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नए पश्चिमी विक्षोभ का दिखा असर, कई जिलों में बारिश, अब 3-4 फरवरी को होने वाला है ऐसा Thursday 01 February 2024 05:11 AM UTC+00 Rajasthan Weather Forecast : उदयपुर में कभी सर्दी तो कभी गर्मी का अहसास हो रहा है। मौसम में ये बदलाव पश्चिमी विक्षोभ के कारण छाए बादलों से है। बुधवार को सुबह बादलों से आसमान ढंका रहा, लेकिन बाद में तेज धूप खिल गई, जिससे गर्मी हो गई। वहीं, शाम 4 बजे बाद बादल फिर से घिर आए और ठंडी हवाएं चलने लगीं। इससे सर्दी का असर बढ़ गया। मौसम में बार-बार बदलाव से तापमान में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। बुधवार का अधिकतम तापमान 26.8 डिग्री से. दर्ज किया गया। इसमें 0.2 डिग्री की मामूली गिरावट हुई। वहीं, न्यूनतम तापमान 10.4 डिग्री से बढ़कर 11 डिग्री से. दर्ज किया गया। पर्वतीय पर्यटन स्थल माउंट आबू में बार-बार बदल रहे मौसमी मिजाज के चलते बुधवार को आसमान में बादलों ने डेरा डाले रखा। बादल छाने से न्यूनतम तापमान उछलकर चार डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। वहीं अधिकतम तापमान में एक डिग्री सेल्सियस की गिरावट आने से तापमापी का पारा 19 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। सवेरे-शाम की ठंड से बचने की जुगत में लोगों को ऊनी कपड़ों का सहारा लेना पड़ा। दिन में ठंडक बनी रहने से देश विदेश से आए सैलानियों ने गर्म कपड़े पहनकर ही दर्शनीयस्थलों का दीदार किया। आसमान में बादलों का आवागमन बने रहने से सूरज और बादलों के बीच आंख मिचौनी का खेल चलता रहा, जिससे धूप का असर फीका रहा। सवेरे पर्यटकों ने सडक़ों, बाजारों, नक्की झील परिक्रमा पथ, अनादरा प्वाइंट, वैलेज वॉक, टाइगर पॉथ, शान्ति शिखर, सनसेट मार्ग, देलवाड़ा मार्ग, ओरिया, अचलगढ़ आदि स्थानों पर चहलकदमी करते हुए प्राकृतिक सौंदर्य को निहारते कैमरे में कैद कर पर्यटन यात्रा को यादगार बनाया। बार-बार तापमान में उतार चढ़ाव के चलते मौसमी व्याधियों सदी, जुकाम, खांसी, बुखार आदि से भी लोगों को परेशान होते देखा गया। गत वर्ष की तुलना में इस बार सर्दी का असर कम देखा गया। वर्ष 2023 के जनवरी महीने की 15 तारीख को न्यूनतम तापमापी का पारा (-7) डिग्री सेल्सियस तक चला गया था। जिससे रात को बाहर खुले में रखे बर्तनों में रखा पानी भी बर्फ में बदल जाता था व नलों में बर्फ जम जाती थी। जलाशयों के किनारे बर्फ की मोटी परत जमी हुई दृष्टिगोचर होती थी, लेकिन इस बार गत वर्ष की अपेक्षा बर्फ नहीं जमी। ![]() इस बार न्यूनतम तापमान (-3) तक ही पहुंच पाया। क्षेत्र में कई स्थानों पर रात को पडऩे वाली ओस बर्फ के रूप में तब्दील नहीं हो सकी। जानकारों की मानें तो विश्व में हो रही प्राकृतिक व आणविक हलचल से लेकर वैश्विक ऊष्णता के चलते पर्यावरण में बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। जिससे मौसम सीधे तौर पर प्रभावित हो रहा है। हालांकि फरवरी महीने में ठंड के और बढऩे के आसार बताए जा रहे हैं। विक्षोभ का दिखा असर |
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