>>: ना बचे पौधे और ना ही तारबंदी, 30 हजार पौधे लगाने का था ठेका

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नगर विकास न्यास भीलवाड़ा को शहर में वायु प्रदूषण घटाने तथा सौन्दर्यीकरण बढ़ाने के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर पौधारोपण करना था, लेकिन जहां पौधे लगाने के दावे किए जा रहे है, वहां केवल झाड़ियां लगी है। तारबंदी टूट चुकी है। मवेशी पौधों को नष्ट कर चुके है।


न्यास ने हरणी महादेव रोड, स्मृति वन के बाहर, मुख्यमंत्री जन आवास योजना, आटूण, रिंग रोड समेत अन्य क्षेत्र में 30 हजार पौधे लगाने के टेंडर किए। न्यास ने ठेकेदार के सामने शर्त रखी पौधों की ग्रोथ के अनुसार ही भुगतान होगा। अगर पौधों ने ग्रोथ नहीं की तो भुगतान अटक जाएगा। उसके अनुसार ही न्यास ने कार्ययोजना बनाई। पौधे लगाने का काम मानसून से चल रहा है लेकिन मौके पर पौधे नहीं दिखते। कई जगह तारबंदी भी उखड़ चुकी है।

कमेटी ने किया था निरीक्षण
न्यास अधिकारियों को शिकायत मिलने पर कमेटी बनाकर मौका मुआयना किया। इसमें पाया कि तारबंदी कई जगह उखड़ चुकी है। इस कारण मवेशी पौधों को क्षति पहुंचा रहे थे। पार्क में लगाए अधिकांश पौधे देखरेख के अभाव में मर गए। पौधों की देखभाल के लिए कोई चौकीदार नहीं मिला। अधिकारियों का कहना है कि आटूण क्षेत्र में लोगों ने अतिक्रमण कर रखे हैं। इसके चलते पौधे लगाए थे, वे भी लोगों ने तोड़ दिए। फैसिंग जगह-जगह तोड़ दी गई है। इस कारण मवेशी पौधों को खा चुकी है। इसके लिए ठेकेदार को पाबंद किया है कि वे पुन: फैसिंग करके पौधे लगाए।
ठेकेदार को दिए नोटिस
पौधारोपण में लापरवाही के चलते ठेकेदार को दो बार नोटिस दिए। उसे एक रुपए का भुगतान नहीं किया है। तीन साल की देखरेख व पौधा जीवित होने पर ही भुगतान करने का प्रावधान है।
-रफीक मोहम्मद, उद्यान शाखा, नगर विकास न्यास

जवाबदेही तय करें
शहर में पौधे लगाने के लिए तत्कालीन जिला कलक्टर को पत्र लिखा। मेरे सुझाव पर ही उन्होंने पौधे जीवित रहने पर भुगतान की शर्त रखी थी। अधिकांश जगह पर पौधे लगे ही नहीं जो लगाए, वे भी मौके पर नहीं है। यह केवल पैसों की बर्बादी है।
बाबूलाल जाजू, पर्यावरणविद भीलवाड़ा

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