>>: भीलवाड़ा को बजट से आस: टेक्सटाइल पार्क को मिले जमीन, सस्ती करें बिजली

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राज्य में 8 फरवरी को आने वाले बजट को लेकर भीलवाड़ा के टेक्सटाइल व माइनिंग सेक्टर को बड़ी उम्मीदें है। शनिवार को राजस्थान पत्रिका कार्यालय में बजट को लेकर उद्यमियों व औद्योगिक संगठन प्रतिनिधियों के साथ टॉक शो रखा गया। इसमें मुख्य रूप से टेक्सटाइल पार्क के लिए जमीन का चयन होने पर जोर दिया गया ताकि कपड़ा उद्योग को पंख लग सके। राजस्थान पत्रिका के भीलवाड़ा संस्करण के संपादकीय प्रभारी अनिल सिंह चौहान ने अतिथियों का स्वागत किया।

 

चर्चा में उभरे प्रमुख मुद्दे
- टेक्सटाइल पार्क के लिए जमीन का चयन हो।
- राजस्थान भूमि जल बोर्ड का गठन हो।
- नए औद्योगिक क्षेत्र का सृजन हो।
- सौर ऊर्जा प्लांट लगाने की छूट मिले।
- बिजली की दर कम व क्वालिटी तथा निर्बाध आपूर्ति मिले।
- सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम।
- टेक्सटाइल एवं ऑयल उद्योग को कंटीन्युअस उद्योग माना जाए।
- सिरेमिक जॉन की घोषणा हो।

ये बोले उद्यमी
टेक्सटाइल उद्योग को रियायती दर पर बिजली मिले। 2 रुपए प्रति यूनिट का अनुदान मिले। कार्ययोजना में टेक्सटाइल पार्क के लिए जमीन चयन का मुद्दा जोड़ा है। रूपाहेली के पास मैमू कोच फैक्ट्री के लिए चयनित जमीन पार्क के लिए आरक्षित करे।
आरके जैन, महासचिव मेवाड़ चैम्बर ऑफ काॅमर्स

उद्योग को बढ़ावा देने के लिए औद्योगिक नीति बनाएं। नीति के साथ बजट मिले। भीलवाड़ा को ध्यान में रखकर नीति बने। रिप्स नीति अच्छी थी लेकिन लगातार नहीं चलने से सभी को लाभ नहीं मिला।
सुमित जागेटिया, सह सचिव मेवाड़ चैम्बर ऑफ काॅमर्स

नए उद्योग लगाने के लिए रीको के पास जमीन नहीं है। रीको की मुनाफाखोरी के चलते भीलवाड़ा में नए उद्योग समूहों को जमीन मिलने में दिक्कत आ रही है। जमीन नियमों में संशोधन हो।
शंभूप्रसाद काबरा, अध्यक्ष लद्यु उद्योग भारती

ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा की सुविधाएं नहीं है। सभी को शिक्षा मिले, इस पर ध्यान देना चाहिए। महिलाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए टेक्सटाइल सेक्टर में प्रशिक्षण से जोड़ना चाहिए।
विमला मुणोत, प्रांतीय सदस्य लद्यु उद्योग भारती

महिलाओं को आगे लाने तथा उद्योग से जोड़ने की योजना बनानी चाहिए। महिलाओं को ऋण अनुदान, केपिटल सब्सिडी मिले इसके प्रावधान होने चाहिए।
पल्लवी लढ्ढा, अध्यक्ष महिला इकाई लद्यु उद्योग भारती

रेडिमेड गारमेन्टस उद्योग को बढ़ावा देने की योजना बनाएं। बिजली सस्ती व जमीन की कमी दूर करें। इसके लिए नीति बनाएं। महिलाओं के लिए प्रशिक्षण केंद्र खोले।
गणेश मालू, उद्यमी

भीलवाड़ा में कच्चा माल खूब है। रेडिमेड गारमेंट्स क्लस्टर बने तो भीलवाड़ा आगे बढ़ेगा। रेडिमेड के लिए कुशल कारीगरों की कमी है। सरकारी मदद मिले तो इस क्षेत्र में काफी संभावना है।
प्रकाश शर्मा, अध्यक्ष गारमेंट्स मेन्युफैक्चर्स सोसायटी

उद्योगों को बिजली पूरी नहीं मिल रही है। सोलर पांवर प्लांट लगाने की सुविधा मिले। सोलर से 40 पैसा प्रति यूनिट ड्यूटी हटनी चाहिए। उद्योग को फ्री हैंड सोलर प्लांट लगाने की स्वीकृति मिले।
अजय मून्दड़ा, प्रान्तीय सदस्य लद्यु उद्योग भारती

जीएसटी के बाद लागू एमनेस्टी स्कीम में खामियां है। रिटर्न में चूक पर पेनल्टी निकाली है। राशि वर्षों से बकाया है। केन्द्र की तरह राज्य सरकार को भी राहत मिले ताकि व्यापारियों के बकाया राशि के प्रकरण से राहत मिल सके।
अतुल सोमानी, सदस्य टैक्स बार एसोसिएशन

भीलवाड़ा वर्ष 2012 से डार्क जोन में है, लेकिन अब 8 से 10 फीट पर पानी आ रहा है। भूमिगत जलस्त्रोत से रोक हटे। घोषणा के बाद भी भूजल बोर्ड का गठन नहीं हुआ। रूग्ण इकाइयों में उत्पाद बदलने की छूट मिले तो हजारों उद्योग पुनर्जीवित होंगे।
प्रेम स्वरूप गर्ग, वरिष्ठ उपाध्यक्ष भीलवाड़ा टेक्सटाइल ट्रेड फेडरेशन

जिला उद्योग केन्द्र व रीको उद्योगों को जमीन देते हैं, लेकिन दोनों की कार्यशैली में अंतर है। दोनों में समानता हो तो उद्योगों को राहत मिल सकेगी।
कमलेश मुणोत, सचिव लद्यु उद्योग भारती

अधिवक्ताओं के लिए योजना बनानी चाहिए। वकीलों के लिए चैम्बर के लिए जगह मिले। ताकि वह एक जगह बैठकर काम कर सके।
विशाल गुप्ता, अधिवक्ता

भीलवाड़ा बजरी, ग्रेनाइट, सैंड स्टोन का हब है। एनओसी समय पर नहीं मिलने से अवैध खनन बढ़ता है। बजरी की लीज नहीं होने से करोड़ों रुपए के प्रोजेक्ट अटके हैं। रोजगार नहीं मिल रहा है। खनन नीति बननी चाहिए।
मनीष बहेडि़या, महासचिव भीलवाड़ा जिला व्यापार महासंघ

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