की जा रही हैं। तकनीकी स्टाफ का कहना है कि इन लाइनों में कई जगह पानी अटका हुआ हैं, अब इसे साफ कर एक साथ जांचा जा रहा हैं।
इधर, तहसील रोड पर भी पाइप लाइनों को साफ कराने की कवायद शुरू की गई हैं। पुरानी आबादी के अलावा पूरे शहर में सीवर लाइनों को एसटीपी से जोड़ने के लिए ताकत झोंकी हैं।
कैलेंडर में साल बदल गया लेकिन आरयूआइडीपी की चाल नहीं बदली है। वर्ष 2017 से शुरू हुआ यह काम जनवरी 2020 तक पूरा होना था लेकिन वर्ष 2022 बीतने के बाद जनप्रतिनिधियों और आला अफसरों की मेहरबानी से इसकी समय अवधि 31 मार्च 2023 तक बढ़ा दी थी और फिर 30 जून 2023 तक कर दी गई हैं लेकिन अब 30 सितम्बर 2023 तक बढाई हैं। आईयूआईडीपी के अनुसार यह काम दो भागों में बांटा गया। पहले भाग में पूरे शहर में सीवर लाइन बिछाने और दूसरे भाग में वाटर लाइन बिछाने का लक्ष्य दिया गया। सीवर लाइन 327 किमी लंबी बिछानी थी लेकिन अब तक 270 किमी तक लाइन बिछ पाई हैं। ठेकेदार ने यह काम करीब साढ़े 82 प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त होने का दावा किया है जबकि करीब 47 किमी काम अब भी अटका हुआ है।
इसी प्रकार वाटर लाइन बिछाने के लिए 450 किमी लंबी लाइन का लक्ष्य तय किया गया, इसमें से अब तक 363 किमी लाइन बिछ पाई है। शेष 87 किमी लाइन बिछाने का काम चल रहा हैं। सीवर और वाटर लाइन बिछाने के बाद सड़कों के जीर्णोद्धार की प्रक्रिया भी काफी धीमी हैं।
शहर में तीन एसटीपी बनने थे, इसमें से दो जगह ही एसटीपी का निर्माण हो पाया हैं। लेकिन पुरानी आबादी में एसटीपी का निर्माण नहीं हुआ है। गुरुनानक बस्ती और सूरतगढ़ बाइपास एरिया में बने एसटीपी को चालू हालत में यूआईटी की ओर से आरयूआईडीपी को हैंड ओवर नहीं देते तब तक सीवर लाइन जोड़ा नहीं जा सकता। इस कारण सीवर लाइन को सर्वोच्च प्राथमिकता पर नहीं रखा गया हैं। पुरानी आबादी में एसटीपी नहीं बनने से पूरे पुरानी आबादी क्षेत्र में सीवर लाइन बिछाने का काम हटा दिया।

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सीवर प्रोजेक्ट की फैक्ट फाइल
दूसरा चरण की शुरुआत: 5 जनवरी 2017
पूरा करने की टाइम लाइन: 5 जनवरी 2020
फिर बढ़ाई ठेका समय अवधि: 31 मार्च 2023
अब नई टाइम लाइन अवधि: 30 सितम्बर 2023
सीवर लाइन बिछाने का लक्ष्य 327 किमी
अब तक पूरा हुआ काम: 270 किमी
अधूरा काम: 47 किमी
कितने प्रतिशत हुआ काम: 82:50 प्रतिशत

