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राजस्थान की इस कॉलेज में सफेद मार्बल पर र्स्वण चित्रों से उकेरी भगवद् गीता Sunday 24 December 2023 05:28 AM UTC+00 फतेहपुर कस्बे की रायबहादुर गोरखराम रामप्रताप चमड़िया कॉलेज पुस्तकालय में संगमरमर पर लिखे गीता के पाठ विद्यार्थियों को बड़ा संदेश दे रहे हैं। कस्बे के नामी सेठ रायबहादुर गीगराज रामप्रताप चमडिया ने सन 1940-42 में चमडिया स्कूल, काँलेज,संस्कृत कालेज की स्थापना की थी। विद्यार्थी जीवन से छात्र का धर्म और कर्म का महत्व समझ में आए और वो इस मर्म को अपने जीवन में ढाल कर प्रगति पथ पर अग्रसर हो सके। इसी भाव के साथ उन्होंने चमडिया काँलेज के वाचनालय की दीवारों पर सफेद संगमरमर पर पूरी गीता का प्रकाशन कराया था। गीता के सभी 18 अध्याय इसमें लिखे गए है। इसके साथ ही संगमरमर के पत्थरों पर श्रीकृष्ण-अर्जुन और महाभारत से संबंधित अनेक चित्र भी बने हुए है। इनमें से भी अधिकांश चित्र सोने के झोल से बनें हुए है। र्स्वणयुक्त चित्रों की सुनहरी आभा पूरे हाँल को आध्यात्मिक और धार्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत कर देती है। चमडिया कालेज के परिसर में प्रवेश करते ही ,आपको सबसे पहले इस हाँल से गुजरना होता है। इसे वाचनालय का रूप दिया गया है। दो मंजिला पूरा पुस्तकालय एक हाँल के रूप में है। हाँल में संगमरमर के पत्थरों पर गीता लिखी होंने के कारण इसे गीता हाँल के नाम से पुकारा जाता है। विद्यार्थियों की सुविधा के लिए हर अध्याय की समाप्ति के बाद उसका सारांश हिंदी में लिखा है।
इनका कहना है. गीता हाँल में दीवारों पर संगमरमर के पत्थरों पर सम्पूर्ण गीता लिखी है और अनेक र्स्वण नक्काशीयुक्त चित्र बने हुए है। गीता हाँल में प्रवेश करते ही एक अद्भुत आध्यात्मिक ऊर्जा का शरीर में संचरण होंने लगता है और चित्त को शांति मिलती है।
डाॅ. संजू भास्कर, प्रिंसिपल, सेठ जीआर चमडिया पीजी कालेज, फतेहपुर |
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