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छह माह पूर्व हुए ब्लाइंड मर्डर का राजफाश, मृतक का दोस्त ही निकला हत्यारा Sunday 21 May 2023 10:51 AM UTC+00 सरूपगंज. सरूपगंज पुलिस ने छह माह पूर्व हुई हत्या का शनिवार को खुलासा किया। शुरुआत में ब्लाइंड मर्डर लग रहे इस मामले में मृतक के दोस्त ने ही उसकी हत्या की बात स्वीकारी। इस पर पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया। थाना प्रभारी हरिसिंह राजपुरोहित ने बताया कि भावरी पुलिया के पास छह माह पूर्व एक व्यक्ति की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची थी। लाश की शिनाख्त लालाराम पुत्र जगाराम गमेती भील निवासी अम्बा तलोई पुलिस थाना बेकरीया जिला उदयपुर के रूप में हुई। मृतक के परिजनों का सूचित करने पर उन्होंने हत्या होने की बात कर लाश ले जाने से इनकार कर दिया। मृतक की पत्नी सुगना ने लिखित रिपोर्ट देकर बताया कि मृतक काश्त कुएं पर मजदूरी करता था। 30 नवंबर, 2022 को रोहिड़ा से लुंदारा पाली में मजदूरी के पैसे लेने गया था। इस दौरान लुंदारा गया विजीयाराम कुएं पर आ गया मगर मेरा पति घर पर नहीं आया व दूसरे दिन मेरे पति की लाश सरूपगंज में मिली है। ऐसे में हत्या का संदेह है। इस पर पुलिस ने हत्या का प्रकरण दर्ज कर अनुसंधान शुरू किया। आरोपी विजीयाराम व मृतक लालाराम दोनों एक ही कुएं पर रोहिड़ा में कृषि कार्य करते थे। पुलिस अधीक्षक ममता गुप्ता द्वारा ब्लाइंड मर्डर के प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए त्वरित अनुसंधान कर घटना का खुलासा करने के निर्देश दिए गए। जिस पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बृजेश सोनी, वृत्ताधिकारी पिण्डवाड़ा जेठूसिंह करणोत के सुपरविजन में थाना प्रभारी हरिसिंह राजपुरोहित मय टीम की ओर से अनुसंधान किया गया। मृतक के शव का मेडीकल बोर्ड से पोस्टमार्टम करवाया।ऐसे हुआ खुलासा एफएसएल रिपोर्ट में मृतक की मौत जहर से होना पाया गया। ऐसे में संदिग्ध विजीयाराम पुत्र झालाराम जाति गमेती भील निवासी कम्बोई थाना रोहिड़ा को दस्तयाब कर मनोवैज्ञानिक तरीकों से पूछताछ की गई। इस पर आरोपी ने बताया कि लालाराम किसी अन्य व्यक्ति के साथ मिलकर उसकी पत्नी के साथ अवैध संबंध बनाने की फिराक में था। घटना के दिन मौका पाकर आरोपी ने मृतक लालाराम के साथ शराब पी। इस दौरान शराब में चूहे मारने का जहर मिलाकर पिला दिया। आरोपी ने बिना जहर की शराब पी और जब लालारामा अचेत होने लगा तो उसकी जेब में से पांच हजार रुपए निकालकर मोटरसाइकल लेकर खुद के कृषि कुएं से पहले आम रास्ते पर जाकर सो गया। ताकि लोगों को लगे कि अभियुक्त विजीयाराम भी शराब के नशे में अचेत अवस्था में मिला और मृतक लालाराम ज्यादा शराब पीने से मर गया। |
#SummerVacations छुट्टियों में पसंदीदा डेस्टिनेशन पर जाना है तो पहले देख लें एयर टिकट्स की कीमतें Sunday 21 May 2023 11:21 AM UTC+00 क्या आप भी समर वेकेशंस में किसी हिल स्टेशन घूमने का प्लान कर रहे हैं और फ्लाइट टिकट्स की बुकिंग करा रहे हों तो एक बार फ्लाइट टिकट्स की कीमतें जरूर देख लें। हो सकता है कि इन कीमतों की वजह से आपकाे बजट थोड़ा बढ़ाना पड़ जाए। दरअसल, छुट्टियां होते ही अधिकतर लोग अब परिवार के साथ लोग घूमने-फिरने निकल रहे हैं। यही कारण है कि इन दिनों फ्लाइट्स में फुल ऑक्यूपेंसी चल रही है। उदयपुर के महाराणा प्रताप एयरपोर्ट से भी आने-जाने वाली फ्लाइट्स फुल चल रही हैं। ऐसे में या तो आपको मनपसंद डेस्टिनेशन पर जाने के लिए थोड़ा इंतजार करना पड़ेगा या फिर अधिक कीमत देकर बुकिंग करानी होगी। कुल्लू-मनाली, कश्मीर आदि जगहों पर जाने के लिए एयर टिकट्स महंगे ट्रेवल एजेंट्स के अनुसार इन दिनों किसी भी फ्लाइट में बमुश्किल ही सीट मिल रही है। गर्मी में घूमने का मजा लेने के लिए अधिकतर लोग पहाड़ों का रुख कर रहे हैं। ऐसे में दिल्ली जाने वाली