>>: वायरल के साथ मम्पस का वार, प्रदेश स्तर पर अलर्ट जारी

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बदलते मौसम में वायरल के साथ अब मम्पस रोग के मरीज तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। मम्पस रोग के बढ़ने के कारण चिकित्सा विभाग की चिंता बढ़ गई और विभाग ने समय रहते रोग पर काबू करने के लिए गुरुवार को प्रदेश के सभी सीएमएचओ और पीएमओ के लिए मम्पस रोग के मरीजों को चिन्हित करने और गाइडलाइन के अनुसार उपचार करने के निर्देश दिए हैं। अकेले कल्याण अस्पताल की ईएनटी ओपीडी में रोजाना 70 से ज्यादा मरीज अकेले मम्पस रोग के आ रहे हैं। वहीं जनाना अस्पताल सहित निजी अस्पतालों का आंकड़ा जोड़ा जाए तो यह संख्या रोजाना ढाई सौ मरीजों तक पहुंच गई है।
इसलिए चिंता
प्रतिरोधक क्षमता कम होने के कारण वायरल डीजिज मम्पस का संक्रमण बच्चों में ज्यादा होता है। वहीं आगामी दिनों में नया शिक्षा सत्र शुरू होने के साथ ही इस रोग के तेजी से फैलने की चिंता है। बच्चों को इस रोग से बचाने के लिए आठ माह से चार-पांच तक बच्चों को खसरा, मम्पस और रूबेला का टीका लगाया जाता है। अच्छी बात है कि सही और समय पर इलाज लेने पर 8 से 10 दिन में ये रोग ठीक हो जाता है।
मरीजों को दोहरा दर्द
चिकित्सकों के अनुसार मम्पस रोग के शुरूआती लक्षण में मरीज को हल्का बुखार, थकान, सिरदर्द और कम भूख की शिकायत होती है। जिसके लिए वह पहले मेडिसिन विभाग में जाता है। जहां उसे वायरल के उपचार में काम आने वाले दवा दे दी जाती है। तीन-चार तक लक्षण कम नहीं होने के साथ ही मरीज के गाल और जबड़े के दोनों तरफ दर्द और सूजन आती है उसे ईएनटी विभाग में जाना पड़ता है।
बॉडी को रखें हाइड्रेट
मम्पस के मामलों में बढ़ोतरी का मुख्य कारण टीकाकरण दर में कमी है। बचपन में लगवाए जाने वाले एमएमआर (मीजल्स, मम्पस, रुबेला ) टीके से मम्पस का बचाव होता है। बीमार व्यक्ति को पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ पिलाकर बॉडी को हाइड्रेट रखें और खाने के लिए नरम आहार दें। साथ ही सूजन कम करने के लिए बर्फ का सेक करे या चिकित्सक की दवाएं लें।

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