>>: आम आदमी के सफर पर ग्रहण...धड़ाधड़ बंद हो रही बसें...रोडवेज का सफर नसीब में नहीं

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पाली/फालना. यात्रियों का भरोसा आज भी रोडवेज पर कायम है, लेकिन आम आदमी के सफर पर ग्रहण लग रहा है। यात्रियों के अनुपात में बसों की संख्या बेहद कम है। इसमें भी अनुबंधित बसोें का अनुबंध खत्म होने से यात्रियों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। जिले में बसों के कई रूट बंद हो चुके है। अगले कुछ महीनों में कुछ मार्ग बंद होने के कगार पर है। जिले में दो रोडवेज डिपो हैं। दोनों ही बसों की भारी कमी से जूझ रहे हैं।

फालना में बंद हुई 15 अनुबंधित बसें

पश्चिमी राजस्थान के करीब 50 वर्ष से अधिक पुराने रोडवेज आगार इन दिनों अनुबंधित बसें बंद होने व रोडवेज की बसों की कमी से बंद होने के कगार पर है। वर्तमान में आगार से चल रही बसें भी अवधिपार हैं। नाकारा बसों के सहारे विभिन्न मार्गों पर बसे संचालित हो रही हैं। हाल ही में जोधपुर से तैयार होकर 2 बसें फालना आगार को मिली है। उसमें यात्रा करने वाले यात्री जान जोखिम में डालकर यात्रा करने पर मजबूर है।

फालना: यहां चार साल से नहीं मिली बसें

सरकार ने फालना आगार से 15 अनुबंधित बसों को हटा दिया है। इससे अधिकतर प्रमुख मार्ग बंद है। करीब 12 वर्ष पुरानी अवधि पार 17 व दो 2020 की बसों के सहारे यात्रियों का सफर चल रहा है। यहां 4 साल में नई बसें नहीं मिली। फालना से पूर्व में सुमेरपुर, शिवगंज, सिरोही, पाली, राजसमंद, उदयपुर, बाड़मेर, जैसलमेर, बांसवाड़ा, जयपुर, दिल्ली, अहमदाबाद, सूरत, नाकोड़ा, सोनाणा परशुराम महादेव जोधपुर, फलोदी, मंदसौर, रतलाम, बीकानेर जैसे प्रमुख मार्गों पर बसों का संचालन होता था। बसों के अभाव में 68 मार्गों के स्थान पर मात्र 19 मार्गों पर ही बसें संचालित हो रही हैं। अनुबंधित बसों के हटने से डिपो की आय करीब 2 करोड रुपए से घटकर 40 लाख रुपए रह गई है।

पाली : कभी चलती थी सौ बसें, अब सिर्फ 41

पाली रोडवेज डिपो में कभी सौ बसें चलती थीं। कोरोना के दौरान भी 70 बसों का संचालन हो रहा था। अब घटकर यह संख्या 41 तक पहुंच गई है। इसमें भी अगले महीनों में 13 अनुबंधित बसें बंद हो जाएगी। इससे रोडवेज और यात्रियों के सामने संकट खड़ा हो गया है। पाली डिपो से वर्तमान में 64 रूट का शेड्यूल है। इसके लिए 66 बसों की जरूरत है। पाली में प्रतिदिन करीब साढ़े चार हजार का यात्री भार है और 8 लाख से ज्यादा प्रतिदिन की आय हो रही है। बसों की कमी से यात्रीभार और राजस्व में भी नुकसान होगा। बसों की कमी के कारण कई मार्ग बंद पड़े हैं। ग्रामीणों को रोडवेज का सफर नसीब नहीं हो रहा है।

निजी बसें और जीपें ही सहारा, मनमानी बढ़ी

रोडवेज की बसें बंद होने से ग्रामीणों और शहरवासियों के लिए निजी बसें और जीपें ही सहारा है। छोटे गांवों में ये भी नसीब नहीं हो रही। कई जगह दो-तीन गुना किराया चुकाना पड़ रहा है। निजी बसों और जीपों की मनमानी भी बढ़ गई है।

हां, बसों की कमी है

बसों की कमी है। अनुबंधित बसें भी अगले महीनों में बंद हो जाएगी। इससे यातायात व्यवस्था प्रभावित होगी। वर्तमान में पाली में 41 बसें संचालित है। इसमें से 13 बसें अनुबंधित है।

मोहन मीणा, डिपो प्रबंधक, पाली

घटाने पड़े शेड्यूल

बसों और परिचालकों के अभाव में बस के शेड्यूल घटाने पड़े हैं। अनुबंधित 15 बसों को हटा दिया गया है। रोडवेज की मात्र 19 बसे हैं। 15 परिचालक हैं।

कृष्णपालसिंह, मुख्य आगार प्रबंधक, रोडवेज फालना

खत्म हो गए टेंडर

टेंडर खत्म होने से अनुबंधित बसें हटाई गई है। शीघ्र रोडवेज डिपो को बसें मिले, इसके लिए विधायक ने सरकार को पत्र लिखा हैं ।

जगदीश चौधरी, सरपंच

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