धरतीपुत्रों की पुकार, बरसो रे मेघा बरसो...
-मानसून की देरी फसलों पर पड़ रही भारी, सलाना जिले में कृषि कार्य से करीब साठ अरब का होता है कारोबार
-किसानों में बेचैनी, कृषि प्रधान जिले में खेती के अलावा रोजगार का नहीं दूसरा माध्यम
हनुमानगढ़. मानसून की देरी खरीफ फसलों पर भारी पडऩे लगी है। पानी के अभाव में जिले में खरीफ फसलें झुलसने लगी है। किसान बादलों की तरफ टकटकी लगाकर बैठे हैं। जिले की आर्थिक उन्नति में कृषि कार्य का कितना बड़ा योगदान है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि प्रति वर्ष खेती-किसानी से यहां साठ अरब का कारोबार होता है। इस स्थिति में पानी के अभाव में फसलें झुलसेंगी तो इसका असर उत्पादन पर पड़ेगा। वर्तमान में बरसात के अभाव में फसलों को सबसे अधिक नुकसान नोहर, रावतसर, पल्लू के आसपास बारानी इलाकों में हो रहा है। गत माह हुई बरसात के बाद इन क्षेत्रों में किसानों ने बिजाई की थी, अब इन फसलों में सिंचाई पानी की मांग होने पर पानी नहीं मिलने से यह झुलसने लगी है। किसान बारिश की बाट जोह रहे हैं।
जिले में हालात ऐसे हो रहे हैं कि इंदिरागांधी नहर में करीब पांच माह से सिंचाई पानी नहीं चला है। तपिश के चलते अब फसलों में सिंचाई पानी की मांग लगातार बढ़ रही है। नहरी पानी नहीं मिलने से निराश किसान अब मेघों के बरसने का इंतजार कर रहे हैं। लेकिन बादल भी नहीं बरस रहे। इसके कारण फसलों पर विपरीत असर पड़ रहा है। जल्द सिंचाई पानी नहीं मिलने पर फसलों को बड़ा नुकसान हो सकता है।
कृषि प्रधान हनुमानगढ़ जिले में खेती के अलावा आर्थिक तरक्की का कोई अन्य माध्यम भी नहीं है। फसल उत्पादन होने पर ही किसानों की जेब भरती है। अन्न उत्पादन के माध्यम से ही करोड़ों रुपए धरतीपुत्रों की जेब में आता है। परंतु इस वर्ष ऐसे हालात बन रहे हैं कि किसानों को किसी तरफ से राहत नजर नहीं आ रहा है। बीबीएमबी में मजबूत नेतृत्व नहीं होने का खमियाजा इंदिरागांधी नहर क्षेत्र से जुड़े दस जिलों को भुगतना पड़ रहा है।
बरसात पर नजर
अभी तक जिले में मानसून सक्रिय नहीं हुआ है। इससे फसलों में सिंचाई पानी की कमी दूर नहीं हो रही है। हनुमानगढ़ तहसील में १५ जुलाई २०२१ तक महज ०५ एमएम बारिश हुई है। इसी तरह पीलीबंगा में भी इतनी बारिश ही हुई है। संगरिया में एक ही दिन में ६२ एमएम बारिश हुई थी। इसके बाद यहां भी बरसात नहीं हुई। टिब्बी में १५, रावतसर में ०५, नोहर में ०७, भादरा में ४३ एमएम बारिश हुई है।
घग्घर में भी नहीं आया पानी
प्राचीन सरस्वती तथा वर्तमान में घग्घर नदी में भी इस बार पानी की आवक नहीं हुई है। इस नदी के सूखी रहने से इसके आसपास धान की बिजाई नहीं हो पाई है। कुछ किसान ट्यृबवैल के सहारे बिजाई कर रहे हैं। मगर नदी में पानी नहीं आने पर इस फसलों में भी सिंचाई पानी की कमी दूर नहीं हो पाएगी। नदी प्रवाह क्षेत्र के किसान बेसब्री से पानी आने का इंतजार कर रहे हैं।
बिजाई पर नजर
हनुमानगढ़ जिले में बारह जुलाई 2021 तक 158700 हेक्टेयर में नरमा-कपास की बिजाई की गई है। इसी तरह 120990 हेक्टेयर में ग्वार, 25910 हेक्टेयर में बाजरा, 21210 हेक्टेयर में धान, 63800 हेक्टेयर में मूंग, 12810 में मोठ, 10350 हेक्टेयर में मूंगफली की बिजाई की गई है। बारानी क्षेत्रों में सिंचाई पानी नहीं मिलने से मूंग, मोठ, बाजरा, ग्वार आदि फसलों पर विपरीत असर पड़ रहा है।
....वर्जन...
जिले में सिंचाई पानी की कमी के चलते खरीफ फसलों पर विपरीत असर पड़ रहा है। रावतसर व पल्लू इलाके में जहां गत दिनों हुई बरसात के बाद बिजाई हुई थी, वहां अब फसलों को सिंचाई पानी नहीं मिलने से फसलों के झुलसने की सूचना भी मिल रही है।
-दानाराम गोदारा, उप निदेशक, कृषि विभाग हनुमानगढ़