>>: अब आवारा पशुओं से मिलेगी निजात, नंदीशाला में नंदियों को मिलेगा पूरा अनुदान

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भरतपुर. सडक़ एवं खेतों में घूमने वाले आवारा नंदियों से अब छुटकारा मिलेगा, क्योंकि सरकार अब सिर्फ नौ महीने नहीं अपितु पूरा वर्ष अर्थात जब तक नंदी शाला में रहेंगे तब तक नंदियों को अनुदान मिलता रहेगा। इतना ही नहीं, अपितु अब नंदीशाला के नियमों में भी बदलाव किया गया है, जिससे कोई भी नंदीशाला खोल सकता है। फिलहाल जिले में एक ही नंदीशाला है।
अभी तक नंदीशाला में रहने वाले नंदियों को सिर्फ नौ महीने तक अनुदान दिया जाता था। छोटे नंदी (3 वर्ष से कम के) को 20 रुपए और बड़े नंदी (3 वर्ष से ऊपर के) को 40 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से दिया जाता था। लेकिन अब सरकार ने बजट में घोषणा की है कि नंदीशाला में रहने वाले सभी नंदियों को पूरा अनुदान दिया जाएगा। तब तक नंदी शाला में रहेंगे तक तक छोटे को 20 एवं बढ़े को 40 रुपए प्रति दिन के हिसाब दिया जाएगा। फिलहाल जिले में रुंध इकरण में है, जहां फिलहाल सवा पांच सौ नंदी हैं।
ब्लॉक स्तर पर खुलेंगी नंदीशाला
पशुपालन संभाग के अतिरिक्त निदेशक डॉ. नगेश चौधरी के अनुसार अवारा नंदियों से निजात दिलाने के लिए अब ब्लॉक स्तर पर भी नंदीशाला खोली जाएंगी, जिससे सडक़ एवं फसलों में घूमने वाले नंदियों से निजात मिलेगी। जिले में फिलहाल एक ही नंदीशाला है। अब ब्लॉक स्तर पर सेवर, कुम्हेर, डीग, कामां, सीकरी, पहाड़ी, नगर, नदबई, भुसावर, वैर, बयाना, रूपवास एवं उच्चैन में नंदीशाला खोलने की योजना है। इसके लिए नियमों में भी फेरबदल किया गया है। पहले 20 बीघे जमीन पर नंदी शाला खोली जाती थी, लेकिन अब 10 बीघे में भी नंदीशाला खोलने पर सरकार की ओर से डेढ़ करोड़ रुपए का अनुदान दिया जाता है।
नंदीशाला में होने चाहिए 100 नंदी
जिला स्तर की नंदीशाला में 500 नंदी होने चाहिए, जबकि ब्लॉक स्तर की नंदीशाला में 100 नंदी होने चाहिए। इससे कम होने पर संचालक की ओर से लिखित में देना होगा कि कोई क्षेत्र में कोई नंदी सडक़ पर नहीं घूम रहा है। तब ही मान्य होगा।
जिले में 14 गोशाला कार्यरत
जिले में 14 गोशाला कार्यरत हैं, जिनमें भरतपुर में दो, डीग में दो, कामां में चार, नगर में दो, भुसावर में दो, बयाना में एक और रूपवास में एक गोशाला है।

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