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Table of Contents

का बरसा जब कृषि सुखानी

Friday 24 September 2021 02:41 AM UTC+00

भीलवाड़ा।
रूठा मौसम किसानों के सपनों पर भारी पड़ा है। जिले में फसलों में 30 से 50 प्रतिशत नुकसान का आंकलन है। सबसे ज्यादा नुकसान मक्का, मूंग व उड़द में है। करेड़ा, रायपुर, सहाड़ा, हुरड़ा सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्र में है। जबकि अन्य पटवार मंडल में २५ से ३५ प्रतिशत का खराबा बताया जा रहा है। किसानों को तत्काल राहत देने के लिए बीमा कम्पनी को प्रस्ताव भेजा है। हालांकि वास्तविक खराबे का आंकलन फसल कटाई प्रयोग के दौरान होगा। अभी केवल आंखों देखी आंकलन के आधार पर ५० प्रतिशत का खराबा माना गया है।
कृषि अधिकारियों का कहना है कि अगस्त व सितम्बर में खरीफ की फसलों को पानी की काफी जरूरत रहती है। इस समय बीज बनने की क्रिया चालू रहती है जिसमें काफी पानी चाहिए, लेकिन बारिश नहीं होने से फसलों में बीज नहीं बन पाया या दाने नहीं बन पाए हैं। कृषि अधिकारी ने बताया कि फसल पकने के समय फसलों को बारिश की जरूरत होती है, जो समय पर नहीं हो सकी। इससे किसानों को लाखों रुपए का नुकसान हुआ है।
86 पटवार मंडल में मक्का की फसल खराब
कृषि अधिकारियों का कहना है कि जिला कलक्टर के निर्देश पर जिले भर में किए गए सर्वे में 86 पटवार मंडल में मक्का की फसल में करीब 50 प्रतिशत से अधिक खराबा है। इनमें करेड़ा के 15 पटवार मंडल, सहाड़ा के 30, रायपुर के 20 तथा हुरड़ा के 21 पटवार मंडल शामिल हैं। इसके अलावा जिले के अन्य पटवार मंडल में 25 से 30 प्रतिशत से अधिक का खराबा है।
27 पटवार मंडल में मूंग की फसल खराब
प्रारम्भिक सर्वे में 27 पटवार मंडल में मूंग की फसल 50 प्रतिशत से अधिक फसल में खराबा है। इनमें करेड़ा पटवार मंडल के सभी 24 मंडल में तथा हुरड़ा के ३ पटवार मंडल में मूंग की फसल खराब हुई है। इसके अलावा आसीन्द समेत अन्य पटवार मंडल में भी खराबा हुआ है।
51 पटवार मंडल में उड़द में खराबा
जिले में ऐसे में मूंग व उड़द की फसल पूरी तरह से खराब हो गई है। लेकिन प्रारम्भिक सर्वे में 51 पटवार मंडल में 50 प्रतिशत से अधिक का खराबा है। इनमें रायपुर व करेड़ा पटवार मंडल में उड़द की फसल पूरी तरह से खराब हो चुकी है। रायपुर में 25 व करेड़ा में 24 पटवार मंडल हैं। जबकि हुरड़ा के 2 मंडलों में भी उड़द की फसल खराब हुई है।
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मूंग व उड़द में सबसे ज्यादा खराबा
जिला कलक्टर के निर्देश पर किए गए फसल खराबे के सर्वे में जिले में लगभग मूंग व उड़द की फसलों में सबसे ज्यादा खराबा है। इसके अलावा मक्का में भी 50 प्रतिशत का खराबा है। वास्तविक आंकलन फसल कटाई प्रयोग के दौरान होगा। हाालंकि किसानों को राहत दिलाने के लिए जिला कलक्टर को व बीमा कम्पनी को लिखा है।
रामपाल खटीक उपनिदेशक कृषि विभाग भीलवाड़ा

जयप्रकाश सिंह
केस-1
भीलवाड़ा जिले के कोटड़ी थाना इलाके में गत 19 अप्रेल की रात नाकाबंदी के दौरान कांस्टेबल ओंकार रायका ने तस्करों की गाड़ी रूकवाने की कोशिश की तो तस्करों ने उस पर फायरिंग कर दी। बिना बुलेट प्रुफ जैकेट के खड़े ओंकार के सीने में गोली लगी और अस्पताल आते-आते उसने दम तोड़ दिया।
केस- 2
जिले के रायला थाना इलाके में 19 अप्रेल की ही देर रात पीछा कर रहे पुलिसकर्मियों पर तस्करों ने फायरिंग कर दी। पुलिस की जीप के पास खड़े कांस्टेबल पवन चौधरी के सिर में गोली लगी और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। चौधरी ने बुलेटप्रुफ हेलमेट नहीं पहन रखा था।

