>>: अयोध्या के श्रीराम मंदिर के फर्श व परिक्रमा में लगा रहे बिजौलियां का पत्थर

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अयोध्या में भगवान श्रीराम के निर्माणाधीन भव्य मंदिर में बिजौलियां का पत्थर इस्तेमाल हो रहा है। बिजौलियां क्षेत्र से करीब एक हजार टन सैंड स्टोन अयोध्या भेजा गया है, जहां यह पत्थर रामलला के मंदिर के फर्श और परिक्रमा में लगाए जा रहे हैं।

 

जानकारी के अनुसार, बिजौलियां सैंड स्टोन के नाम से ख्यात लाल, नीला और भूरे रंग का पत्थर अयोध्या भेजा गया है। परिक्रमा और फर्श में 2 गुना 2 फीट के पत्थर इस्तेमाल किए जा रहे हैं, जिनकी मोटाई 3 इंच है। हैंड कटर से काटने के बाद इनको पॉलिश किया गया है।
मालूम हो, राजस्थान व देशभर के कारीगर मंदिर निर्माण में दिन रात जुटे हैं। राजस्थान के विभिन्न इलाकों से न केवल पत्थर बल्कि कारीगर भी अयोध्या में मंदिर निर्माण में लगे हैं। 22 जनवरी 2024 को अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा होगी।

 

मंदिरों में शोभा बढ़ा रहा पत्थर
देश के कई दिगंबर जैन मंदिरों की मूर्तियों में बिजौलियां का सैंड स्टोन इस्तेमाल हुआ। यहां के दिगंबर जैन पार्श्वनाथ तीर्थ क्षेत्र पर 27 फीट ऊंची पद्मासन प्रतिमा के अलावा ललितपुर, सागर, कटनी, कोटा, अजमेर, डोंगरगढ़, गुना, बीना आदि में मंदिरों में प्रतिमाएं यहां के सैंड स्टोन की है। यहां से अब तक सबसे लंबा 51 फीट का पत्थर बाहर गया है।

 

12वीं शताब्दी में भी सैंड स्टोन का जादू
12वीं शताब्दी के बिजौलियां के मंदाकिनी मंदिर में इसी पत्थर का भी उपयोग हुआ। यह पत्थर अब तक मौसम से बेअसर है। यहां के पत्थर से निर्मित प्राचीन मूर्तियां भी देश के कई कोनों में मौजूद है।

 


इनका कहना है...

-क्षेत्र से अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए अब तक 1000 टन से अधिक पत्थर जा चुका है। इस पत्थर की और मांग आ रही है।
- सुनील जैन, पत्थर विक्रेता बिजौलियां

-क्षेत्र से सैकड़ों टन पत्थर मूर्तियों के लिए देश-विदेश गया है। राज्य सरकार से मदद नहीं मिली। पत्थर व्यवसाय को उद्योग का दर्जा भी नहीं दिया गया।

- अभिषेक जैन, मूर्ति पत्थर विक्रेता

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