>>: VIDEO...भद्राकाल के बाद भी आज पंच ग्रहों के महाशुभ योग में बधेगी राखी

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-सात सौ साल बाद आए पंच ग्रहों के महायोग में रक्षाबंधन का शुभ फल बढ़ जाएगा
नागौर. रक्षाबंधन पर इस बार भद्रा का साया रहेगा, लेकिन इसके बाद भी इस बार का रक्षाबंधन पंच ग्रहों के महायोग से बने शुभ संयोगों में मनाया जाएगा। ऐसा संयोग 700 साल के बाद आया है। 30 अगस्त को सूर्य, बुध, गुरु, शुक्र व शनि ग्रह पंच महायोग बना रहे हैं। इन ग्रहों के पंच महायोग से बुधादित्य, वासरपति, गजकेसरी व शश योग का निर्माण हो रहा है। इन योग में खरीदारी व नए कार्य की शुरुआत करना शुभ माना जाता है। रक्षाबंधन पर ग्रहों का यह पंच महायोग तकरीबन 700 साल के बाद बना है। बताते हैं कि इस शुभ योग में राखी बांधने से इसका शुभ फल कई गुना बढ़ जाता है। 30 अगस्त यानि की बुधवार को सुबह 10 बजकर 58 मिनट से रात्रि 9 बजकर 2 मिनट तक भद्राकाल रहेगा। इस अवधि न तो राखी बांधी जा सकती है, और न ही अन्य शुभ कार्य किए जा सकते हैं। ज्योतिषविदों के अनुसार 30 अगस्त की रात्रि 9 बजकर 2 मिनट के बाद से अगले दिन यानि की गुरुवार को सुबह 7 बजकर 5 मिनट तक राखी बांध सकते हैं। हालांकि इसको भी लेकर ज्योतिषविदों में अलग-अलग राय है। कुछ का मानना है कि रक्षाबंधन केवल बुधवार की रात्रि निर्धारित मुहूर्त में ही मनाया जा सकता है, लेकिन कइयों का यह भी कहना है कि ज्योतिष ग्रंथों में कहीं नहीं लिखा कि भद्रा पुच्छ में रक्षाबंधन करें। इसलिए जब भद्रा काल पूरी तरह खत्म हो जाए, तभी राखी बांधनी चाहिए। लोक परंपरा और अलग-अलग मत के चलते अगले दिन सुबह 7 बजकर 5 मिनट तक शुभ मुहूर्त में पूर्णिमा तिथि के दौरान भी रक्षाबंधन किया जा सकता है। पौराणिक कथाओं के मुताबिक भद्रा भगवान सूर्य की कन्या है। जो कि सूर्य की पत्नी छाया से उत्पन्न हुई है। ज्योतिर्विज्ञान के मुताबिक पूर्णिमा तिथि का शुरुआती आधा हिस्सा भद्रा काल होता है।
राखियों से सजे बाजार
रक्षाबंधन के एक दिन पहले शहर के प्रमुख बाजार पूरी तरह से रक्षाबंधन के रंग में नजर आए। नया दरवाजा, सुगन सिंह सर्किल, माही दरवाजा, गांधी चौक, दिल्ली दरवाजा, विजयबल्लभ चौराहा एवं मानासर चौराहा आदि क्षेत्रों में दुकानों पर राखियां सजी नजर आई। पूजन सामग्री की दुकानों पर भी भीड़ रही। इसके साथ ही शहर के ब्यूटीपार्लरों में रक्षाबंधन को लेकर महिलाएं खुद को संवारने में लगी नजर आई।
रक्षाबंधन पर इसका रखें ध्यान
वास्तु के अनुसार, भाई को भूलकर भी उत्तर-पश्चिम दिशा में बैठकर राखी नहीं बांधनी चाहिए. इस दिशा में राखी बांधना अपशकुन होता है। राखी बांधते वक्त बहनों का चेहरा दक्षिण-पश्चिम दिशा की ओर होना चाहिए. जबकि भाइयों को उत्तर-पूर्व दिशा की ओर देखना चाहिए। बाजार में आजकल प्लास्टिक की राखियां भी बिकने लगी हैं. प्लास्टिक को केतु का पदार्थ माना गया है और इसे बदनामी का कारक माना जाता है. इसके अलावा, भाई को टूटी-फूटी या अशुभ चिह्नों वाली राखी बांधने से भी बचना चाहिए. अच्छी राखी न मिलने पर आप कलावा भी बांध सकती हैं। ज्योतिषियों के अनुसार, रक्षाबंधन पर बहन को धारदार या नुकीली चीजें भेंट न करें. छुरी, काटा, आइना या फोटो फ्रेम जैसी चीजें देने से बचाना चाहिए। बहन को रुमाल या जूते-चप्पल भी गिफ्ट नहीं देना चाहिए। ज्योतिष में बुध को बहनों का कारक माना गया है। इसलिए आप इससे जुड़ी चीजें दे सकते हैं। रक्षाबंधन के दिन बहनों को भूलकर भी काले रंग के वस्त्र धारण नहीं करने चाहिए. इनकी जगह लाल-पीले वस्त्र पहनना शुभ होगा।

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