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कहीं पायलट को राजस्थान से बाहर करना कांग्रेस को ना पड़ जाए भारी, हारकर भी गहलोत ने दिखाया अपना जलवा, यहां जानें Sunday 24 December 2023 04:23 AM UTC+00 कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने खुद के कार्यकाल में संगठन में पहला बड़ा फेरबदल किया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने अपनी टीम में 12 महासचिवों और 12 प्रदेश प्रभारियों की नियुक्ति की है। खरगे ने अपनी नई टीम में प्रियंका गांधी को यूपी से मुक्त कर बिना प्रभार के महासचिव रखा गया है, वहीं सचिन पायलट को महासचिव बनाकर छत्तीसगढ़ का प्रभारी नियुक्त किया है। दरअसल लोकसभा चुनाव की तैयरी में जुटी पार्टी अपने संगठन को चुस्त-दुरुस्त कर रही है। इस बीच राजनीति के जानकारों का कहना है कि अगर कांग्रेस राजस्थान में पायलट को रखकर लोकसभा चुनाव की तैयारियां करतीं तो यकीनन उन्हें फायदा मिलता, लेकिन उन्हें छत्तीसगढ़ भेजना कहीं कांग्रेस को आगामी लोकसभा चुनाव में भारी न पड़ जाए। इस बीच पांच साल राजस्थान में अशोक गहलोत और पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के बीच चले मतभेद के बाद आखिरकार पायलट के राष्ट्रीय सियासत में कदम बढ़ गए हैं। हालांकि वे स्टार प्रचारक के तौर कर कई राज्यों में चुनाव प्रचार कर चुके हैं, लेकिन औपचारिक रूप से छत्तीसगढ़ राज्य की जिम्मेदारी अब मिली है। उनके सामने छत्तीसगढ़ की गुटबाजी समाप्त कर लोकसभा चुनाव में जीत दिलाने की चुनौती है। इस बीच लोकप्रिय चेहरे और युवा नेता पायलट को राजस्थान से बाहर निकाले जाने के कई मायने लगाए जा रहे हैं। हालांकि राजस्थान चुनाव में कांग्रेस को मिली करारी हार के बाद माना जा रहा था कि प्रदेश की राजनीति में पायलट का कद बढ़ सकता है, लेकिन आलाकमान के इस फैसले से साफ हो चला है कि राजस्थान में गहलोत की ही चलेगी। दरअसल गहलोत और पायलट के बीच विवाद किसी से छिपा नहीं है। गहलोत कई बार कह चुके हैं कि पायलट कभी भी राजस्थान के मुख्यमंत्री नहीं बन सकते हैं। ऐसे में पायलट के छत्तीसगढ़ का प्रभारी बनने के बाद साफ हो गया है कि राजस्थान में अब भी गहलोत का ही पलड़ा भारी है। यह भी पढ़ें- Rajasthan BJP: मंत्रिमंडल बनने से पहले भजनलाल सरकार ने तैयार किया ये बड़ा प्लान इस बीच हाल ही हुई विधानसभा चुनाव में सचिन पायलट के रहते हुए गुर्जरों का वोटबैंक कांग्रेस से खिसककर बीजेपी की ओर चला गया था। इस चुनाव में कांग्रेस को गुर्जर बाहुल्य इलाकों में महज 19 सीटों पर जीत मिली है, जबकि 2018 के चुनाव में कांग्रेस को 29 सीटें मिलीं थीं। यानी कुल 10 सीटों का नुकसान। ऐसे में यह भी माना जा रहा है कि इस वजह से भी पायलट को राजस्थान से निकालकर छत्तीसगढ़ की कमान सौंपी गई। यह भी पढ़ें- सीएम भजनलाल शर्मा की घोषणा, राजस्थान की 11.24 लाख महिलाओं को मिलेगा लखपति दीदी योजना का लाभ |
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