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शहरों की ओर रोकना होगा पलायन...गांवों की पूंजी गांवों पर ही खर्च होनी चाहिए Thursday 04 April 2024 06:14 AM UTC+00 - राजस्थान पत्रिका व अल्ट्राटेक सीमेंट के यशस्वी सरपंच सम्मान समारोह में पेनलिस्ट ने कहीं ये बातें - बोले- पंचायत राजनीतिक की पहली सीढ़ी, इसे चढ़ने में महिलाएं सफल, समय-समय पर ट्रेनिंग जरूरी गांवों से आबादी का पलायन शहरों की ओर हो रहा है। ये पलायन अच्छा संकेत नहीं है। गांवों में ही असली भारत है और वहीं पर बसना चाहिए। ऐसे में गांवों का विकास भी जरूरी है, ये तभी हो पाएगा जब पलायन शहरों की ओर रुकेगा। ये बातें देश के नंबर-1 सीमेंट अल्ट्राटेक और राजस्थान पत्रिका की अनूठी पहल यशस्वी सरपंच के अलवर जोन के सम्मान समारोह में पेनलिस्ट ने कही। पैनल डिस्कशन का विषय क्या ग्रामीणों में नई आशा और विश्वास पैदा कर सकती है पंचायती राज व्यवस्था, रहा। पेनलिस्ट ने कहा, गांवों की पूंजी गांवों पर ही खर्च होनी चाहिए। टैक्स जुटेगा तो विकास कार्यों पर खर्च होगा। गांव चमकेंगे तो देश आगे बढ़ेगा। पेनलिस्ट सदस्यों में यूआईटी अलवर से सेवानिवृत्त अधीक्षण अभियंता धर्मेंद्र शर्मा, सेवानिवृत्त कार्यवाहक प्राचार्य बाबू शोभाराम महाविद्यालय अलवर जीवन सिंह मानवी व वरिष्ठ इतिहासकार हरिशंकर गोयल रहे। पेश है उनसे बातचीत के अंश- सवाल : गांवों के लोग पंचायती राज की आवश्यकता और महत्व को पूरी तरह नहीं समझ पा रहे? उनके सामने कौनसी रुकावटें आ रही हैं? सवाल : पंचायती राज में दलगत राजनीति हावी हो रही है। राजनीतिक दलों का पंचायतों में हस्तक्षेप इसका बड़ा कारण तो नहीं? सवाल : पंचायतें सरकारी अनुदान पर निर्भर हैं। अपनी आय के साधन जुटाने में अभी उन्हें सफलता पूरी तरह नहीं मिल पा रही है? सवाल : पंचायती राज की सफलता में राजनीतिक जागरुकता की कमी भी एक महत्वपूर्ण समस्या है? सवाल : महिला आरक्षण अर्थहीन लगने लगा है? सरपंच या प्रधानपति गांवों की सरकारें चलाते हैं? ऐसे में अन्य महिलाएं राजनीतिक रूप से आगे नहीं बढ़ पातीं? |
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