फ्लाइट्स में सबसे अधिक यात्रीभार है। वहीं, दिल्ली से हिल स्टेशंस जैसे कुल्लू-मनाली, कश्मीर आदि जगहों पर जाने के लिए एयर टिकट्स दोगुने दामों में मिल रहे हैं। वहीं, दिसंबर-जनवरी की तुलना में अभी प्रमुख पर्यटन स्थलों के टिकट की कीमत 30-40 फीसदी बढ़ चुकी है। पिछले साल से तुलना की जाए तो फ्लाइट्स के टिकट की कीमतों में सीधा 50 फीसदी तक का इजाफा हो गया है। बढ़ा यात्रीभार वहीं, हाल ही एक एयरलाइंस ने दिवालिया होने के कारण अपनी उड़ानें कई जगहों के लिए बंद कर दी है। ऐसे में जो यात्री इस एयरलाइंस से कहीं के लिए महीनों पहले बुकिंग करा चुके थे, उन्हें अब दूसरी एयरलाइंस पर शिफ्ट होना पड़ रहा है। ऐसे में यात्रीभार इस कारण से भी बढ़ा है। टॉपिक एक्सपर्ट ... इन दिनों कश्मीर, कुल्लू-मनाली जाने की डिमांड सबसे ज्यादा है। ऐसे में दिल्ली से इन जगहों पर जाने के लिए टिकट्स महंगे हो चुके हैं। उदयपुर से दिल्ली तक का किराया तो अब तक सामान्य ही है, लेकिन आने वाले दिनों में ये बढ़ भी सकता है क्योंकि अभी सभी फ्लाइट्स फुल जा रही हैं। - अशोक जोशी, पर्यटन व्यवसायी सस्ती टिकट्स के लिए ये काम करें एक सर्वे के अनुसार वीकेंड के बजाय हमेशा वीक डेज में ट्रेवल का प्लान करें। सोमवार और बुधवार के बीच फ्लाइट की टिकट 12 से 20 प्रतिशत सस्ती होती हैं। रविवार ट्रेवल के लिए सबसे महंगा होता है। यदि आप वीकेंड के बजाय मंगलवार और गुरुवार के बीच टिकट बुक करते हैं तो कीमतें पिछले पांच वर्षों में औसतन केवल 1.9 प्रतिशत सस्ती हुई हैं। अगर यात्रा से कुछ दिन पहले ही टिकट कराएंगे तो वो आपको काफी महंगा पड़ सकती है। हाल ही में हुई एक रिसर्च से पता चला है कि ट्रेवलिंग से 47 दिन पहले फ्लाइट टिकट बुक करने से आपको सबसे सस्ता हवाई किराया हासिल करने में मदद मिलती है। वर्तमान में उदयपुर से यहां-यहां के लिए हैं फ्लाइट्स - दिल्ली के लिए - 5 उड़ानें मुंबई - 4 उड़ानें जयपुर - 1 उड़ान भोपाल - 1 उड़ान इंदौर - 1 उड़ान बेंगलुरू - 1 उड़ान हैदराबाद - 1 उड़ान अहमदाबाद - 1 उड़ान |
महाराणा प्रताप जयंती आज : प्रताप ने युद्धकाल में कहां कहां बनाए ठिकाने, पढि़ए रोचक जानकारी Sunday 21 May 2023 07:15 PM UTC+00 महाराणा प्रताप ने 1585ई में चावण्ड में अपनी राजधानी स्थापित की, लेकिन चावण्ड के समीपवर्ती भूभाग का सर्वेक्षण करने से यह धारणा अधिक बलवती होती है कि संभवतः चावण्ड में आने से पूर्व महाराणा ने मुगलों का सफलतापूर्वक मुकाबला करने के लिए उदयपुर जिला मुख्यालय से 75 किमी की दूरी पर दक्षिण दिशा में बलुआ नामक गांव में स्थित उदैय की पहाडियों को उनकी सामरिक दृष्टि से उपयोगिता को मध्यस्थ रखते हुए अपना युद्धकालीन निवास बनाया होगा. इस बात की पुष्टि उदैय की पहाडियों तक पहुंचने के अति संकरे और दुर्गम मार्ग से होती है। महाराणा का बलुआ ग्राम को युद्धकाल के लिए अपना आवास स्थल बनाने का एक अन्य महत्वपूर्ण कारण इस क्षेत्र के सर्वमान्य और प्रतापी भील सेना नायक जयसिंघ कोटड़िया का होना भी रहा होगा, कोटड़िया एक समृद्ध जमीदार था और,इसके स्वत्व में विशाल उपजाऊ कृषि भूमि के अलावा पर्याप्त पशुधन भी था जो महाराणा केलिए युद्धकाल में सामरिक महत्व रखता था। चावण्ड से दक्षिण-पश्चिम दिशा मेंलगभग आठ किमी की दूरी पर स्थित गांव पाल-लिम्बोदा से भी होती है।यह गांव तीन ओर.से पहाड़ियों से.घिरा हुआ है तथा यह चावण्ड और.उदैय.की पहाडियों के मध्य.स्थित होने से बहुत महत्वपूर्ण रहा होगा तथा युद्धकाल में महाराणा को आवश्यक.सामग्री उपलब्ध.कराने के अलावा.सुरक्षा कीदृष्टि से भी अत्यंत महत्व.का रहा होगा।इसकी पुष्टि.यहां के बुजुर्गों में ब्रचलित.कथाओं.से भी.होती है जिनका सारांश यह.है.कि आज भी इन लोगों के मन-मस्तिष्क में प्रताप के.शौर्यऔर धर्मरक्षक स्वरूप की छवि विद्यमान है। आलेख - प्रो. ललित पांडेय |
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