>>: VIDEO...निलंबन पर किरकिरी हुई तो प्रदेश के इस जिले में हड़बड़ाई सरकार ने बना दी कमेटी...

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आयुक्त नागौर एवं निलंबित सभापति के खिलाफ शिकायतों की जांच करेगी कमेटी
स्थानीय निकाय क्षेत्रीय उपनिदेशक ने पहली बनी कमेटी निरस्त कर दूसरी नई कमेटी गठित की
कमेटी को सात दिन में तथ्यात्मक रिपोर्ट सौंपने के दिए गए निर्देश

जांच के लिए नगरपरिषद आएगी जांच कमेटी, आयुक्त को आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने के निर्देश


नागौर. सभापति मीतू बोथरा के निलंबन का आधार बनी जांच रिपोर्ट सवालिया निशान लगने पर किरकिरी होने के बाद एक ही दिन में क्षेत्रीय उपनिदेशक की ओर से पहले जिला स्तरीय जांच कमेटी बनाई, फिर बाद में संशोधित आदेश में दूसरी नई जांच कमेटी बना दी। पहली बनी जांच कमेटी में जहां कुचामन, नावां एवं परबतसर के अधिकारी शामिल थे, वहीं दूसरी जांच कमेटी में भीलवाड़ा नगरपरिषद के अधिकारियों को शामिल किया गया है। जांच कमेटी को आयुक्त नागौर एवं निलंबित हुई सभापति मीतू बोथरा के संदर्भ में प्राप्त श्किायतों की तथ्यात्मक जांच कर सात दिन में रिपोर्ट सौंपने के आदेश दिए गए हैं। बताया जा रहा है कि कमेटी को जांच से जुड़े समस्त आवश्यक दस्तावेजों को उपलब्ध कराने के लिए आयुक्त को निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
अब नई कमेटी करेगी जांच
सभापति मीतू बोथरा के निलंबन की रिपोर्ट पर लगातार सवाल उठने के बाद किरकिरी होने पर तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित कर सभी तथ्यों की बारीकी से जांच करने के आदेश दिए गए हैं। क्षेत्रीय उपनिदेशक की ओर से गठित कमेटी में नगरपरिषद भीलवाड़ा के आयुक्त हेमाराम, नगरपरिषद भीलवाड़ा के अधिशासी अभियंता सूर्यप्रकाश संचेती, नगरपरिषद भीलवाड़ा के सहायक लेखाधिकारी द्वितीय हिमांशु सुखवाल को शामिल किया गया है। जबकि इसके पहले गठित हुई कमेटी में नगरपालिका नावां के अधिशासी अधिकारी, शिकेश कांकरिया, नगरपालिका कुचामनसिटी के सहायक लेखाधिकारी द्वितीय राजेन्द्र रेवाड़ एवं नगरपालिका परबतसर के कनिष्ठ अभियंता सुशील यादव को शामिल किया गया था।


नगरपरिषद में आकर जांच करेगी कमेटी
कमेटी को निदेशालय जयपुर से प्राप्त शिकायतों की प्रति एवं आयुक्त नगरपरिषद नागौर से प्राप्त तथ्यात्मक प्रति भेज दी गई है। स्थानीय निकाय क्षेत्रीय उपनिदेशक की ओर से जारी निर्देश प्रपत्र में कमेटी को निर्देशित किया गया है कि वह नागौर नगरपरिषद में जाकर पूरे प्रकरण की जांच करेगी। कमेटी के गठन के साथ ही आयुक्त नागौर को यह भी निर्देशित किया गया है कि कमेटी की आवश्यकतानुसार वह समस्त दस्तावेजों को अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराएंगे। उल्लेखनीय है कि गत 16 मई को नगरपरिषद की सभापति मीतू बोथरा को सभापति एवं सदस्य दोनों से ही स्वायत्त शासन निदेशालय की ओर से निलंबित कर दिया गया था। इसमें हवाला दिया गया था कि जारी किए गए दोनों पट्टों पर स्थगनादेश होने के बाद भी आयुक्त एवं सभापति के हस्ताक्षर से विधि विरुद्ध पट्टे जारी किए गए। जबकि इन्हीं पट्टों के संदर्भ में स्वायत्त शासन निदेशालय के अतिरिक्त राजयकीय अधिवक्ता की ओर से अपनी विधिक राय में पट्टे को सही रूप में कानूनी तरीके से जारी होना बताया गया था। इसके सोथ ही विधि की दृष्टि से इसके लिए नगरपरिषद की ओर से भी गठित की गई कमेटी ने भी पट्टा जारी करना सही बताया था। इसके अलावा शिकायकर्ताओं में इस्लामुद्दीन एवं सरफराज की ओर से इस प्रकरण की कोई भी शिकायत करने से साफ इंकार कर दिया गया था। निलंबन की जांच रिपोर्ट में इन दोनों शिकायकर्ताओं की शिकायत पर हुई जांच के साथ प्राप्त शिकायतों की जांच स्थानीय निकाय क्षेत्रीय उपनिदेशक की ओर कराने पर दोषी सिद्ध होना बताया गया था। इन सारे सवालों को लेकर स्वायत्त शासन निदेशालय की कार्यशैली के साथ उनकी जांच रिपोर्ट पर लगातार सवाल उठ रहे थे। माना जा रहा है कि लगातार हो रही किरकिरी से बचने के लिए यह जांच कमेटी गठित की गई है। ताकि विभाग की ओर से निष्पक्षता का दावा किया जा सके।

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