>>: बच्चों को पढ़ाई के साथ कमाई की राह दिखाएंगे स्कूल

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एक्सक्लूसिव

नागौर. सरकारी स्कूलों में पढ़ाई के साथ नागौर के अधिकाधिक बच्चों को व्यावसायिक शिक्षा में निपुण करने की राह और आसान हो गई है। मुख्यालय के रतन बहन व कांकरिया स्कूल समेत जिले के करीब तीन दर्जन स्कूलों को व्यावसायिक शिक्षा के लिए भी हरी झण्डी दी गई है। अलग-अलग ट्रेड के अनुसार यहां लैब तो बनेगी ही प्रशिक्षित होने के बाद जॉब फेयर के माध्यम से बच्चों का भविष्य भी संवरेगा। खास बात यह है कि कुछ स्कूलों में पढ़ाई छोड़ चुके बच्चों को भी इस रोजगारोन्मुखी कार्यक्रम से जोड़ा जाएगा।

सूत्रों के अनुसार अभी जिले के 27 स्कूलों में व्यावसायिक पाठ्यक्रम की शिक्षा दी जा रही है। इसमें पांचौड़ी के एक स्कूल में स्टार प्रोजेक्ट के तहत शिक्षा छोड़ चुके बच्चों को भी रोजगार से जोड़ने के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है। हाल ही में वर्ष 2023-24 के लिए राज्यभर के 1081 स्कूलों को व्यावसायिक शिक्षा/पाठ्यक्रम से जोडऩे की स्वीकृति मिली है। इसके तहत नवीं से बारहवी तक हर कक्षा के 40-40 बच्चों को इससे जोड़ा जाएगा। भले ही इसके नंबर से प्रतिशत अथवा फेल/पास प्रभावित न हो पर इस व्यावसायिक शिक्षा के अतिरिक्त विषय की परीक्षा देनी होगी। इन स्कूलों में पांच लाख की लागत से लैब बनेगी तो शिक्षा देने के लिए एक इंस्ट्रक्टर/प्रशिक्षक तैनात होगा। समग्र शिक्षा अभियान के तहत इसे आम शिक्षा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।

सूत्रों का कहना है कि पहले से चल रहे 27 स्कूलों में जहां व्यावसायिक शिक्षा के तहत दो ट्रेड हैं, वहीं इस बार यह एक ही है। स्कूलों में इस शिक्षा का अलग पीरियड होगा। इस शिक्षा को वैसे तो नवीं से शुरू किया जा रहा है, लेकिन छठी से आठवीं तक के बच्चों को भी इन लैब/शिक्षा की विजिट कराई जाएगी, ताकि इनकी समझ बढ़े। वैसे भी नई शिक्षा नीति के तहत व्यावसायिक शिक्षा कक्षा छठी से चालू होने वाली है।

जिलेभर के इन स्कूलों को मिली स्वीकृति

मुख्यालय के रतनबहन, कांकरिया, गोगेलाव के माणकचंद बोथरा, डीडवाना के बांगौर , लाडनूं, मकराना, जोधियासी, भकरी, लिचाना, चितावा, पीपलाद, शेरनी आबाद, सथेरण, गठिलासर, नावां, रेण, करणू, दौलतपुरा, बिदियाद, लूणवा, नारवा कलां, चावंडिया, बोरावड, डेगाना, तिलानेस समेत तीन दर्जन स्कूलों में इस सत्र से व्यावसायिक शिक्षा रोजगार के लिए अलख जगाएगी।

आधुनिक रंग में रंगी व्यावसायिक शिक्षा

सूत्र बताते हैं कि स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों का रोजगार की दिशा में मार्ग प्रशस्त करने के एवज में इसे शुरू किया गया है। पहले तो कुछ खास विषय ही थे, जिनके साथ अब नए जमाने को जोड़ा जा रहा है। अब बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विस, इंश्योरेंस, फूड प्रोसेसिंग, इलेक्टॉनिक एण्ड हार्डवेयर, ब्यूटी थैरेपिस्ट, ब्यूटी एण्ड वैलनेस, टेलिकॉम, कंस्ट्रक्शन,रिटेल, फर्निशिंग आदि को प्राथमिकता दी गई है। एग्रीकल्चर, प्लम्बर, डेयरी, सिलाई मशीन ऑपरेटर जैसे कई अन्य ट्रेड पहले से ही चलाए जा रहे हैं।

एक तस्वीर यह भी

सूत्र बताते हैं कि हालांकि अभी व्यावसायिक शिक्षा के बेहतर रिजल्ट बड़े पैमाने पर तो नहीं दिख रहे पर इसकी शुरुआत हो चुकी है। कुछ महीनों पहले जोधपुर में हुए जॉब फेयर के तहत इसके सकारात्मक परिणाम दिखाई दिए। असल में गांव हो या शहर, कई परिवार की आर्थिक स्थिति सही नहीं रहती। बच्चों को पढ़ाई के साथ व्यावसायिक शिक्षा के जरिए रोजगार मिल जाता है। इस जॉब फेयर में कई बच्चे लाभान्वित हुए।

इनका कहना

व्यावसायिक शिक्षा के जरिए स्कूली बच्चों के लिए रोजगार का मार्ग प्रशस्त किया जा रहा है। अलग-अलग ट्रेड के तहत बच्चे सीखेंगे तो अब जॉब फेयर के जरिए कई कंपनी इन बच्चों को ना सिर्फ रोजगार देती है, उन्हें ट्रेन्ड करके आगे बढ़ाती है। इससे नागौर जिले के हजारों बच्चों को फायदा होने वाला है।

-बस्तीराम सांगवा, एडीपीसी समग्र शिक्षा, नागौर।

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