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सांभर झील में बन रहे देश के पहले ट्रायल ट्रेक के लिए 120 करोड़ रुपए आवंटित Sunday 04 February 2024 10:53 AM UTC+00 नावां शहर (नगौर). सांभर झील में अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जर्मनी की तर्ज पर देश का पहला रेलवे टेस्ट ट्रैक का कार्य इस वर्ष पूरा हो सकता है। आम बजट के साथ पेश किए गए रेल बजट में इस बार प्रदेश में सात हजार करोड़ रुपए की चार बड़ी रेल परियोजनाओं को रफ्तार मिलेगी। लेकिन नावां के सांभर झील में बन रहे रेलवे टेस्ट ट्रैक के अंतिम दौर में चल रहे विकास कार्यों को निर्धारित समय में पूरा करने पर जोर दिया है। जिसमें से नावां क्षेत्र में बन रहे देश के पहले रेलवे ट्रेक गुढ़ा ठठाना- मीठड़ी के लिए १२० करोड़ रुपए बजट आवंटित किया है। साथ ही फुलेरा से डेगाना के बीच दोहरीकरण के लिए २४० करोड़ रुपए भी आवंटित किए हैं। सांभर झील में रेलवे 25 किमी लंबा अत्याधुनिक टेस्ट ट्रैक बिछाने का कार्य कर रहा है। सांभर झील में से गुढ़ा से ठठाना मीठड़ी स्टेशन होकर गुजरने वाले इस टेस्ट ट्रैक पर हाई स्पीड और रेगुलर ट्रेनों का ट्रायल होगा। वहीं लोकोमोटिव और कोच के अलावा इस ट्रैक को हाई एक्सल लोड वैगन के ट्रायल के लिए भी इस्तेमाल में लाया जाएगा। रेलवे की तकनीकी जरूरतों को पूरा करने वाले एकमात्र अनुसंधान संगठन रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड ऑर्गेनाइजेशन (आरडीएसओ) ने इसके लिए कवायद शुरू कर दी है। ट्रेनों की रफ्तार में होगा इजाफा सांभर झील में बन रहे ऐतिहासिक रेलवे ट्रेक से देश की ट्रेनों में काफी बदलाव नजर आएगा। विश्वस्तरीय ट्रेक बनने के बाद भारतीय ट्रेनें हवा में बातें करती नजर आएंगी। जानकारी के अनुसार देश में इस समय किसी भी ट्रेन के लिए ट्रेक नहीं है। जिसके कारण हमारे देश की ट्रेनों की रफ्तार अन्य देशों की तुलना में कम है। इस ट्रैक के बाद ट्रायल से रफ्तार में काफी इजाफा आएगा। इसके साथ ही अनेक देशों की ट्रेनों को भी यहां पर दौडऩे का मौका मिलेगा। बताया जा रहा है कि यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट है। इसी वर्ष इस प्रोजेक्ट पर कार्य पूरा हो सकता है। गुढ़ा से ठठाना-मीठड़ी का चयन क्यों इस परियोजना के लिए गुढ़ा-ठठाना- मीठड़ी को चुनने के पीछे बड़ा कारण यह है कि इस दूरी के बीच पुरानी मीटर गेज लाइन दबी है जिसका उपयोग किया जा सकेगा। इस दूरी में रेलवे की भूमि पहले से है इसलिए अधिग्रहण करने की जरूरत नहीं होगी। वहीं टेस्ट ट्रैक के लिए प्रयोगशाला, आवास, वर्कशॉप आदि के लिए पर्याप्त भूमि भी उपलब्ध है। ऐसा ट्रैक अभी विदेशों में अमेरिका, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, चीन आदि देशों में टेस्ट ट्रैक का इस्तेमाल किया जाता है, जबकि भारत में अभी मौजूदा लाइनों पर ही टेस्ट करते हैं। लेकिन अब हमारे देश में टेस्ट ट्रैक बनने के बाद अन्य देशों को भी मौका मिल सकता है। |
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