>>: जैसलमेर-बाड़मेर जिलों में पेयजल आपूर्ति पर गिरी 'बिजली'

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हाड़ कम्पाने वाली सर्दी के मौसम में इस बार जैसलमेर और पड़ोसी बाड़मेर शहरों सहित दोनों जिलों के सैकड़ों गांवों के कुल लाखों बाशिंदों को पीने के पानी की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। अनियमित और गुणवत्ताविहीन बिजली की आपूर्ति से यह निराशाजनक हालात बने हैं। पत्रिका पड़ताल में यह बात सामने आई है कि मोहनगढ़ स्थित इंदिरा गांधी नहर परियोजना पर आधारित जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के परियोजना शाखा के हैडवक्र्स की डिग्गी में पानी तो उपलब्ध है लेकिन बिजली की बार-बार होने वाली कटौती और वांछित वॉल्टेज से कम वॉल्टेज से विद्युत आपूर्ति के कारण हैडवक्र्स की मशीनरी सुचारू ढंग से नहीं चल पा रही है। इसके चलते 48 घंटों के अंतराल में की जाने वाली जलापूर्ति कहीं 72 तो कहीं 96 और 120 घंटों के अंतराल तक पहुंच गई है। ऐसे समय में शहरी व नजदीकी ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को सैकड़ों रुपए खर्च कर टैंकर खरीदने की मजबूरी है तो दूरस्थ क्षेत्र के गांवों में लोगों को दूरदराज से पानी ढोकर लाने की मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है। पानी की कमी का बहुत बुरा असर गोवंश सहित अन्य पशुधन पर भी पड़ रहा है।

हकीकत : 400 गांवाें की पानी को लेकर निर्भरता, समाधान अब तक नहीं

जैसलमेर और बाड़मेर शहर व इन दोनों जिलों के करीब 400 गांवों की आबादी पीने के पानी के लिए मुख्यत: मोहनगढ़ हैडवक्र्स पर निर्भर करती है। इस हैडवक्र्स पर बिजली की कई-कई घंटों की कटौती और कम वॉल्टेज से आपूर्ति की समस्या पिछले महीने की 17-18 तारीख से शुरू हुई। जिसका समाधान विभागीय जिम्मेदार अब तक नहीं कर पाए हैं। बताया जाता है कि बीच के कुछ दिनों में बिजली आपूर्ति काफी हद तक सही हुई थी लेकिन यह स्थायी नहीं है। हालिया समय में दिन में कई बार मोहनगढ़ हैडवक्र्स पर कम वॉल्टेज से बिजली आपूर्ति हो रही थी। जानकार सूत्रों ने बताया कि हैडवक्र्स की उच्च क्षमता वाली पम्प मशीनरी को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए 6600 वॉल्ट की बिजली चाहिए जबकि वहां कभी 5800, कभी 6000 तो कभी 6100 वॉल्ट का करंट आता है। जानकारी के अनुसार 6000 वॉल्ट से कम शक्ति की बिजली आने से मशीनरी को बंद करनी पड़ती है क्योंकि वह इससे सही ढंग से काम नहीं कर सकती और उसके खराब होने की भी आशंका रहती है। इस बीच यह भी जानकारी मिली है कि वर्तमान में इंदिरा गांधी नहर में पर्याप्त पानी उपलब्ध है और मोहनगढ़ हैडवक्र्स की डिग्गी में भी 6 मीटर तक पानी है। जो कई दिनों तक दोनों शहरों व 400 गांवों के साथ सैन्य परिसरों की प्यास बुझाने के लिए पर्याप्त है।

जिम्मेदार हाथ खड़े कर रहे

इस समस्या का समाधान स्थानीय स्तर के डिस्कॉम के अधिकारी नहीं कर पा रहे हैं। बताया जाता है कि वे हाथ खड़े कर रहे हैं कि उनके हाथ में नहीं है। दरअसल, इन दिनों खरीफ की फसलों को पानी पिलाने का यह सीजन है। ऐसे में किसानों के हिस्से की बिजली काटना मुमकिन नहीं है। दूसरी ओर क्षेत्र में विगत दिनों से कोहरे की मार का असर सौर ऊर्जा और तेज सर्दी से पवन ऊर्जा उत्पादन ेमें भी कमी आई है। ऐसे में बिजली की कमी को दूर करने के लिए सरकार स्तर से उपाय किए जाने की दरकार है। वह अभी तक हो नहीं पा रहा है। इस संबंध में बाड़मेर जिला कलक्टर ने ऊर्जा सचिव को पत्र लिखा है। गत दिनों जैसलमेर में आयोजित दिशा की बैठक में केंद्रीय मंत्री गजेंद्रसिंह शेखावत सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने बिजली-पानी की समस्या को लेकर संबंधित अधिकारियों को आड़े हाथों लिया था।

 

सुधार के लिए पुरजोर प्रयास

जिले में पीने के पानी और बिजली आपूर्ति व्यवस्था में सुधार के लिए प्रशासन पूर्णतया प्रयासरत है। विभागीय अधिकारियों को लगातार दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैं और मोनीटरिंग की जा रही है। बिजली की आपूर्ति में सुधार के लिए राज्य सरकार के स्तर पर भी प्रयास किए जाएंगे।

- प्रतापसिंह, जिला कलक्टर, जैसलमेर

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