>>: Digest for March 04, 2024

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भक्ति व सेवा करने में पाली का कोई सानी नहीं है। उसे अब सौन्दर्यीरण व महिला विकास की नई गाथा लिखनी चाहिए। यह कहना था अग्रवाल महिला मण्डल की महिलाओं का। वे शनिवार को राजस्थान पत्रिका के स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में राजस्थान पत्रिका पाली कार्यालय में आयोजित टॉक शो में बोल रही थी। उनका कहना है कि हमारे पास जोधपुर एक आधुनिक रूप से विकसित शहर है। वैसा ही पाली को भी बनाना चाहिए। महिलाओं को आगे बढ़ने के अवसर देने चाहिए। उनमें प्रतिभा की कमी नहीं है, जरूरत है उनको मौका देने और आत्मविश्वास बढ़ाने की।

वित्तीय साक्षरता की कमी
महिलाओं में वित्तीय साक्षरता की कमी है। इसके लिए सरकार को अभियान चलाना चाहिए। ऐसे लोगों को चिह्नित कर सम्मानित करना चाहिए, जो परिवार की जिम्मेदारी के साथ अन्य कार्य बेहतर तरीके से कर रहे है, खासकर महिलाएं। इससे सोच बदलेगी और समाज में बदलाव आएगा।

जोली गुप्ता, सचिव
आर्थिक रूप से होनी चाहिए मजबूत

महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत होनी चाहिए। जो महिलाएं सिलाई, कढ़ाई, पापड़, बड़ी आदि का कार्य कर रही है। उनको आधुनिक तकनीक व बाजार का ज्ञान करवाया जाना चाहिए। राजनीति में महिलाओं की भागीदारी आज भी कम है। वहां सम्मानजनक स्थान दिया जाना चाहिए।
अनू सिंघल, अध्यक्ष

नहीं दबानी चाहिए प्रतिभा


महिलाओं में बहुत प्रतिभा है। उसे परिजनों को आगे लाना चाहिए। दबाना नहीं चाहिए। इसके लिए समाज को जागरूक करने की जरूरत है। ऐसा होने पर महिला परिवार की स्टेटस सिम्बल बन सकती है। कई जगह पर घरेलू बिजनेस में भी महिला को आगे नहीं आने दिया जाता है।

डिम्पल गर्ग, कोषाध्यक्ष
सोच बदली, लेकिन उम्र बाधा

कई महिलाएं पहले समाज की सोच से आगे नहीं बढ़ सकती। अब उनके परिजनों व समाज में बदलाव आया तो आयु आड़े आ जाती है। जो महिलाएं 40 वर्ष तक पहुंच गई है, उनको नौकरी तक नहीं मिल पाती है। महिलाओं के स्वास्थ्य व हाइजिन को लेकर कार्य होना चाहिए।
सरला गर्ग

स्वयं का बनाना चाहिए अस्तित्व
महिलाओं को पुरुषों का अनुगामी नहीं बनना चाहिए। उनको स्वयं का अस्तित्व बनाने का प्रयास करना चाहिए। इसके लिए परिजनों को भी सहयोग करना चाहिए। महिलाएं भी एक-दूसरे का सहयोग कर आगे बढ़ सकती है। युवतियों को समाज से जुड़ना चाहिए।

दिव्या सर्राफ
दुनिया की शान है नारी

दुनिया की शान है नारी, शक्ति का आधार है नारी...यह बात सभी को समझनी होगी। मध्यम वर्ग की महिलाओं के सामने सबसे अधिक समस्याएं है। आर्थिक व पारिवारिक दोनों। उनको इससे ऊपर उठाकर आगे बढ़ाने के लिए सरकार से लेकर समाज तक को प्रयास करने चाहिए।
कुसूम सर्राफ

