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किसानों में दौड़ी खुशी की लहर: पीपलू के मासी बांध की नहरों में छोडा सिंचाई के लिए पानी Thursday 16 November 2023 02:40 PM UTC+00 तीन नदियों के संगम पर स्थित मासी बांध से सुबह मोरी के वॉल्व खोलकर नहर में पानी छोड़ा गया तो क्षेत्र के किसानों में खुशी की लहर दौड़ गई। इस दौरान मौजूद किसानों ने भगवान देवनारायण के जयकारें लगाएं। जलसंसाधान विभाग के सहायक अभियंता कानाराम गुर्जर, कनिष्ठ अभियंता मुकेश गुर्जर ने बताया कि बुधवार को जल उपयोक्ता संगम चैयरमेन भागचंद गुर्जर, अध्यक्ष रतनलाल चौधरी, हनुमान चौधरी, पंचायत समिति सदस्य रामफूल गुर्जर, सलीम देशवाली, गिर्राज गुर्जर ने विधिवत पूजा अर्चना कर मोरी के वॉल्व खोलते हुए मुख्य नहर में पानी छोड़ा। 5 फीट 7 इंच पानी है मौजूद सहायक अभियंता कानाराम गुर्जर ने बताया कि भराव क्षमता 10 फीट के मुकाबले वर्तमान में 5 फीट 7 इंच पानी है। उन्होंने बताया कि नहर से क्षेत्र के 29 गांवों के कमाण्ड़ क्षेत्र की 6985 हैक्टेयर भूमि ङ्क्षसचित होती है लेकिन इस बार पानी कम होने से आधा क्षेत्र ही कवर होगा। नहर के वॉल्व को शुरुआत में 1 फीट खोलकर पानी छोड़ा गया है। बीसलपुर बांध से 18 नवम्बर से छोड़ा जाएगा पानी किसानों की मांग के बाद फसलों में ङ्क्षसचाई के लिए बीसलपुर बांध से नहरों में पानी छोड़ा जाएगा। इसका निर्णय कलक्ट्रेट सभागार में जल वितरण समिति की बैठक में किया गया। इसमें तय किया गया कि फसलों में ङ्क्षसचाई के लिए 1.586 टीएमसी पानी नहरों में 18 नवम्बर से छोड़ा जाएगा। इसमें 18 नवम्बर को बायीं और 19 नवम्बर को दायीं मुख्य नहर में पानी छोड़ा जाएगा। बैठक की अध्यक्षता कर रहे जिला कलक्टर डॉ. ओमप्रकाश बैरवा ने कहा कि बीसलपुर बांध में इस बार पानी की आवक कम हुई है। किसानों को भी फसलों के लिए पानी की आवश्यकता है। ऐसे में उन्हें पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। सभी किसान आपसी समन्वय बनाकर पानी का उपयोग करे। ताकि टेल तक के किसानों को ङ्क्षसचाई का पानी मिल सके। मानसून की रही कमी बीसलपुर बांध परियोजना के अधीक्षण अभियंता वीएस सागर ने बताया कि इस साल मानसून की कमी रही। बीसलपुर बांध के जलग्रहण क्षेत्र में कम बरसात होने के कारण 10.225 टीएमसी पानी ही आया है। गत 4 अक्टूबर को बीसलपुर बांध का गेज 313.76 मीटर तथा भराव 26.631 है। जो पूर्ण भराव क्षमता का 68 प्रतिशत ही था। दाखिया बांध से छोड़ा पानी दाखिया बांध की नहर में सुबह पूजा अर्चना के बाद पानी छोड़ा गया। इस मौके पर ङ्क्षसचाई खंड के एईएन श्रीपत सोलंकी, जेईएन पूरणमल, जलसंगम समिति अध्यक्ष कालूराम गुर्जर, प्रभुलाल यादव समेत अन्य काश्तकार मौजूद रहे। एईएन ने बताया कि नहर में पानी का प्रवाह जारी रहने से करीब 1618 हैक्टेयर भूमि ङ्क्षसचित होती है। उन्होंने बताया कि रबी फसल की ङ्क्षसचाई की आवश्यकता को देखते हुए बीते दिनों हुई जल वितरण समिति की बैठक में दाखिया बांध की नहर में पानी छोडऩे का निर्णय किया था। इसके तहत बांध परियोजना के अधिकारियों ने पूजा के बाद ङ्क्षसचाई के लिए पानी छोड़ा। नहर के माध्यम से करीमपुरा, अरनियानील, मेहंदवास, मालियों की झोपडिय़ा, नवाबपुरा आदि गांवों की कृषि भूमि की ङ्क्षसचाई होती रही है। |
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