भीलवाड़ा। ये दो केस तो केवल उदाहरण है। भीलवाड़ा जिले में मादक पदार्थ तस्करों की गोली से बचने के लिए पुलिस के पास पर्याप्त बुलेट प्रुफ जैकेट और हेलमेट तक नहीं है। जिले में पुलिस के पास मात्र 80 बुलेट प्रुफ जैकेट और 75 हेलमेट है, जबकि यहां दो हजार से ज्यादा पुलिस अधिकारी और जवान कार्यरत है। जिले में 34 थाने है। इन थाना क्षेत्रों से अक्सर मादक पदार्थ लेकर मारवाड़ और पंजाब के तस्कर गुजरते हैं। ये तस्कर अत्याधुनिक हथियारों से लैस रहते हैं। नाकाबंदी या पीछा करने के दौरान ये फायरिंग करने से भी नहीं चूकते। यहीं कारण है कि दो जवानों की जान चली जाने के बाद अब नाकाबंदी के दौरान फ्रंट लाइन में रहने वाले पुलिसकर्मियों के लिए बुलेट प्रुफ जैकेट और हेलमेट की मांग होने लगी है।
जिले में तस्करी के कई रास्ते
भीलवाड़ा जिले की कुछ तहसीलों और समीपवर्ती जिले में चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़, नीमच और मंदसौर में अफीम की सबसे ज्यादा पैदावार होती है। इन जिलों से अफीम, डोडा चूरा लेकर तस्कर भीलवाड़ा के विभिन्न इलाकों से होकर मारवाड़ में जोधपुर, बाड़मेर, पाली, सिरोही जालोर जाते हैं, वहीं कई तस्कर अजमेर, नागौर होते हुए बीकानेर, हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर और पंजाब जाते हैं। अप्रेल में फायरिंग की घटना के बाद भीलवाड़ा जिले में सख्ती के बाद अब तस्कर चित्तौड़गढ़ से उदयपुर और राजसमन्द होकर भी मारवाड़ में जा रहे हैं।
हाइवे पर बड़े वाहन, गांवों में छोटे वाहनों में तस्करी
तस्कर बड़े और छोटे दोनों तरह के वाहनों में तस्करी कर रहे हैं। मादक पदार्थ लेकर जाने वाले ट्रक नेशनल हाइवे पर हमीरगढ़, पुर, रायला, गुलाबपुरा, बिजयनगर, ब्यावर होते हुए मारवाड़ तथा अजमेर, नागौर, बीकानेर होते हुए पंजाब की ओर चले जाते हैं, जबकि छोटे वाहन जिले में करीब एक दर्जन रास्तों से होकर मारवाड़ और पंजाब की जाते हैं। जानकारों के अनुसार बड़े वाहनों में तस्करी में चार या पांच चक्कर में एक बार होती है, जबकि छोटे वाहनों में लगातार तस्करों का मूवमेंट रहता है।
थानों में थी सेटिंग
अप्रेल में दो पुलिसकर्मियों की हत्या के बाद पुलिस ने जांच की तो जिले के विभिन्न थानों के आधा दर्जन पुलिसकर्मियों की तस्करों से मिलीभगत सामने आई। इनके अलावा चित्तौड़गढ़ और जोधपुर के दो पुलिसकर्मी भी पकड़ में आए। सभी पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी के बाद उन्हें बर्खास्त कर दिया गया। जानकारों के अनुसार तस्करों के रूट में इतने जिले और थाने पड़ते है कि बिना पुलिसकर्मियों की मिलीभगत के उनका इतना लम्बा रास्ता पार करना संभव नहीं हैं। कहीं न कहीं उनका पुलिस से सामना हो ही जाता।
उनके पास लग्जरी गाड़ी, पुलिस के पास खटारा
मादक पदार्थ तस्करों के पास हाई स्पीड की लग्जरी गाडि़यां है, जबकि जिले में अधिकांश थानों में पुरानी जीपें है। कई बार तस्करों का पीछा करते समय ये जीपें हांपने लगती है। ऐसे में तस्करों के खिलाफ कार्रवाई में पुलिस कई बार निजी वाहनों का उपयोग करती हैं।
आधुनिक हथियार, पर अभ्यास नहीं
पिछले कुछ समय से पुलिस के पास भी आधुनिक हथियार आए हैं। जवानों के पास अब थ्री नॉट थ्री के बजाय एके-47, एसएलआर और शॉटगन जैसे हथियार है, लेकिन बहुत कम इस्तेमाल होने के कारण मुठभेड़ के दौरान जवान इसे आसानी से से नहीं चला पाते, जबकि तस्कर अंधाधुंध फायरिंग कर देते है। वहीं कई पुलिसकर्मी मुठभेड़ को लेकर उठने वाले सवाल और कानूनी कार्रवाई से भी घबराते हैं, ऐसे में वे गोली चलाने के लिए कई बार हिचक जाते हैं।
पूरे प्रदेश में 5 हजार जैकेट
पूरे प्रदेश में पुलिसकर्मियों के पास पांच हजार बुलेट प्रुफ जैकेट है। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक [प्लांिनंग और आधुनिकीकरण] गोविंद गुप्ता ने बताया कि साढ़े तीन सौ नई जैकेट खरीदने के लिए प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा गया है। इस पर जल्दी स्वीकृति मिलने की उम्मीद है।
'' जिले में नाकाबंदी के दौरान पुलिसकर्मियों को जैकेट पहनने की हिदायत दी गई है। सभी थानों में बुलेट प्रुफ जैकेट और हेलमेट हैं। पुलिस की सख्ती के कारण तस्कर दूसरे जिलों से होकर जा रहे हैं.
- विकास शर्मा, पुलिस अधीक्षक भीलवाड़ा
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पुलिस ने मादक पदार्थ पकड़ा
मादक पदार्थ 2019 2020 2021
डोडा चूरा 8090 किलोग्राम 7117 किलोग्राम 8980 किलोग्राम
स्मैक 16 ग्राम 6 मिलीग्राम 79 ग्राम
अफीम 17 किलो 277 ग्राम 36 किलोग्राम 12 किलो 500 ग्राम
गांजा 115 किलोग्राम 360 किलोग्राम 35 किलोग्राम

