>>: 12 साल की मासूम ने किया मजहबी पहचान बदलने से इन्कार

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मनीष कुमार सिंह

अजमेर. बारह साल की मासूम ने मजहबी पहचान अपनाने से इनकार कर दिया। इन हालात में मासूम बालिका स्कूल से घर ना लौटकर दादा-दादी के पास पहुंच गई। मां ने मामले में आदर्शनगर थाने में शिकायत की तो माजरा परत दर परत खुलता चला गया। पुलिस पड़ताल में मासूम बालिका दादा-दादी के घर तो मिली लेकिन उसके बयान ने पुलिस को हैरत में डाल दिया। अब मामला जिला बाल कल्याण समिति के पास है। समिति अध्यक्ष अंजली शर्मा व सदस्यों ने मासूम बालिका के बयान सुनने के बाद उसे दादा-दादी के सुपुर्द कर दिया, जबकि आदर्शनगर थाना पुलिस को प्रकरण में गहनता से जांच के आदेश दिए।

आदर्शनगर थाने के बड़गांव में रहने वाली 12 साल की स्कूल से घर ना लौटकर दादा-दादी के पास सेंदरिया पहुंच गई। इधर बेटी के घर नहीं लौटने से परेशान मां ने आदर्शनगर थाने में अपने पूर्व ससुर व देवर के खिलाफ शिकायत दे दी। पुलिस पड़ताल करते हुए सेदरिया पहुंची तो मासूम बालिका अपने दादा के घर मिल गई। बालिका ने पुलिस के समक्ष अपनी मां के पास जाने से इनकार करते हुए अपने साथ पेश आने वाली घटनाएं बयान कर दी। पुलिस ने मामला बच्ची से जुड़ा होने के चलते जिला बाल कल्याण समिति अध्यक्ष अंजली शर्मा के समक्ष पेश किया।

मां ने बदल लिया मजहब

मासूम के बयान में आया कि पिता की मौत के बाद परिवार के हालात बदले तो मां ने डेढ़ साल पहले ना केवल घर बदला बल्कि घर के साथ मजहब भी बदल लिया। उस पर और उसके बहन-भाई पर अंजान सख्श को पिता कहने, दूसरे मजहब की परम्परा, मान्यताओं को अपनाने का दबाव डाला जा रहा था। दूसरे मजहब की तालीम शुरू करते हुए कपड़े पहनने की बंदिश भी लगाई जाने लगीं, लेकिन उसे यह नागवार गुजरा। पड़ताल में आया कि बालिका पहले भी घर छोड़कर दादा-दादी के पास पहुंची लेकिन तब दादा-दादी, पुलिस और जिला बाल कल्याण समिति के समक्ष कुछ नहीं बोल सकी। इस पर उसको मां को सुपुर्द कर दिया।

ट्यूशन टीचर को किया तलब

मामले में बाल कल्याण समिति ने आदर्शनगर थाना पुलिस को जांच के आदेश देते हुए ट्यूशन टीचर को तलब किया है। ट्यूशन टीचर भी मासूम बालिका को ना केवल उसे उसका बदला हुआ नाम लिख-लिखकर याद करवाया जा रहा था बल्कि उसका तालीम भी दी जा रही थी। मामले में पुलिस अब बालिका के सहपाठी व आसपास के बच्चों से भी पड़ताल करेगी।

...अब नहीं आएगी मां की याद

पत्रिका संवाददाता ने जब बालिका से बात की तो उसने बताया कि अब उसे मां की याद कभी नहीं आएगी। जब भाई बहन बड़े हो जाएंगे तब वह उन्हें भी अपने पास ले आएगी। अब वह कभी अपनी मां से नहीं मिलना चाहती है। दादा-दादी के पास रहकर पढ़ना चाहती है।

इनका कहना है...

बालिका पहले भी सीडब्ल्यूसी के समक्ष आ चुकी है। मगर उसने अब जो बयान दिए वो गम्भीर है। समिति सदस्य अरविन्द कुमार मीणा, रूपेश कुमार, राज लक्ष्मी व तब्बसुम बानो ने सामूहिक निर्णय कर बालिका को दादा-दादी के सुपुर्द किया है। प्रकरण में आदर्शनगर थाना पुलिस जांच कर रही है।

अंजली शर्मा, अध्यक्ष, जिला बाल कल्याण समिति, अजमेर

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