स्वास्थ्य समस्याओं पर होना चाहिए फोकस


महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर अधिक कार्य करने की जरूरत है। हर मोहल्ले या क्षेत्र में माह में कम से कम एक बार महिला चिकित्सक का शिविर लगाना चाहिए। जिसमें महिलाएं अपनी स्वास्थ्य समस्याएं बताकर उपचार पा सके। गायनिक के साथ अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार किया जाना चाहिए।

कविता अग्रवाल
राजनीति में मिलना चाहिए सम्मान

महिलाओं को राजनीति में सम्मान मिलना चाहिए। परिजनों को भी उसे इस क्षेत्र में आगे बढ़ने से नहीं रोकना चाहिए। महिला अवेयरनेस के लिए टीम बनानी चाहिए। जो महिलाओं को सरकारी योजनाओं की जानकारी दे सके और लाभ भी दिलवाए। अभी तो चंद लोगों को ही योजनाओं का लाभ मिलता है।
ममता गोयल

मध्यम वर्ग रहता उपेक्षित
सरकार की योजनाएं निर्धन लोगों के लिए अधिक है। मध्यम वर्ग की महिलाओं के लिए अधिक योजनाएं नहीं होने से वे आर्थिक व सामाजिक कारणों से पिछड़ जाती है। प्रतिभा होने पर भी आगे नहीं बढ़ पाती है। इस क्षेत्र में कार्य करने की बेहद आवश्यकता है।

रुकमणि बंसल
विकसित होना चाहिए ऑक्सीजोन

पाली में पत्रिका की ओर से चलाया गया ऑक्सीजोन का मुद्दा सराहनीय है। यह कोटा के समान पाली में भी बनना चाहिए। इससे एक रमणीय स्थल भ्रमण के लिए भी बन जाएगा। महिलाओं को भारतीय संस्कृति का ध्यान रखकर अपने कदम आगे बढ़ाने चाहिए और समाज को सहयोग करना चाहिए।
स्नेहा गुप्ता

आउटडोर खेल का बने हिस्सा
बच्चों को मोबाइल व टीवी से दूर करने के लिए महिलाएं बड़ी भूमिका निभा सकती है। उनको बच्चों के साथ रोजाना कम से कम एक घंटा खेलना चाहिए। भोजन करते समय तो टीवी व मोबाइल का उपयोग नहीं करना चाहिए। परिजनों को भी बच्चों के साथ समय गुजारना चाहिए।

सरला गर्ग

अजीम प्रेमजी फाउंडेशन व शिक्षा विभाग के सहयोग से आयोजित साहित्य संगम व पुस्तक मेले में विद्यार्थियों के साथ बड़ी संख्या में शहरवासी उमड़े। विद्यार्थियों ने विज्ञान के रोचक तथ्यों को गतिविधियों को जाना। प्रायोगिक रूप से विज्ञान के बारे में जानकारी प्राप्त की। गणित के कोने में पहेलियों को सुलझाया। संवैधानिक मूल्यों को समझते हुए डॉ. अंबेडकर, स्वामी विवेकानंद, महात्मा गांधी के व्यक्तित्व के बारे में जानकारी प्राप्त की। मेले में पपेट शो आकर्षण का केन्द्र रहा। मेले के दौरान विद्यार्थियों व शहरवासियों ने सेल्फी कॉर्नर में सेल्फी लेकर यादों को संजोया। विद्यार्थियों ने पुस्तकों से कहानियां पढ़कर भी एक-दूसरे को सुनाई। इसके साथ ही अन्य कई कार्यक्रम हुए। जिनसे विद्यार्थियाें का ज्ञान बढ़ाने का प्रयास किया गया।

आज ये होंगे कार्यक्रम
हाउसिंग बोर्ड स्थित अंबेडकर भवन में आयोजित मेले में सुबह 11 बजे से शिक्षक परिचर्चा होगी। जिसमे शिक्षकों ने शिक्षा के क्षेत्र में किए नवाचारों और शिक्षण को रोचक बनाने के बारे में विचार रखेंगे। वहीं अपराह्न 4 बजे से शहर के स्नातकोत्तर व महाविद्यालय के विद्यार्थियों की ओर से नाट्य मंचन किया जाएगा। ओपन माइक इवेंट के माध्यम से शहर के युवा साहित्यकार, लेखक, गीतकार रचनाएं पेश करेंगे।

