>>: 15 साल में बदले तीन मुख्यमंत्री फिर भी मिस्ट्री बना हुआ है यह हत्याकांड

>>

Patrika - A Hindi news portal brings latest news, headlines in hindi from India, world, business, politics, sports and entertainment!

15 साल। तीन मुख्यमंत्री। तीन विधानसभा चुनाव संपन्न हो गए लेकिन इतने साल में राजस्थान की पुलिस कोर्ट में यह साबित नहीं कर पाई की छीतरमल की हत्या किसने की। राजस्थान पुलिस ने न नए सबूत तलाश की और नह ही सही ढंग से तहकीकात की। सबूतों और गवाहों के अभाव में राजस्थान उच्च न्यायालय ने आरोपियों को दोषमुक्त करार दिया है।

हत्या के आरोपी राजेंद्र कुमार पर पुलिस ने अपनी चार्जशीट में कहा था कि 3 सितंबर 2008 को चारों को पीलिया का टीका लगाने के नाम पर जहर का इंजेक्शन लगा दिया था। इससे चारों की मौत हो गई। अब सवाल यह है कि छीतरमल, उनकी पत्नी और दोनों बेटों की हत्या किसने की। राजेंद्र हत्यारा था तो जांच में इतनी खामियां कैसे रह गईं, जिसके कारण कोर्ट ने उसको बरी कर दिया।

जिस समय यह हत्या हुई उस समय प्रदेश में अशोक गहलोत की सरकार थी। फिर वसुंधरा राजे की सरकार आई और फिर से अशोक गहलोत की सरकार आई। अब सवाल वही है कि आखिर छीतरमल को किसने मारा।

पलट गए गवाह
पुलिस ने जिनसे हत्या की जानकारी मिलने का दावा किया। उन्होंने ही पुलिस पर ही जबरन बयान लिखने का आरोप मढ़ दिया। जो कैनुला व इंजेक्शन पुलिस ने जब्त किए,उन पर एफएसएल जांच में जहरीली दवा के प्रमाण ही नहीं मिले। जहां शव मिले, वह कमरा अंदर से बंद था। उधार के पैसों के लिए हत्या किए जाने का प्रमाण भी पेश नहीं कर पाई। वारदात के समय राजेंद्र कुमार के मोबाइल की लोकेशन का रिकार्ड ही पेश नहीं किया गया। इसी आधार पर राजेंद्र कुमार को दोषमुक्त करार दिया गया।

चौमूं एडीजे ने सुनाई थी सजा
करीब 15 साल पुराने इस मामले में एडीजे कोर्ट चौमूं ने 9 साल पहले उम्रकैद की सजा सुनाई थी। राज्य सरकार ने रेयरेस्ट बताते हुए मृत्युदंड दिलाने के लिए अपील दायर की। हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का सजा का आदेश रद्द करते हुए वर्षों से जेल में बंद राजेन्द्र कुमार को दोषमुक्त कर रिहाई का रास्ता खोल दिया।

 

You received this email because you set up a subscription at Feedrabbit. This email was sent to you at rajasthanews12@gmail.com. Unsubscribe or change your subscription.