>>: Impact news-रेप पीडि़ता देगी परीक्षा, स्कूल की होगी मान्यता रद्द

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अजमेर. राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने 12वीं की परीक्षा से वंचित रही रेप पीडि़ता का प्रवेश पत्र स्कूल में भेजा था, लेकिन स्कूल प्रबंधन ने ना तो पीडि़ता को बुलाया, ना परिजन या शिक्षा बोर्ड प्रशासन को सूचना दी।यही नहीं प्रिंसिपल ने परिजन या पीडि़ता के प्रार्थना पत्र के बगैर उसकी टीसी भी काट दी। यह खुलासा जिला शिक्षा अधिकारी की जांच रिपोर्ट में हुआ है। जांच रिपोर्ट में स्कूल प्रबंधन की घोर लापरवाही मानते हुए स्कूल की मान्यता रद्द करने की अनुशंसा की गई है।
जिला शिक्षा अधिकारी अनिल कुमार जोशी व जांच दल ने जिला विधिक प्राधिकरण व निदेशालय को भेजी जांच रिपोर्ट में घटना को सही पाया है। रिपोर्ट में आया कि माशिबो की ओर से भेजा गया परीक्षार्थी (पीडि़ता) का प्रवेश पत्र संस्था को मिला, लेकिन यह छात्रा या अभिभावकों को नहीं दिया। इससे छात्रा बोर्ड परीक्षा से वंचित रह गई। स्कूल प्रशासन को ऐसी परिस्थिति में बोर्ड या संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी को अवगत कराना था, लेकिन ऐसी कोई कार्रवाई नहीं की गई। बल्कि बिना प्रार्थना-पत्र पीडि़ता की टीसी काटकर दे दी गई। इससे छात्रा की पढ़ाई बाधित हुई। इस तरह की घटना की पुनरावृत्ति नहीं हो इसे ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार से स्कूल की मान्यता रद्द करने की अनुशंसा की गई है।

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नियम-प्रक्रिया का उल्लंघन
जांच दल ने पीडि़ता, प्रिंसिपल, कक्षा अध्यापक, परीक्षा प्रभारी की ओर से दिए दस्तावेज की पड़ताल में पाया कि पीडि़ता (छात्रा) 27 अक्टूबर से 17 दिसम्बर 2023 तक गैरहाजिर रही तो उसके परिजन को इस संबंध में ना पत्र, मैसेज या सूचना ही दी। उन्हें सूचित किए बिना स्कूल स्तर पर नाम पृथक (काट) दिया। यह विभागीय नियम और प्रक्रिया का उल्लंघन है।

प्रिंसिपल, उसके पति ने रोका
पड़ताल में आया कि बलात्कार पीडि़ता अक्टूबर में स्कूल गई तो न केवल प्रिंसिपल अनिता पांडे बल्कि उसके पति अजयपाल ने उसे स्कूल आने से रोका और घर भेज दिया। उसकी टीसी जारी करना भी पीडि़ता के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। स्कूल प्रबंधन की कार्यवाही शिक्षा विभाग के मापदंड व प्रक्रिया के विपरीत है।

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पूरक या ओपन बोर्ड में देगी परीक्षा

राजस्थान पत्रिका में शृखलाबद्ध समाचार प्रकाशन के बाद शिक्षा निदेशालय ने पीडि़ता को माशिबो की पूरक परीक्षा या जून में होने वाली राजस्थान ओपन बोर्ड परीक्षा में सम्मिलित करने का निर्णय किया है। माध्यमिक शिक्षा विभाग बीकानेर के निदेशक आशीष मोदी ने प्रकरण में शिक्षा बोर्ड को पूरक परीक्षा के नियम देखने के निर्देश दिए हैं।

पत्रिका की खबर का असर
पत्रिका में 4 अप्रेल के अंक में प्रकाशित 'रेप पीडि़ता को स्कूल आने से रोका, बगैर बताए नाम काटा' शीर्षक से प्रकाशित खबर पर जिला विधिक प्राधिकरण अध्यक्ष व जिला एवं सत्र न्यायाधीश संगीता शर्मा, सचिव व अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश रामपाल जाट ने संज्ञान लिया। मामले में जिला बाल कल्याण समिति अध्यक्ष अंजली शर्मा व सदस्यों ने प्राधिकरण सचिव से मुलाकात की। प्राधिकरण ने जिला कलक्टर, एसपी, जिला शिक्षा अधिकारी से प्रकरण में जांच रिपोर्ट मांगी। पैरालीगल वॉलेंटियर को पीडि़ता को यथासम्भव कानूनी सहायता व पीडि़त प्रतिकर स्कीम में आर्थिक मदद के दस्तावेज तैयार करने के आदेश दिए।

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संवेदनशील बने स्कूल प्रशासन

जिला विधिक प्राधिकरण के सचिव व एडीजे रामपाल जाट ने कहा कि स्कूल जाने वाली बालिका यौनशोषण का शिकार हो जाती हैं तो कई बार लोकलाज के कारण उनका स्कूल छूट जाता है और वे शिक्षा से वंचित रह जाती हैं। ऐसी स्थिति में स्कूल प्रशासन व अभिभावकों को सामंजस्य रखते हुए संवेदनशीलता बरतने की जरूरत है। यह तो एकमात्र प्रकरण है वरना ना जाने कितनी बालिकाएं शिक्षा से वंचित रह जाती हैं।

कार्रवाई एक पर, सबक सबको

रेप पीडि़ता के साथ स्कूल प्रबंधन ने गैर जिम्मेदाराना रवैया अपनाया। शिक्षा विभाग को स्कूल पर सख्ती से कार्रवाई करनी होगी। कार्रवाई एक विद्यालय पर होगी, लेकिन सबक सबको मिलेगा।

- अंजली शर्मा, अध्यक्ष, सीडब्ल्यूसी अजमेर

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