मंत्रोच्चार की ध्वनि के साथ हवन वेदी में आहुतियां देते श्रद्धालु..., मंगल गीत गाती महिलाएं...और एकदंत के दरबार में मत्था टेककर खुशहाली की कामना करते गणेश भक्त...। कमोबेश ऐसे ही नजारे शहर के नागा बाबा बगेची में दिखाई दिए। मौका था सिद्धपीठ गणेश मंदिर के नवीनीकरण के बाद प्रतिष्ठा महोत्सव का। महोत्सव में महंत चंचल गिरी, महंत नारायण गिरी, मंहत सुरेश गिरी, मंहत कन्हैया गिरी, महंत शिवानंद गिरी, महंत ब्रहमचारी, महंत गोविन्द गिरी सहित देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे संतों की निश्रा में सुबह 9:15 बजे से हवन शुरू हुआ। वेद मंत्रों की ध्वनि और स्वाहा के उच्चारण से माहौल प्रभु के रंग में रंग गया। इसके बाद दोपहर में भी हवन किया गया। भगवान गजानन का महाभिषेक किया गया।

रचा स्वांग, खेली फूलों से होली
महोत्सव में गणेश महिला मंडल की ओर से फागोत्सव का आयोजन किया गया। जिसमें महिलाओं ने भगवान राधा-कृष्ण का स्वांग रचकर फूलों से होली खेली। महोत्सव में अध्यक्ष भाग्यवंती, नीलू, प्रकाश कंवर, कमला, प्रकाश कंवर राठौड़, सिंधु कंवर, संजू कंवर, कुसूम लता, कंचन, मंजू, संतोष शर्मा, नीलम देसाई के साथ बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल रही। मंदिर में शाम को भगवान की आरती के बाद सुंदरकांड पाठ किया गया।

सरकारी स्कूलों में आपसी सामंजस्य, सद्भाव, विद्यालयों में विद्यार्थियों के ठहराव व नामांकन वदि्ध को लेकर मिड-डे-मील योजना चल रही है। इससे आमजन को जोड़ने के लिए अब नई योजना शुरू की गई है। इसमें किसी व्यक्ति के घर में सामाजिक कार्यक्रम होने, विवाहोत्सव या अन्य उत्सव होने, जन्म दिन, बच्चों को नौकरी मिलने, विवाह की वर्षगांठ होने, धार्मिक यात्रा कर लौटने आदि प्रसंगों की खुशी विद्यार्थियों के साथ साझा की जा सकती हैं। इसके साथ ही जीवन के अन्य खास दिनों को यादगार बनाने व खुशी बांटने के लिए विद्यालयों में मिड-डे-मील के तहत भोज का आयोजन किया जा सकता हैं। इस योजना को श्रीकृष्ण भोग नाम दिया गया है। इसमें भोज करने के साथ अन्य कई तरीकों से खुशी बांटी जा सकती है।
हर माह बनेगी रिपोर्ट
श्रीकृष्ण भोग योजना के तहत मिलने वाली सहायता की मासिक रिपोर्ट तैयार की जाएगी। एक रजिस्टर में इन्द्राज किया जाएगा। यह रिपोर्ट आयुक्त मिड-डे-मील को भेजनी होगी।