भीलवाड़ा।
ब्याज मुक्त लोन की इंदिरा गांधी शहरी क्रेडिट कार्ड योजना का पोर्टल शुरू हो गया है। इसके साथ ही आवेदन लेना भी शुरू हो गए हैं। इस योजना के तहत स्ट्रीट वेंडर्स एवं छोटे छोटे व्यापार के लिए लोन दिया जाएगा।
नगर परिषद के जिला परियोजना अधिकारी (एनयूएलएम) अमृत लाल खटीक ने बताया कि अब 50 रुपए शुल्क देकर ई मित्र के माध्यम से या एसएसओ आईडी के माध्यम से स्वयं नि:शुल्क आवेदन कर सकते हंै। पहले आओ पहले पाओ की तर्ज पर लोन स्वीकृत किए जाएंगे। इसलिए शहरी क्षेत्र के पात्र व्यक्ति शीघ्र आवेदन करें। ग्रामीण इस योजना के पात्र नहीं है। राजस्थान पत्रिका के 17 सितम्बर के अंक में बिन ब्याज के ऋण की योजना का पोर्टल भूली सरकार, नगर परिषद के चक्कर लगा रहे जरूरतमंद शीर्षक से प्रकाशित समाचार के बाद इस पोर्टल को प्रारम्भ किया गया।
उन्होंने बताया कि जिले की सभी नगरीय निकाय भीलवाड़ा, आसींद, गुलाबपुरा, शाहपुरा, जहाजपुर, गंगापुर, मांडलगढ़ के निवासी आवेदन कर सकते हैं। किसी भी प्रकार की परेशानी होने पर संबंधित नगर निकाय या नगर परिषद में सम्पर्क कर सकते है।
ये कर सकते आवेदन
स्ट्रीट वेन्डर जिनके पास नगर परिषद का वेंडिंग लाइसेंस है या अभिशंषा पत्र है। सर्विस सेक्टर के व्यक्ति। बेरोजगार व्यक्ति जिनको बेरोजगारी भत्ता नहीं मिल रहा। राजस्थान का मूल निवासी होने के साथ ही शहरी क्षेत्र में रहता हो। आयु 18 से 40 वर्ष हो। आवेदक की मासिक आय 15 हजार रुपए से कम तथा परिवार की मासिक आय 50 हजार से कम हो।
ये दस्तावेज जरूरी
एक फोटो, जनआधार कार्ड, आधार कार्ड, वर्तमान निवास दस्तावेज जो पार्षद से प्रमाणित हो, मूल निवास दस्तावेज, बैंक पास बुक, शपथ पत्र मय पार्षद प्रमाणीकरण, यदि वेन्डर है तो वेन्डर प्रमाण पत्र या अभिशंषा पत्र। या यदि बेरोजगार है तो बेरोजगारी भत्ता नही मिलने का रोजगार अधिकारी का प्रमाण पत्र (शपथ पत्र के साथ ही) या यदि सर्विस कार्य करते है तो उसका सत्यापन प्रमाण पत्र। (शपथ पत्र के साथ ही) पेश कर सकता है।

