>>: स्वच्छता सर्वेक्षण में फिसड्डी: इस वजह से सफाई में फेल हो गए नगर निगम उत्तर और दक्षिण

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स्वच्छ भारत मिशन के तहत हुए स्वच्छता सर्वेक्षण 2023 में जोधपुर के दोनों ही नगर निगम देशभर में टॉप 200 में भी जगह नहीं बना सके। स्वच्छता सर्वेक्षण में उत्तर और दक्षिण नगर निगम फिसड्डी साबित हुए। स्थिति यह है कि जोधपुर राजस्थान में भी नंबर एक पर नहीं आ सका, जबकि दोनों ही नगर निगम ने राजस्थान में पहले नंबर पर आने का दावा किया था, लेकिन सर्टिफिकेशन के गारबेज फ्री सिटी में दोनों ही नगर निगम क्वालिफाई तक नहीं कर पाए, क्योंकि वेस्ट प्रोसेस यूनिट के तहत जितना कार्य होना चाहिए वो नहीं हो रहा। इसके चलते दोनों को इसमें रेटिंग नहीं मिली।

जोधपुर में ही दोनों नगर निगम में दक्षिण की स्थिति उत्तर से बेहतर रही। राजस्थान में ही दक्षिण चौथे पायदान पर है, जबकि उत्तर 12वें स्थान पर है। दक्षिण का सर्विस प्रोग्रेस लेवल बेहतर रहा, इसी में उसे उत्तर से 723 अंक ज्यादा मिले। इसके अलावा सिटीजन वॉयस में भी दक्षिण को 105 नंबर उत्तर नगर निगम से ज्यादा मिले हैं। जबकि सर्टिफिकेशन में 150 अंक दक्षिण को ज्यादा मिले।

साल 2022 के स्वच्छता सर्वेक्षण के दौरान राजस्थान में पहली रैंक हासिल करने वाला नगर निगम दक्षिण इस बार तीन पायदान नीचे उतर गया। जोधपुर दक्षिण नगर निगम को इस बार चौथी रैंक हासिल हुई जबकि पूरे देश में 210वां स्थान ही हासिल कर पाया। इधर, निगम उत्तर भी पिछली बार 5वीं रैंक पर था, लेकिन इस बार रैंकिंग में पिछड़ा और राजस्थान में 12वें स्थान पर आया है। जबकि देश में 298वें स्थान पर रहा है।

20 करोड़ रुपए खर्च, फिर भी बेहाल
गत वित्तीय वर्ष में नगर निगम ने अपने कोटे से शहर की सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए तकरीबन 20 करोड़ रुपए खर्च कर दिए, लेकिन फिर भी शहर में कचरे के ढेर लगे रहते है। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि आखिर निगम ने करोड़ों रुपए कहां खर्च कर दिए हैं। जिसका नतीजा न तो शहर की जनता को मिला और न ही स्वच्छता सर्वेक्षण में हमारी रैंकिंग को सुधार पाया। नतीजा, देश में हमारे दोनों ही निगम की रैंकिंग पहले 100 साफ शहरों में नहीं हो रही है।

सर्वेक्षण टीम ने इन मानकों पर किया सर्वे
सर्विस लेवल प्रोग्रेस में प्रतिदिन सफाई, डोर टू डोर कचरा संग्रहण, कचरा निस्तारण, बॉयो माइनिंग सहित अन्य चीजों को परखा गया। सिटिजन वॉइस में शहर के सीनियर सिटिजन और यूथ की राय ली गई। पब्लिक एंग्जमेंट, ब्रांड एंबेसेडर, सुलभ शौचालयों स्थिति, इनोवेशन, पब्लिक इवेंट, पोर्टल, पब्लिक टायलेट, फ्लाईओवर, नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम सहित कच्ची बस्तियों में सफाई को जांचा गया।

जी-20 समिट की खूबसूरती भी रही बेअसर
जोधपुर शहर में 2 से 4 फरवरी तक जी-20 शिखर सम्मेलन हुआ। इस दौरान शहर की रंगत ही बदल गई। सडक़ों व दीवारों पर चित्रकारी हुई। एयरपोर्ट से लेकर सर्किट हाउस और मेहरानगढ़ और मंडोर तक की सभी सडक़ों को चमकाया गया, बावजूद इसके निगम स्वच्छता सर्वेक्षण में अपनी जगह पहले पायदान पर नहीं बना सका।

नगर निगम दक्षिण
9500 में से मिले 4106 अंक मिले
1- सर्विसलेवल प्रोग्रेेस में 4830 में से 2106 अंक मिले
2- सर्टिफिकेशन में 2500 में से 875 अंक मिले
3- सिटीजन वॉयस में 2170 में से 1125 अंक मिले

नगर निगम उत्तर
9500 में से मिले 3128 अंक
1-सर्विसलेवल प्रोग्रेस में 4830 में से 1383 अंक मिले
2-सर्टिफिकेशन में 2500 में से 725 अंक मिले
3- सिटीजन वॉयस में 2170 में से 1020 अंक मिले

वर्ष 2022-23 में उत्तर नगर निगम ने खर्च किए 9 करोड़ 94 लाख
डोर टू डोर : 4 करोड़ 65 लाख 60 हजार (इसमें कई पुराने बिल भी शामिल)
टायलेट : 8 लाख 40 हजार
वॉल पेंटिंग : 20 लाख
सीवेज : 2 करोड़ (2 रोड स्वीपिंग मशीन की खरीद)
सफाई : करीब 3 करोड़ (इसमें सफाईकर्मियों का वेतन शामिल)

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वर्ष 2022-23 में दक्षिण नगर निगम ने खर्च किए 10 करोड़ 13 लाख
डोर टू डोर : 3 करोड़ 60 लाख
टायलेट : 45 लाख
वॉल पेंटिंग : 8 लाख
सीवेज : 3 करोड़ (2 रोड स्वीपिंग मशीन की खरीद व एक सुपर शक्कसन मशीन)

सफाई : करीब 3 करोड़ (इसमें सफाईकर्मियों का वेतन शामिल)

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