भोज के साथ यह किया जा सकता है श्रीकृष्ण भोग में

-मिड-डे-मील के नियमित परोसे जाने वाले भोजन के साथ अतिरिक्त पौष्टिक खाद्य सामग्री (फल, शहद, मिष्ठान, दूध, दही, गुड़, मूंगफली चिक्की आदि) वितरित किए जा सकते हैं।
-विद्यालयाें में किसी भी प्रकार की अन्य खाद्य सामग्री (जिसका उपयोग शिक्षा विभाग की व्यवस्था के अनुसार भोजन पकाने में किया जा सकता है, जैसे घी, तेल, दाल, मसाले, शक्कर आदि) इस योजना के तहत दी जा सकती है।
-समाज या आमजन की ओर से दी जाने वाली सामग्री का उपयोग मिड-डे-मील योजना के तहत अतिरिक्त भोजन खिलाने के लिए किया जा सकता है। मिड-डे-मील के भोजन में गुणात्मक सुधार लाने में किया जा सकता है। यदि राशि प्राप्त होती है तो उसका उपयोग रसोईघर निर्माण, बर्तन आदि खरीदने में भी किया जा सकता है।
-दानदाता व संस्था के साथ किसी व्यक्ति की ओर से खाद्य सामग्री के साथ बर्तन, गैस चूल्हे, दरी पट्टी, फर्नीचर आदि भी उपलब्ध करवाए जा सकते हैं।
-राशि नकद देने के साथ चेक, डिमाण्ड ड्राफ्ट देने के साथ स्कूल के बैंक खाते में जमा करवाई जा सकती है। उसका उपयोग देने वाले की इच्छा के अनुसार निर्माण कार्य या मिड-डे-मील में किया जाएगा।

इनका कहना है

बच्चे भगवान कृष्ण का रूप ही माने जाते है। उनके लिए यह योजना शुरू करने से विद्यालय का विकास होने के साथ बच्चों को मिड-डे-मील के तय भोजन के साथ विशेष भोजन करवाया जा सकेगा।
मदन पंवार, जिला शिक्षा अधिकारी, प्रारिम्भक, मुख्यालय, पाली

शहर के प्रताप नगर में मां-बाप के निधन के बाद अकेली रहने वाली चार बेटियों के सहायता व उनके चेहरों पर मुस्कान लाने को रोजाना शहरवासी पहुंच रहे है। बेटियों के घर पर शनिवार को नगर परिषद के पूर्व सभापति महेन्द्र बोहरा केक लेकर पहुंचे। उन्होंने अपने परिवार की खुशी में इन बेटियों को शामिल करते हुए उनके साथ केक काटा। उनको अपने हाथों से केक खिलाकर बोले, खुद को अकेला मत समझो। मैं पिता की तरह तुम्हारे साथ हूं। उन्होंने बालिकाओं को टीवी दी।

 

प्रताप नगर में बांगड़ स्टेडियम के सामने रहने वाली संगीता, नेहा, नीतू व रवीना के पिता रतन बंजारा भाटी व मां मैना देवी का निधन होने के बाद वे अकेली हो गई थी। उनकी पीड़ा को राजस्थान पत्रिका ने 17 जनवरी के अंक में मां-बाप को भगवान ने बुला लिया, अब बिलखती रहती है बेटियां...शीर्षक से समाचार प्रकाशित कर उजागर किया। इसके बाद केबिनेट मंत्री अविनाश गहलोत ने ट्वीट कर सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के अधिकारियों को बेटियों की सहायता के निर्देश दिए। कई समाजिक संगठनों ने बेटियों को सम्बल दिया। तीन बेटियों का स्कूल में प्रवेश करवाया गया। अब नगर परिषद के पूर्व सभापति बोहरा ने उनके साथ खुशी के पल बिताए। इस दौरान राधेश्याम भाटी, खटीक समाज युवा अध्यक्ष तेजराज भीलवारा, विक्रमसिंह रावत, पिराराम बंजारा, लालाराम बंजारा, राजू नागौरा, कांतिलाल सामरिया, गोविन्द सामरिया, जिनेन्द्र मेवाड़ा, दिलीप नागौरा, तारू बंजारा व छगन मेघवाल आदि मौजूद रहे।

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