भीलवाड़ा।
यहां तेरापंथ नगर में चातुर्मास कर रहे आचार्य महाश्रमण ने अपने प्रवचन में कहा कि दो शब्द हैं, शास्त्र व शस्त्र। शास्त्र वह होता है जिससे व्यक्ति को शिक्षा, शासन व अनुशासन प्राप्त होता है। यदि इसे ग्रहण कर मनुष्य आगे बढ़ता है तो यह शास्त्र उसके लिए त्राण भी बन सकता है। शास्त्र से जीवन का मानों विधान मिलता है। शास्त्र से ही शासन किया जाता है और अनुशासित भी किया जाता है। दूसरी ओर जिससे हिंसा की जाए, वह शस्त्र होता है। आगम में दस प्रकार के शस्त्र बताए गए हैं। अग्नि, विष, नमक, स्नेह, क्षार, अम्ल, दुष्प्रयुक्त, मन, दुष्प्रयुक्त, वचन, दुष्प्रयुक्त काया और अविरति।
आचार्य ने इन सभी शस्त्रों को विस्तार से व्याख्या करते हुए कहा कि आदमी को इन सभी को छोडऩे का प्रयास करना चाहिए। अहिंसा की पालना के लिए हिंसा को जानना जरूरी होता है। व्यक्ति अच्छाई और बुराई दोनों को जानता है, लेकिन जानने के बाद बुराई छोडऩे की चीज होती है और अच्छाई को ग्रहण करना चाहिए। साध्वी संबुद्धयशा ने आश्रव और परिश्रव पर प्रकाश डाला।

भीलवाड़ा।
राज्य सरकार ने किसानों के हित में बड़ा फैसला लेते हुए भूमि विकास बैंक से दीर्घकालीन कृषि ऋण लेने वाले किसानों के लिए 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान की योजना लागू की है। अब समय पर ऋण चुकाने वाले काश्तकारों को 5 प्रतिशत ब्याज दर से ऋण मिल पाएगा। यह योजना 31 मार्च 2022 तक लागू रहेगी।
बैंक सचिव ने बताया कि यह ब्याज दर किसी भी वाणिज्यिक बैंक द्वारा ली जाने वाली ब्याज दर से सबसे कम है। किसानों को कृषि कार्यों के लिए ऋण की सर्वाधिक आवश्यकता होती है, लेकिन ब्याज दर अधिक होने के कारण किसान को ब्याज चुकाने में परेशानी का सामना करना पड़ता था और कृषि कार्यों में रुकावट भी पैदा होती थी।
31 मार्च तक मिलेगा लाभ
1 अप्रेल 2021 से 31 मार्च 2022 तक की अवधि में ऋण लेने वाले सभी किसानों को योजना का लाभ मिलेगा। दीर्घ कालीन कृषि ऋण 10 प्रतिशत की ब्याज दर पर देय होता है तथा समय पर ऋण चुकता करने वाले किसानों को 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान देकर उन्हें राहत प्रदान की गई है।
इन कार्यों के लिए ऋण पर मिलेगा अनुदान
किसान लघु सिंचाई के कार्य जैसे नवकूप, नलकूप, कूप गहरा करने, पम्पसैट, फव्वारा ड्रिप सिंचाई, विद्युतीकरण, नाली निर्माण, डिग्गी, हौज निर्माण तथा कृषि यंत्रीकरण के कार्य जैसे ट्रेक्टर, कृषि यंत्रादि, थ्रेसर, कम्बाईन हार्वेस्टर आदि को क्रय करने के लिए दीर्घ कालीन अवधि के लिए ऋण ले सकते हैं। डेयरी, भूमि सुधार, भूमि समतलीकरण, कृषि भूमि क्रय, अनाज, प्याज गोदाम निर्माण, ग्रीन हाउस, कृषि कार्य के लिए सोलर प्लांट, कृषि योग्य भूमि की तारबंदी, बाउण्ड्रीवाल, पशुपालन, वर्मी कम्पोस्ट, भेड़, बकरी, सुअर, मुर्गी पालन, उद्यानीकरण, ऊंट, बैल गाड़ी क्रय जैसी कृषि संबद्ध गतिविधियों के लिए लिए गए दीर्घ कालीन ऋण भी इस योजना में शामिल होंगे।

