>>: Rajasthan News: कड़ाके की ठंड से शहद का उत्पादन प्रभावित, मधुमक्खी पालक परेशान

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Rajasthan News: कड़ाके की ठंड ने एक तरफ जहां आमजन को प्रभावित कर रखा है, वहीं मधुमक्खी पालक भी जाड़े की चपेट में आ गए हैं। क्योंकि हाड़ कंपाने वाली ठंड का दौर निरंतर जारी रहने से शहद का उत्पादन घट गया है। साथ ही पालकों को वाजिब दाम भी शहद के नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में क्षेत्र के मधुमक्खी पालकों में बहुत हताशा है।

मधुक्रांति बीफार्मर्स वेलफेयर सोसायटी के प्रदेश अध्यक्ष ढाणी अराईयान निवासी प्रकाशसिंह बादल ने बताया कि सरसों में फूलों की बहार के चलते यह शहद उत्पादन का सीजन है। मगर कड़ाके की ठंड मधुमक्खियों पर आफत बन टूट रही है। इसका खमियाजा मधुमक्खी पालकों को आर्थिक नुकसान के रूप में झेलना पड़ रहा है। बादल ने बताया कि उनके पास 450 मधुमक्खी बॉक्स हैं। सीजन में एक बॉक्स से तकरीबन 25 से 30 किलो शहद मिलता है। मगर इस बार मौसम का साथ नहीं मिलने से उत्पादन बमुश्किल 12 से 15 किलोग्राम ही होने के आसार हैं। धूप नहीं निकलने से मधुमक्खियां बाहर नहीं निकल पाती। यदि निकलती हैं तो सर्दी से मर जाती हैं। इससे शहद उत्पादन घटने के साथ-साथ उन्हें बॉक्स में ही कृत्रिम भोजन देना पड़ रहा है। इससे भी शहद उत्पादन का खर्च और बढ़ गया है। ठंड से मधुमक्खियों का मरना पालकों की अच्छे उत्पादन की उम्मीदों पर पानी फेर रहा है।

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तो मिले कुछ राहत
मधुक्रांति बीफार्मर्स वेलफेयर सोसायटी के प्रदेश अध्यक्ष प्रकाश सिंह ने बताया कि मिनिमम एक्सपोर्ट प्राइस (एमईपी) लागू करने की गुहार केंद्रीय कृषि मंत्री को पत्र भेजकर लगाई है। मधुमक्खी पालकों का जीवन संकट से गुजर रहा है। इसका मुख्य कारण शहद उत्पादन का लागत मूल्य भी नहीं मिल पाना है। मौसम खराब होने के चलते शहद का उत्पादन लगभग 40 से 50 प्रतिशत तक कम हो रहा है। इसके कारण मधुमक्खी पालक आर्थिक रूप से परेशान हैं। यदि समय रहते हालात नहीं सुधरे तो प्रधानमंत्री की प्रिय योजना स्वीट क्रांति संकट में पड़ जाएगी।

मांग आयुक्तालय को भेजी
उद्यान विभाग हनुमानगढ़ के निदेशक साहबराम गोदारा का कहना है कि मधुमक्खी पालकों की एमईपी से संबंधित मांग का पत्र मिला था। उनकी यह मांग उद्यान आयुक्तालय जयपुर के उच्च अधिकारियों तक पहुंचा दी है।

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