बच्चों को रखें सोशल मीडिया से दूर
पहले रश्मिका मंदाना का डीपफेक वीडियो वायरल हुआ फिर कुछ अन्य सेलेब्रिटीज के वीडियो भी इसी प्रकार के वायरल होने के मामले सामने आए। जिसे लेकर तमाम तरह की चर्चाएं भी हुईं, ऐसे में अब सभी जानना चाहते हैं कि डीपफेक वीडियो आखिर क्या है और इससे कैसे बचा जाए। साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट सचिन वर्मा ने हमें इस बारे में विस्तार से दी कई महत्त्वपूर्ण जानकारी-
पेरेंट्स को कर रहे ब्लैकमेल
इस तकनीक के दुरुपयोग हो रहा है। इंदौर में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहां क्रिमिनल सोशल मीडिया से छोटे बच्चों की फोटो और उनके वीडियो चुरा रहे हैं और एआई के जरिए उनके एडल्ट वीडियो बनाकर पेरेंट्स को भेज रहे हैं। इसमें पेरेंट्स को कहा जा रहा है कि जब आपका बेटा या बेटी १८ साल की होगी तब वह ऐसी नजर आएंगे/आएंगी जैसे कि इस वीडियो या फोटो में हैं। इस तरह क्रिमिनल्स पेरेंट्स को ब्लैकमेल कर रहे हैं।
ऐसे करें बचाव
डीपफेक से बचाव के लिए सोशल मीडिया प्राइवेसी सेटिंग्स में बदलाव करना जरूरी है। सोशल मीडिया अकाउंट पर अपनी या अपने बच्चों की कोई भी पिक्चर या वीडियो पब्लिक नहीं करें। किसी भी अनजान व्यक्ति की फ्रेंडशिप रिक्वेस्ट एक्सेप्ट करने से बचें। अतिरिक्त सुरक्षा के लिए मजबूत और यूनिक पासवर्ड का उपयोग करें। साथ ही अधिक सुरक्षा के लिए टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन को चालू करना भी बेहद जरूरी है। जिससे हम ऐसे किसी भी परेशानी में फंसने से बच सकते हैं।
ऐसे करें वीडियो की पहचान
वीडियोज में अननेचुरल फेशियल एक्सप्रेशन को देखकर, ऑडियो-वीडियो में लिप सिंक्रनाइज को ऑब्र्जव करके और आंखों की ब्लिंकिंग को ध्यान से देखकर।
वीडियो में चल रहे ऑडियो की टोन, वॉइस चिप में हो रहे बदलाव को देखकर यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि वीडियो फेक है अथवा नहीं।
वीडियो के बैकग्राउंड या सराउंडिंग, ब्लर वीडियो, बैकग्राउंड लाइट में होने वाले ब्लिंक्स को देखकर।
वीडियो में मौजूद स्टेटमेंट के साथ ही आप यह भी देख सकते हैं कि वह वीडियो के व्यक्ति से मेल खाता है अथवा नहीं।
अगर यह सभी तकनीक अपनाने के बाद भी आपके पास किसी भी प्रकार का डीपफेक कंटेट कोई भेजता है तो इसकी जानकारी तुरंत पुलिस और साइबर क्राइम सेल को दें।-