भीलवाड़ा।
श्राद्ध समाप्त होने के साथ ही त्योहारी सीजन के लिए बाजार तैयार हो रहे हैं। बड़े थोक व्यापारियों ने उम्मीदों के सहारे आने वाले नवरात्र व इसके बाद के त्योहारों को देखते हुए खरीदारी और माल के ऑर्डर भेजने की तैयारी कर ली है। अधिकांश बाजार में अभी थोक व्यापारी और कुछ अन्य ने भी त्योहारों को देखते हुए अभी से तैयारी करनी शुरू कर दी है। कोरोना का साया पूरी तरह से समाप्त हो जाए और बड़े त्योहारों पर खरीदारी परवान चढ़े, इसी उम्मीद के साथ बाजार को बूम मिलने की पूरी संभावना है। व्यापारी भी यही चाहते हैं कि मार्केट की मंदी दूर हो और खरीदारों से बाजार गुलजार नजर आए। नवरात्र के साथ ही फिर से बाजारों को बूस्ट मिलने की हर किसी को उम्मीद है। इसके लिए माल मंगवाने और खरीदारी को लेकर प्लान तैयार हो चुके हैं।
शुभ मुहूर्त का रहेगा सभी को इंतजार
कोविड की मुश्किलों और मंदी का रोड़ा अटकने के बावजूद बाजार त्योहारी सीजन में उड़ान भरने को तैयार है। कारोबारी गिरावट के बाद भी इस दीपावली को लेकर व्यापारी मुस्तैद हैं। ग्राहक के साथ उन्हें भी नवरात्र, दशहरा, दीपावली पर शुभ मुहूर्त का अभी से ही इंतजार है।
मांग पर निर्भर है बाजार
व्यापारियों का मानना है कि बाजार मांग पर निर्भर है। इसलिए इस बार यह उम्मीद है कि पिछली बार के मुकाबले कोरोना का असर अधिक रहा है, लेकिन अच्छी बात यह है कि अब भीलवाड़ा जिले से कोरोना लगभग गायब हो गया है। इसलिए इस बार नवरात्र से लेकर दिवाली तक बाजार में हर वस्तु की मांग बढऩे की पूरी उम्मीद है। यह बाजार के लिए अच्छा संकेत माना जा रहा है।
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व्यापारियों को त्योहार देंगे राहत
कोरोना के कारण व्यापारी काफी आहत रहे हैं। उन्हें उम्मीद इस बात की है कि त्योहार अच्छे से निकल जाए तो काफी राहत मिलेगी। पहले ही दो बार के लॉकडाउन होने से बड़ा नुकसान झेल चुके हैं। अब आने वाले त्योहारों पर उम्मीद टिकी है कि जमकर बिक्री हो और कोविड का साया दूर-दूर तक नजर नहीं आए।
प्रशांत सुथार, फर्नीचर व्यवसायी
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मांग ज्यादा रहने की उम्मीद
कोरोना का साया लगभग पूरी तरह से हट तो गया है लेकिन अभी भी सभी को सावधानी रखनी होगी। कोरोना नहीं होने से लोग बाजार आएंगे और त्योहारों पर बिक्री बूम पर होगी। रेडीमेड कपड़ों की ग्राहकी भी अच्छी चलने की उम्मीद है।
मनोज पेशवानी, रेडीमेड व्यवसायी
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मोबाइल पर मिलेगी कई स्कीम
नवरात्र पर ही मोबाइल फोन पर कई तरह के ऑफर दिए जाएंगे। इस बार त्योहारी सीजन पर ऑन लाइन पर भी कई तरह के ऑफर आएंगे। लेकिन ऑफ लाइन मोबाइल लेने से कई तरह के ऑफर के साथ अन्य कई फायदे भी रहते हैं। ग्राहकों को इस ओर ध्यान देना चाहिए।
रोहित डाड, मोबाइल व्यवसायी