श्रीगंगानगर. भाई-बहन के स्नेह का पर्व रक्षाबंधन आने में कुछ दिन रह गए हैं। बाजारों में रक्षाबंधन को लेकर रौनक शुरू हो गई है। दुकानों में रंग-बिरंगी राखियां सज चुकी हैं। दुकानों पर भी इस बार खास तरह की राखियों की वैरायटी आई हैं। फिलहाल दुकानों में वे बहनें अधिक शॉपिंग कर रहीं हैं, जिनके भाई बाहर रहते हैं और उन्हें उनके पास राखियां भेजनी हैं। राखियों की स्टाइल व लुक में भी बदलाव आने लगे हैं। बाजार में इस बार आई राखियों में कई नई डिजाइनों की हैं। इनमें देवी-देवताओं की मूर्ति लगी राखियां ज्यादा पसंद की जा रही हैं। ऑनलाइन के इस जमाने में डाक से अपने भाई को राखियां भिजवाने का क्रेज अब तक बरकरार हैं। कोरियर संचालक धीरेन्द्र सिंह का कहना है कि देश के विभिन्न कोनों के साथ साथ विदेशों तक राखियां भिजवाई गई हैं। कनाडा, नेपाल तक राखियों को भिजवाने के लिए महिलाओं ने डाक दी हैं। इन राखियों की कीमत महज पांच सौ रुपए तक है लेकिन डाक से गंतव्य स्थल तक भिजवाने के लिए करीब दो हजार रुपए तक खर्चा कर रही हैं।
पहले राखी पर मेरे भैया लिखा होता था। अब मेरे भैया की जगह माय-ब्रो ने ले ली है। युवा पीढ़ी इन्हें खूब पसंद कर रही हैं। हालांकि पारंपरिक राखियों का क्रेज अभी भी बरकरार है। बड़ी उम्र की बहनें अपने उम्रदराज भाइयों के लिए आज भी वही पारंपरिक रेशमी धागे की राखियों को पंसद करती है। बहन अपने भाई के पास रक्षा बंधन पर नहीं आ सकती है तो ऑनलाइन राखियां बुकिंग की जा रही हैं। संबंधित दुकान या शोरूम पर ऑनलाइन राखियां पसंद कर संबंधित भाई के घर पर यह राखियां भिजवाई जाती हैं। पेमेंट भी ऑनलाइन सिस्टम का प्रावधान किया गया हैं।
राखी विक्रेता विपिन की मानें तो भगवान शिव, श्रीराम, लड्डू गोपाल, गाय के साथ श्रीकृष्ण, मोर पंख, स्वास्तिक, डमरू समेत अनेक देवी-देवताओं वाली राखियां, माय-ब्रो लिखी राखी, ब्रेसलेट, घड़ीवाली राखी, कड़ोंवाली राखी, लूमा आदि का बाजार में ज्यादा क्रेज है। सबसे ज्यादा लडडू गोपाल के लिए राखियों की बिक्री हो रही हैं। ज्यादातर महिलाएं लडडू गोपाल को अपना ईष्ट देव मानकर उसे राखी से सजाने और अपनी भाभियों और सहेलियों को भी ऐसी राखियां भिजवाने में ज्यादा रुचि दिखा रही हैं।
इस बीच, श्रावण मास की पूर्णिमा पर भाई-बहन के स्नेह का त्योहार रक्षाबंधन मनाया जाता है। इस बार 30 व 31 अगस्त को यह पर्व मनाया जाएगा। इस बार रक्षाबंधन पर दिनभर भ्रदा का साया रहेगा, ऐसे में दिन के बजाय रात में ही राखी बांधने का समय मिल पाएगा। पंडित शिवदयाल शास्त्री के अनुसार इस वर्ष पूर्णिमा तिथि 30 अगस्त को प्रारंभ हो रही है और उस दिन रात 9 बजे तक है, वहीं पंचक पूर्णिमा तिथि से पूर्व लग रहा है और अगले दिन प्रात:काल तक रहेगा। पंचांग के अनुसार, रक्षाबंधन 30 अगस्त को मनाया जाएगा। इस दिन सुबह 10 बजकर 58 मिनट से भद्रा लग जाएगी, जो रात 9.03 बजे तक रहेगी। इसके बाद राखी बांधी जा सकेगी। वहीं, अगले दिन 31 अगस्त को श्रावण पूर्णिमा सुबह 07 बजकर 07 मिनट तक रहेगी। ऐसे में इस समय तक भी राखी बांधी जा सकेगी।

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