>>: 9 दिन से मंत्रालयिक कर्मचारियों का महापड़ाव जारी, महंगाई राहत शिविरों के कामकाज हो सकते हैं प्रभावित

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जयपुर। राज्य की गहलोत सरकार की ओर से प्रदेश में सोमवार से आमजन को राहत देने के लिए शुरू किए गए महंगाई राहत कैंप की सफलता को लेकर अब संशय बना हुआ है। दरअसल इसके पीछे वजह मंत्रालयिक कर्मचारियों चल रहा महापड़ाव भी है। प्रदेश भर में 50 हजार से ज्यादा मंत्रालयिक कर्मचारी पिछले 9 दिनों से महापड़ाव डालकर बैठे हैं।

राजधानी जयपुर के मानसरोवर में मंत्रालयिक कर्मचारियों का महापड़ाव जारी है, महंगाई राहत शिविरों के आगाज के बीच ही मंत्रालयिक कर्मचारी ने साफ कर दिया कि जब तक सरकार हमारी मांगे नहीं मानती तब तक हमारा महापड़ाव जारी रहेगा। इधर मंत्रालयिक कर्मचारियों के महापड़ाव के चलते महंगाई राहत शिविरों के कामकाज पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।


मंत्रालयिक कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष राज सिंह चौधरी ने बताया गहलोत सरकार ने आमजन को राहत देने के लिए महंगाई राहत कैंप शुरू किए हैं। वहीं दूसरी ओर इन कैंपों को सफल बनाने वाले मंत्रालयिक कर्मचारी पिछले 9 दिनों से अपनी मांगों को लेकर महापड़ाव डाले हुए हैं। बावजूद इसके सरकार हमारी मांग नहीं सुन रही है, उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने हमारी मांगे नहीं मानी तो महंगाई राहत कैंप का बहिष्कार किया जाएगा, किसी भी जिले में महंगाई राहत कैंप सरकारी कर्मचारियों का सहयोग नहीं होगा।


सरकार का कोई प्रतिनिधि बातचीत को नहीं आया
महासंघ के अध्यक्ष राज सिंह चौधरी ने बताया कि पिछले 9 दिन से हमारा महापड़ाव चल रहा है लेकिन सरकार का कोई प्रतिनिधि हमसे बातचीत के लिए नहीं आया जिसे लेकर भी कर्मचारियों में रोष है। हम लंबे समय से सरकार से अपनी मांगों के समाधान की मांग कर रहे हैं पिछले 4 साल से सरकार को कई बार ज्ञापन, अनशन क्रमिक, अनशन और धरने-प्रदर्शनों के जरिए अपनी मांगें उठाई हैं लेकिन सरकार हमारी मांगों को अनसुना कर रही है जिसके चलते अब मजबूरन हमें महापड़ाव का सहारा लेना पड़ा है। उन्होंने बताया कि 10 अप्रेल से मंत्रालियक कमर्चारी सामूहिक अवकाश पर चल रहे थे तो वहीं उसके बाद 17 अप्रेल से जयपुर के मानसरोवर में मंत्रालयिक कर्मचारियों का महापड़ाव चल रहा है।

इन स्थानों पर भी चल रहा है महापड़ाव
राज सिंह चौधरी ने बताया कि प्रदेश के सभी 33 जिलों और सभी उपखंड मुख्यालयों में जयपुर सहित 50 विभागों के मंत्रालयिक कर्मचारी महापड़ाव डाले हुए हैं जिसमें जिला कलेक्टर कार्यालय, उपखंड कार्यालय, पंचायती राज विभाग, पंचायत समितियों, जिला परिषद, परिवहन विभाग, वाणिज्य कर विभाग, पंजीयन मुद्रांक विभाग, आबकारी और राजस्व विभाग के कर्मचारी भी शामिल हैं।

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