>>: मांग रहे थे तबादले, अब निभानी होगी शिविर की जिम्मेदारी

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जैसलमेर. महंगाई से प्रदेशवासियों को राहत दिलाने के लिए महंगाई राहत कैम्प में शिक्षकों की भागीदारी करने को लेकर विरोध के स्वर मुखर होने लग गए हैं। बताया जा रहा है कि 10 योजनाओं में एक भी योजना शिक्षा विभाग से संबंधित नहीं है, ऐसे में इन शिविरों में शिक्षकों को लगाना उनके गले नहीं उतर रहा। गौरतलब है कि शिविर प्रशासन गांव के संग अभियान के हर शिविर में महंगाई राहत कैंप के विशेष काउंटर लगाए जाएंगे और गांव के संग अभियान के तहत 11283 ग्राम पंचायतों और शहरों के संग अभियान में 7500 वार्ड में वार्डवार महंगाई राहत शिविर लगेंगे। इनके अलावा 2000 स्थायी शिविर लगेंगेए जो कि 24 अप्रेल से 30 जून तक संचालित रहेंगे। यह स्थायी महंगाई राहत कैम्प सरकारी अस्पतालए गैस एजेंसीए बस स्टैंडए ग्रामपंचायत मुख्यालय आदि पर लगाए जा सकेंगे। उधर विभाग का तर्क है कि राज्य सरकार के आदेश की पालना करवा रहे हैं।
..इसलिए मुखर हो रहे विरोध के स्वर
शिक्षा विभाग में अधिकांश शिक्षक दूर-दराज जिलों में लगे हुए हैं और पिछले कई सालों से तबादले नही होने के कारण उन्हें अपने घर जाने का मौका केवल ग्रीष्मकाल और शीतकालीन अवकाश में ही मिलता है। शिक्षक संघ से जुड़े प्रतिनिधि बताते हैं कि वर्षों से सरहदी जिले व दूरस्थ गांवों में ड्यूटी दे रहे बाहरी जिलों के शिक्षक, तबादले को लेकर चिंतित है। वे लंबे समय से अपने गृह जिले में स्थानांंतरण की मांग भी कर रहे थे। इन दिनों शिक्षक अपने विद्यालय में कई प्रकार की परीक्षाओं का आयोजन कर रहे थेए साथ ही 30 अप्रेल तक उन्हें परीक्षा परिणाम भी जारी करना है। यही हीं अधिकांश शिक्षकों के पास माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की कक्षा 10वीं और 12वीं की अभ्यास पुस्तिकाएं जांचने का कार्य भी आवंटित हो चुका है। राजस्थान शिक्षक और पंचायतीराज कर्मचारी संघ का तर्क यह भी है कि शिक्षा पूर्ण रुप से नि:शुल्क है, निरूशुल्क ही गणवेश मिलती है। पाठ्य पुस्तकें भी नि:शुल्क ही मिल रही है। ऐसे में शिक्षको को मंहगाई राहत कैम्प में शामिल करना उचित नहीं है। यह राजस्व विभाग का कार्य है और राजस्व विभाग के अधीन शिक्षकों को लगाना गलत भी है।
शिक्षकों का तर्क-
-सभी कार्यालय और विभाग में फाइव-डे वीक है। विद्यालय में शनिवार को भी कार्यदिवस होता है।
-जैसलमेर, बाड़मेर में अधिकांश शिक्षक अलवर भरतपुर करौली गंगानगर आदि जिलों के है।
-ये शिक्षक शीतकालीन और ग्रीष्मकालीन अवकाश के समय ही अपने गांव जाते हैं।

यह उचित नहीं, करेंंगे विरोध
महंगाई राहत कैम्प में शिक्षकों की ड्यूटी लगाना दुर्भावना पूर्ण निर्णय है। हमारे शिक्षक दूर-दराज अभावग्रस्त इलाको में सेवा दे रहे हैं और हमे केवल ये ही अवकाश मिलते है उस पर भी साजिश की तहत पाबंदी अन्यायपूर्ण है। हम विरोध करेंगे।
-प्रकाश विश्नोई, प्रदेश उपाध्यक्ष, राजस्थान शिक्षक एवं पंचायतीराज कर्मचारी संघ

सरकार के निर्देशानुसार लगाए शिक्षक
जिले में संचालित होने वाले प्रशासन गांवों और शहरों के संग अभियान शिविरों में सम्बंधित पीईईओ और पंचायत सहायकों को राज्य सरकार के निर्देशानुसार लगाया गया है। इन शिविरों में शिक्षा विभाग की भी हेल्प डेस्क होती है।
-एनआर जाणी, मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी, जैसलमेर

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