>>: JagannathRathyatra 80 किलो के रजत रथ पर सवार होकर जगत के नाथ फिर निकलेंगे शहर भ्रमण पर

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JagannathRathyatra जगन्नाथ पुरी की तर्ज पर उदयपुर में निकाली जाने वाली भगवान जगन्नाथ की ऐतिहासिक रथ यात्रा की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। राजस्थान की इस सबसे बड़ी रथ यात्रा के लिए पिछले साल ही विशाल रथ तैयार किया गया था। अब इस रथ के खंडों पर पॉलिश का कार्य चल रहा है। बाद में इसे जगदीश चौक प्रांगण में उतारा जाएगा। गौरतलब है कि इस रथयात्रा का हर साल शहरवासियों को इंतजार रहता है। हजारों की तादाद में श्रद्धालु व पर्यटक रथयात्रा में शामिल होते हैं।

14-15 जून को जगदीश मंदिर प्रांगण में उतारा जाएगा रथ

श्री रथ समिति के अध्यक्ष राजेन्द्र श्रीमाली ने बताया कि जब रथयात्रा की शुरुआत हुई थी, तब जो रथ उतारा गया था, वही रथ फिर से तैयार कर के पिछले साल उतारा गया। इस बार उसी रथ के खंडों पर पॉलिशिंग की जा रही है। बाद में सभी खंडों को जोड़कर रजत रथ तैयार किया जाएगा। रथ के 58 खंड हैं, जिन पर 6 कारीगर पॉलिशिंग का कार्य कर रहे हैं। पूरे रथ पर 80 किलो चांदी चढ़ाई गई है। वहीं रथ के साथ सिंहासन, लवाजमा आदि को मिला कुल 112 किलो चांदी है। गोपाल सुथार ने सागवान की लकड़ी का रथ बनाया है और राजकुमार, महेश व कमल आदि कारीगरों ने चांदी चढ़ाने का काम किया है। रथ को 14-15 जून तक जगदीश चौक प्रांगण में उतारा जाएगा।

कोरोना काल में 2 साल नहीं निकल पाई थी रथयात्रा

कोरोना काल के दो साल ऐसे रहे जब रथ यात्रा का आयोजन नहीं हो पाया। साल 2022 में फिर से रथयात्रा धूमधाम से निकाली गई। इस रथ को बनाने में भी दो साल लग गए। वर्ष 2002 में बना रथ क्षतिग्रस्त हो चुका था, उसी तर्ज पर सागवान की लकड़ी से नया रथ बनाया गया। रथ 8 फीट चौड़ा, 16 फीट लंबा और 21 फीट ऊंचा है, जिसका कुल वजन 30 टन है। रथ को भक्तगण रस्सी से खींचकर भगवान को नगर भ्रमण कराएंगे।

368 साल पुरानी है रथ यात्रा की परंपरा

यहां भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा की परंपरा 368 साल पुरानी है। पहले भगवान को मंदिर परिसर में ही परिक्रमा करवाई जाती थी, लेकिन अब भगवान जगन्नाथ स्वयं भक्तों को दर्शन देने के लिए नगर भ्रमण पर निकलते हैं। भगवान जगन्नाथ का नया रजत रथ अत्याधुनिक तकनीक से युक्त है।

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