भीलवाड़ा।
जिले के विभिन्न समाज अतिथि देवो भव: की अपनी परम्परा को निभाने जा रहे हैं। बाहर से परीक्षा देने आ रहे परीक्षार्थियों को कोई परेशानी नहीं हो, इसलिए उनका आतिथ्य करने के लिए विभिन्न समाज व संगठन आगे आए हैं। कुछ समाजों ने अपने स्वजातीय बंधुओं के लिए ही तो कुछ ने सर्वसमाज के लिए अपने समाज के भवन, धर्मशालाएं और गेस्ट हाउस खोल दिए हैं। यहां खाने-पीने की निशुल्क व्यवस्था की गई है।
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माहेश्वरी क्षेत्रीय सभा
काशीपुरी वकील कॉलोनी माहेश्वरी क्षेत्रीय सभा की ओर से रीट परीक्षा देने के लिए आने वाले परीक्षार्थियों के भोजन के पैकेट की व्यवस्था की जाएगी। रामधाम रामायण मंडल ट्रस्ट की ओर से पेयजल के लिए प्याऊ लगाई जाएगी। यह व्यवस्था रामधाम व काशीपुरी माहेश्वरी भवन के पास अस्थाई बस स्टैण्ड पर की जाएगी।
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भारत विकास परिषद
भारत विकास परिषद की विवेकानंद शाखा की ओर से दो सेंटर पर भोजन के पैकेट वितरित किए जाएंगे। सेठ मुरलीधर मानसिंहका कन्या विद्यालय चौराहे पर सुबह 11 बजे व शाम 4 बजे तथा राजकीय उच्च माध्य विद्यालय राजेंद्र मार्ग पर भोजन पैकेट वितरण की व्यवस्था रहेगी। दोनो सेन्टरों पर परीक्षा देने वाले प्रवेश पत्र दिखाकर भोजन प्राप्त कर सकेंगे।
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निशुल्क भोजन व्यवस्था
परीक्षा में आने वाले सभी समाज के परीक्षार्थियों के लिए ठहरने, चाय, नाश्ते, भोजन की व्यवस्था सांगानेर रोड पुष्प वाटिका में निशुल्क की गई है। यह व्यवस्था केवल ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराने पर ही रहेगी।
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इंदिरा रसोई से मिलेंगे निशुल्क भोजन पैकेज
रीट परीक्षार्थी को 27 सितंबर तक इंदिरा रसोइयों के माध्यम से निशुल्क भोजन पैकेट उपलब्ध कराए जाएंगे। इस संबंध में स्वायत्त शासन विभाग ने नगरीय निकायों को आदेश भी जारी कर दिए हैं। अभ्यर्थियों से लाभार्थी अंशदान राशि 8 रुपए प्रति थाली नहीं लिया जाएगा। लाभार्थी अशंदान का भुगतान रसोई संचालकों को संबंधित जिला कलक्टर और अध्यक्ष जिला परीक्षा संचालन समिति के स्तर से किया जाएगा। वहीं, राजकीय अनुदान राशि 12 रुपए प्रतिथाली का भुगतान इंदिरा
रसोई मद से पूर्व की भांति किया जाएगा। इंदिरा रसोई पोर्टल पर 27 सितंबर तक भोजन थाली की क्षमता असीमित होगी। अभ्यर्थियों को वितरित निशुल्क भोजन पैकेट्स की एंट्री इन्दिरा रसोई पोर्टल पर नहीं कर ऑफलाइन रिकॉर्ड मेन्टेन होगा।
पैकिंग की व्यवस्था रसोई संचालक द्वारा अपने स्तर से की जाएगी। पैकिंग शुल्क राशि 5 रुपए प्रति पैकिंग का भुगतान भी संबंधित जिला कलक्टर और अध्यक्ष जिला परीक्षा संचालन समिति के स्तर से किया जाएगा। इंदिरा रसोइयों में नियमित रूप में भोजन करने आने वाले व्यक्तियों से नियमानुसार लाभार्थी अंशदान राशि 8 रुपए ली जाएगी। विभागीय आदेशों की पारदर्शिता से पालना करने के लिए इंदिरा रसोइयों में एक कर्मचारी की ड्यूटी लगाई जाने और अभ्यर्थियों को भोजन पैकेट्स वितरण का कार्य स्थानीय प्रशासन/ नगर निकाय द्वारा अपने स्तर से करने के निर्देश दिए गए हैं।

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