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video---नागौर जिले में एक आश्रम ऐसा भी जहां 350 साल से चल रहा है भण्डारा Wednesday 24 May 2023 06:55 AM UTC+00 अणदाराम विश्नोई लगती है पंगत प्रसादी हर दिन एक क्विंटल से अधिक बाजरा की खपत 3 से 5 क्विंटल ईंधन की खपत झोली भिक्षा से हुई शुरुआत महंत रामनिवास दास महाराज ने बताया कि जोधपुर दरबार की सेना को बाबा सुखराम दास महाराज ने एक झारी से पानी पिलाया था, साथ ही झोली में भिक्षा मांगकर लाए थे। उसी खुरमाराम प्रसाद से पूरी सेना को भोजन कराया, तभी से यहां आगन्तुकों, संन्तो व श्रद्धालुओं को भोजन कराने की परम्परा चल पड़ी। पंगत परम्परा में शाम के समय खीचड़ी और कढ़ी तथा सुबह के समय बाजरे का सोगरा व कढ़ी का प्रसाद मिलता है। भण्डारा के लिए आस-पास के गांवों के किसानों, ग्रामीणों, भक्तों व भामाशाहों की ओर से अनाज भेंट किया जाता है। खुरमा का प्रसाद आकेली बी, सिंधलास व बच्छवारी गांवों से भिक्षा की झोली में आनेवाली रोटियों से बनाया जाता है। उत्सव आदि पर भक्तों की ओर से आश्रम में रसोई देने की परम्परा भी है । ![]() एक झारी से जोधपुर दरबार की पूरी सेना को पानी पिलाने से नाम पड़ा पौ धाम दादूपंथी आश्रम पौ धाम के संस्थापक सुखराम दास महाराज काफी सिद्धपुरुष थे। उन्होंने करीब साढ़े 300 साल पूर्व यहां से गुजर रही जोधपुर दरबार की पूरी सेना को एक ही झारी (तुम्बी) से पानी पिलाया था। उसी कारण आश्रम का नाम पौ धाम पड़ा। महाराज ने यहां पंगत लगाकर सेना को भोजन करवाया था। तब से यहां लगातार पंगत परम्परा चल रही है |
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