>>: सरकारी इंग्लिश मीडियम स्कूलों में भी चलेगी स्काउट गाइड गतिविधियां, टीचर्स को दिया जाएगा प्रशिक्षण

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जयपुर। प्रदेश के महात्मा गांधी स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों के व्यक्तित्व में निखार, उन्हें जीवन जीने की कला सिखाने के लिए अब इन स्कूलों में भी स्काउट गाइड एक्टिविटीज की शुरुआत की जाएगी। इससे पहले विभाग स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने वाले टीचर्स को प्रशिक्षित करेगा जिससे वह बच्चों को स्काउट गाइड एक्टिविटीज से जोड़ सके। विभागीय कार्ययोजना के मुताबिक स्कूल के एक पुरुष और एक महिला शिक्षक को स्काउट गाइड में दक्ष किया जाएगा।

पहले टीचर्स को दी जाएगी ट्रेनिंग
अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों के टीचर्स के लिए 3 से 11 मई तक प्रशिक्षण शिविर होंगे। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय के अनुसार उदयपुर के मंडल प्रशिक्षण केंद्र पर उदयपुर, प्रतापगढ़, बांसवाड़ा, चित्तौडगढ़़, राजसमंद व डूंगरपुर के शिक्षक के प्रशिक्षण होंगे। वहीं सवाईमाधोपुर के प्रशिक्षण केंद्र पर भरतपुर, धौलपुर, करौली, सवाईमाधोपुर, अजमेर स्थित पुष्करघाटी केंद्र पर अजमेर, भीलवाड़ा, नागौर, टोंक, जयपुर स्थित बनीपार्क प्रशिक्षण केंद्र पर जयपुर, सीकर, दौसा, अलवर के शिक्षक, जोधपुर स्थित शिक्षण केंद्र पर जोधपुर पाली, सिरोही, जैसलमेर, जालौर, बाड़मेर जिले तथा कोटा स्थित आलनिया प्रशिक्षण केंद्र पर कोटा, बून्दी, झालावाड़ व बारां, बीकानेर स्थित रिडमलसर प्रशिक्षण केंद्र पर बीकानेर, चूरू, हनुमानगढ़, झुंझुनू व श्रीगंगानगर जिले के शिक्षक प्रशिक्षण लेंगे।

इन गतिविधियों की होगी शुरुआत
बन्नी -3 से 5 वर्ष के शिशुओं के लिए संचालित सबसे कनिष्ठ शाखा
कब - 5 से 10 वर्ष के बालकों के लिए संचालित गतिविधि
बुलबुल - 5 से 10 वर्ष के बालिकाओं के गतिविधि
स्काउटिंग-10 से 17 वर्ष के बालको की गतिविधि
गाइडिंग -10 से 17 वर्ष की गतिविधि,जीवन उपयोगी कला का प्रशिक्षण,1910 में प्रारंभ
रोवरिंग-15 से 25 वर्ष के युवाओं की गतिविधि व्यक्तित्व विकास एवं जीवन उपयोगी कलाओं का प्रशिक्षण, साहसिक गतिविधियां, समाज सेवा सामुदायिक सेवा।
रेंजरिंग -15 से 25 वर्ष के युवतियों की गतिविधि व्यक्तित्व विकास एवं जीवन उपयोगी कलाओं का प्रशिक्षण,साहसिक गतिविधियां,समाज सेवा सामुदायिक सेवा आदि ।

इसलिए है स्काउट गाइड की आवश्यकता
शिक्षा विभाग का मानना है कि बढ़ती प्रतिस्पद्र्धा के दौर में बच्चे सोशल लाइफ से विमुख हो रहे हैं। पेरेंट्स के दबाब के चलते बच्चों का सारा ध्यान अधिक से अधिक नंबर हासिल करने पर रहता है। वह शैक्षणिक योग्यता तो अर्जित कर लेते हैं, लेकिन सामाजिक जीवन से अनभिज्ञ रहते हैं, ऐसे में विपरीत परिस्थितियों का सामना नहीं कर पाते। ऐसे में इन बच्चों को जीवन उपयोगी और जीवन रक्षक एक्टिविटीज का प्रशिक्षण देकर उन्हें सामाजिक रूप से विकसित होने का अवसर मिलेगा, स्काउट गाइड के आवासीय शिविरों के माध्यम से परस्पर मेल जोल बढ़ाने के अवसर मिलेंगे। उन्हें उनकी आयु वर्ग के साथ प्रकृति के मध्य सीखने का अवसर मिलेगा, साथ ही व्यवहारिक ज्ञान में वृद्धि होगी और वह विपरीत परिस्थितियों में जीवन जीने की कला सीखने का अवसर भी मिलेगा। इतना ही नहीं स्काउट गाइड का सर्टिफिकेट उन्हें केंद्र सरकार के विभिन्न नौकरियों में विशेष छूट मिलेगी।

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