>>: गरीबों के अरमानों पर वार, समिति पर मेहरबानी की बौछार

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भरतपुर. गरीबों के अरमानों की कद्र भले ही यूआईटी ने नहीं की हो, लेकिन उसकी मेहरबानी खादी समिति पर खूब बरसी है। गरीबों के हक की जमीन को लेकर यूआईटी ने संभाग की सबसे बड़ी आवसीय योजना विकसित कर दी, लेकिन यूआईटी ने यहां खादी समिति की जमीन को लेने से इनकार कर दिया। इसकी मुख्य वजह इस जमीन को निम्न आय वर्ग की बताया गया है।
नगर विकास न्यास भरतपुर की ओर से आवासीय योजना संख्या 13 के तहत केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान के निकट पर्यटक सुविधाओं के लिए आरक्षित भूमि में से 23716 वर्गगज (12.5 बीघा) भूमि को अनियमित रूप से योजना से मुक्त किया गया है। न्यास की अवासीय योजना के भूमि क्षेत्र मेे शामिल केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान के निकट की भूमि पर्यटक सुविधाओं के लिए आरक्षित की गई थी। इस भूमि क्षेत्र में खादी ग्रामोदय समिति भरतपुर के स्वामित्व की भूमि को न्यास की ओर से समिति को निम्न आय वर्ग की मानकर योजना संख्या 13 (न्यास की बहुउद्देशीय योजना) से मुक्त किया गया। अब समिति की ओर से इस भूमि में आवासीय भूखंड बनाए गए हैं। पहले यूआईटी ने समिति की भूमि को योजना में शामिल किया। इसके बाद जब भू उपयोग परिवर्तन के लिए आवेदन कर आवासीय कॉलोनी बनाने की बात कही, जिसे यूआईटी ने खारिज कर दिया। खादी समिति को निम्न आय वर्ग की मानने को लेकर कृष्ण नगर निवासी देवेन्द्र पोद्दार ने यूआईटी से सवाल किया तो यूआईटी ने इस संबंध में समिति से ही जानकारी लेने की बात कह दी है। इसमें अब इस मामले की जांच के लिए पोद्दार की ओर से उच्चाधिकािरयों को पत्र लिखा है।

50 करोड़ की है अचल संपत्ति

यूआईटी ने समिति की जिस जमीन को निम्न आय वर्ग की बताकर छोड़ा है, उस समिति पर करीब 50 करोड़ रुपए की अचल संपत्ति है। खास बात यह है कि समिति का प्रतिवर्ष करीब एक करोड़ रुपए का कारोबार है। ऐसे में भरतपुर जिला खादी ग्रामोदय समिति को न्यास की ओर से निम्न आय वर्ग का मानकर इस भूमि को योजना से युक्त करना संदेह उत्पन्न करता है।

फैक्ट फाइल

- 21 अप्रेल 2003 को भूमाफिया अभियान की बैठक में समिति की इस भूमि को सिवायचक दर्ज किया गया।

- छह जून 2003 को समिति की ओर से इस भूमि को आवासीय प्रयोजनार्थ भू उपयोग परिवर्तन के लिए दिए आवेदन को निरस्त किया गया।

- सात जनवरी 2005 को समिति की यह भूमि प्रस्तावित योजना संख्या 13 में आती है।

- 10 जनवरी 2008 को समिति की इस भूमि को खादी ग्रामोदय के निम्न आय वर्ग के होने के कारण भूमि को योजना में शामिल नहीं किया गया।

-इनका कहना है

मैं इस मामले में जानकारी करके ही बता सकता हूं।

- केके गोयल, कार्यवाहक सचिव यूआइटी

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